भारतीय T20I टीम में इन दिनों ओपनिंग पोजीशन को लेकर जबरदस्त कॉम्पिटीशन चल रहा है. संजू सैमसन और अभिषेक शर्मा भारत के परमानेंट T20I ओपनर हैं, लेकिन वैभव सूर्यवंशी भी उन्हें कड़ी टक्कर दे रहे हैं. संजू सैमसन का टी20 इंटरनेशनल क्रिकेट में प्रदर्शन टुकड़ों में देखने को मिल रहा है. वह लगातार अच्छा प्रदर्शन करने में नाकाम रहे हैं, लेकिन फिर भी वैभव सूर्यवंशी को टीम इंडिया की प्लेइंग इलेवन में मौका नहीं दिया जा रहा है. हेड कोच गौतम गंभीर और कप्तान श्रेयस अय्यर ने वेस्टइंडीज के खिलाफ मौजूदा टी20 इंटरनेशनल सीरीज के पांच में से पहले लगातार चार मैचों के लिए वैभव सूर्यवंशी को टीम इंडिया की प्लेइंग इलेवन में शामिल ही नहीं किया.
भारत और वेस्टइंडीज के बीच टी20 इंटरनेशनल सीरीज अभी 2-2 से बराबर है. वैभव सूर्यवंशी अगर वेस्टइंडीज के खिलाफ पहले चार टी20 इंटरनेशनल मैचों में खेलते तो कहानी कुछ और भी हो सकती थी. सीरीज का पांचवां और आखिरी मुकाबला 17 अक्टूबर को बेंगलुरु में आयोजित होगा. वैभव सूर्यवंशी को सबसे पहले जून-जुलाई 2026 में आयरलैंड और इंग्लैंड दौरों के लिए चुना गया था. संजू सैमसन ने आयरलैंड के खिलाफ और फिर इंग्लैंड के खिलाफ पहले टी20 मैच में पारी की शुरुआत की थी, जहां वे मात्र 5, 0 और 1 रन ही बना सके. इसके बाद दूसरे मुकाबले में वैभव सूर्यवंशी को उनका T20I डेब्यू करने का मौका मिला. उन्होंने शुरुआती तीन मैचों में 14, 13 और 15 रन बनाए.
इसके बाद, संजू सैमसन ने इंग्लैंड के खिलाफ पांचवें T20I मैच के जरिए शानदार वापसी की और 27 रनों की पारी खेली, लेकिन जिम्बाब्वे के दौरे के लिए उन्हें रेस्ट दे दिया गया. उस दौरे पर युवा वैभव सूर्यवंशी ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 50, 20 और 81 रनों की बेहतरीन पारियां खेलीं. 1983 के वर्ल्ड कप विजेता कप्तान कृष्णमाचारी श्रीकांत का मानना है कि हेड कोच गौतम गंभीर और कप्तान श्रेयस अय्यर द्वारा लगातार किए जा रहे बदलाव खिलाड़ियों के आत्मविश्वास को बुरी तरह प्रभावित कर रहे हैं.
अभिषेक शर्मा को लगातार मौके मिल रहे हैं, जबकि वैभव सूर्यवंशी के आने के बाद से उनके और संजू सैमसन के बीच जगह को लेकर मुकाबला सा बन गया है. कृष्णमाचारी श्रीकांत ने एक यूट्यूब वीडियो में कहा, 'उन्होंने (हेड कोच गौतम गंभीर और कप्तान श्रेयस अय्यर) न केवल संजू सैमसन का आत्मविश्वास खराब किया है, बल्कि वैभव सूर्यवंशी का आत्मविश्वास भी पूरी तरह से बिगाड़ दिया है. वैभव सूर्यवंशी को वेस्टइंडीज जैसी टीम के खिलाफ कम से कम तीन मैच खेलने का मौका दिया जा सकता था. अब जब उन्होंने अभिषेक शर्मा को काफी समय तक देख लिया है, तो उन्हें आराम दिया जा सकता है और अगले मैच में वैभव सूर्यवंशी और संजू सैमसन ओपनिंग कर सकते हैं.'
कृष्णमाचारी श्रीकांत ने संजू सैमसन की कंसिस्टेंसी पर भी सवाल उठाए. इस ओपनर ने भारत की 2026 टी20 वर्ल्ड कप जीत के दौरान तीन बेहतरीन पारियां (97*, 89, 89) खेली थीं, लेकिन उसके बाद से उनका फॉर्म गिर गया है. कृष्णमाचारी श्रीकांत ने कहा, 'सैमसन का प्रदर्शन हमेशा उतार-चढ़ाव वाला रहा है. उनकी कंसिस्टेंसी पर हमेशा सवाल उठते रहे हैं. वे कभी अचानक टी20 वर्ल्ड कप जैसा कमाल कर दिखाते हैं, तो कभी बुरी तरह फेल हो जाते हैं. अभिषेक शर्मा जैसे खिलाड़ी के साथ ऐसा उतार-चढ़ाव कभी देखने को नहीं मिलता. अब, अगले मैच में संजू सैमसन फिर से रन बनाएंगे.'
इससे पहले वैभव सूर्यवंशी के बचपन के कोच मनीष ओझा भी काफी नाराज हैं. गौतम गंभीर की लीडरशिप वाले टीम मैनेजमेंट पर निशाना साधते हुए, मनीष ओझा ने भारतीय टीम में 'तानाशाही' जैसा बर्ताव करने का आरोप लगाया है. उन्होंने कहा कि वैभव सूर्यवंशी जैसे असाधारण टैलेंट को बाहर बिठाकर इंतजार कराने के बजाय, खेलने के मौके दिए जाने चाहिए. 'टाइम्स नाउ' से बात करते हुए, गुस्से में मनीष ओझा ने कहा कि टीम मैनेजमेंट को शायद लगता है कि खिलाड़ियों को बेंच पर बिठाकर तैयार किया जा सकता है.
मनीष ओझा ने कहा, 'मौजूदा भारतीय टीम मैनेजमेंट को लगता है कि वे खिलाड़ियों को बेंच पर बिठाकर तैयार कर सकते हैं. वे बस यही कर रहे हैं. क्रिकेट के कई अन्य दिग्गज भी हैं. आप उनसे बात करेंगे, तो वे सभी यही कहेंगे कि अगर हमें खिलाड़ियों की अगली पीढ़ी तैयार करनी है, तो उन्हें मैदान पर उतारना होगा, उन्हें खिलाना होगा. बेंच पर बैठकर आज तक कोई खिलाड़ी नहीं बना है, और न ही कभी बनेगा.'
वेस्टइंडीज के खिलाफ भारत के पहले 4 T20I मैचों में वैभव सूर्यवंशी को बेंच पर ही रखा गया है, और टीम मैनेजमेंट ने इस युवा बल्लेबाज को सीरीज में अभी तक खेलने का कोई मौका नहीं दिया है. वैभव सूर्यवंशी एशियन गेम्स 2026 में भारत के लिए खेल चुके हैं, लेकिन वेस्टइंडीज के खिलाफ उन्हें प्लेइंग XI में जगह नहीं मिल पाई है. वैभव सूर्यवंशी के कोच मनीष ओझा ने कहा, 'या तो उन्होंने पहले ही तय कर लिया है कि इस लड़के को कोई मौका नहीं देना है, उसे बाहर रखो और इतना निराश कर दो कि वह परेशान हो जाए. अब क्या ही कहें? जब आप बाहर बैठते हैं, तो आपको लगने लगता है कि टीम में आपकी कोई उपयोगिता ही नहीं है; इससे वह लड़का निराश हो जाता है.' इस उम्र में, इस लड़के को हर मैच खेलकर परिपक्व होना चाहिए और उसके खेल में निखार और सुधार आना चाहिए, लेकिन वह बाहर बैठा है और पानी पिला रहा है. मुझे लगता है कि अभी जो मैनेजमेंट है, वह एक तरह की तानाशाही चला रहा है, जो मन में आता है, बस वही करते हैं.'