भारतीय महिला क्रिकेट में बड़ा बदलाव देखने को मिला है. दिग्गज कप्तान हरमनप्रीत कौर ने टीम की कमान छोड़ दी है. उनकी जगह स्मृति मंधाना को कप्तानी मिली है. 37 साल की हरमन के नेतृत्व ने भारत ने पहली बार वर्ल्ड कप जीता और एशियन गेम्स में लगातार दो बार गोल्ड मेडल अपने नाम किया. इसके बावजूद उनकी कैप्टेंसी नहीं रह पाई. हरमन ने भारी मन से मंगलवार (6 अक्टूबर) को अपना पद छोड़ दिया. कुछ घंटों बाद ही भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) ने मंधाना के नाम की घोषणा कर दी.
हरमन की कप्तानी फाइनल से शुरू होकर फाइनल पर ही खत्म हुई. 2012 में जब भारतीय महिला टीम एशिया कप टी20 के फाइनल में पहुंची तो मिताली राज और झूलन गोस्वामी खेलने के लिए उपलब्ध नहीं थीं. हरमन को अचानक ही पाकिस्तान के खिलाफ फाइनल में कार्यवाहक कप्तान के रूप में उतरना पड़ा. 14 साल बाद एक फाइनल मैच ही उनकी कप्तानी का आखिरी मुकाबला साबित हुआ. टीम इंडिया ने एशियन गेम्स 2026 के गोल्ड मेडल मैच में श्रीलंका को 147 रन से फाइनल जीता.
हरमनप्रीत का गजब रिकॉर्ड
हरमनप्रीत ने 211 मैचों में देश की कप्तानी की और 126 मुकाबलों में जीत हासिल की. इसमें दो गोल्ड मेडल और एक वर्ल्ड कप के साथ आठ टाइटल भी शामिल है. उनकी लीडरशिप 5074 दिनों तक चली, जिसकी शुरुआत 2012 में कार्यवाहक कप्तान के तौर पर हुई थी और यह 2026 में एशियन गेम्स में गोल्ड जीतने के साथ खत्म हुई. उनका सभी फॉर्मेट में जीत का प्रतिशत 59.7 का रहा. 2016 में हरमनप्रीत टी20 की कप्तान बनीं. 2022 में मिताली राज के संन्यास लेने के बाद वनडे और टेस्ट की कमान भी संभाली.

हरमनप्रीत की पर कब-कब उठे सवाल?
कप्तानी पर थी मंधाना की नजर
लंबे समय तक हरमनप्रीत की कप्तानी में डिप्टी रहीं स्मृति मंधाना की नजर कैप्टेंसी पर थी. उन्होंने प्रत्यक्ष रूप से तो नहीं, लेकिन कई बार अप्रत्यक्ष तरीके से कप्तानी को लेकर इच्छा जताई है. वह चयनकर्ताओं के रवैये से नाराज चल रही थीं. उन्हें सिर्फ आश्वासन ही मिल रहे थे. वर्ल्ड कप में भारत की जीत के बाद भी कप्तानी में बदलाव नहीं हुआ था. इसके बाद टीम ने एशियन गेम्स में गोल्ड मेडल जीता. फाइनल में श्रीलंका को हराया था. इस मैच में के बाद मंधाना के सब्र का बांध टूट गया. उन्होंने एक इंटरव्यू में कह दिया कि अब भारत को और बड़े टूर्नामेंट जीतने के लक्ष्य के साथ आगे बढ़ना चाहिए.

गुवाहाटी में क्या हुआ?
हरमनप्रीत की कप्तानी में भारत ने वनडे वर्ल्ड कप तो जरूर जीता, लेकिन दो टी20 वर्ल्ड कप में प्रदर्शन शर्मनाक रहा. इससे छोटे फॉर्मेट में उनकी कप्तानी पर सवाल उठने लगे थे. दूसरी ओर, मंधाना ने महिला प्रीमियर लीग में रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (आरसीबी) के लिए दो खिताब जीतकर चयनकर्ताओं पर दबाव और ज्यादा बढ़ा दिया था. गुवाहाटी में बीसीसीआई सचिव देवजीत सैकिया की अध्यक्षता में हुई समीक्षा बैठक में हरमनप्रीत को स्पष्ट कर दिया गया कि नेतृत्व में बदलाव अब अनिवार्य है. इसके बाद हरमनप्रीत ने खुद ही कप्तानी छोड़ने का फैसला कर लिया.
हरमनप्रीत और स्मृति के रिश्तों में क्यों आई खटास?
कभी एक-दूसरे के बेहद करीब रहने वाली हरमनप्रीत कौर और स्मृति मंधाना के बीच कप्तानी एक संवेदनशील और कांटेदार मुद्दा बन गई थी. रिपोर्टों में यह बात सामने आई कि दोनों के बीच कुछ समय से बातचीत बंद थी और वे एक-दूसरे से नजरें भी नहीं मिला रही थीं, जिसके चलते ड्रेसिंग रूम में असहजता का माहौल बन गया था. गुवाहाटी में दोनों को साथ देखा गया था. वहीं पर हरमनप्रीत ने कप्तानी छोड़ी और मंधाना को कैप्टेंसी मिल गई.