भाषा चुनें
  • Hindi
  • English
  • Marathi
  • Bengali
  • Tamil
  • Malayalam
  • Gujarati
  • Telugu
  • Kannada
  • Odisha
  • Z Bharat
  • ZEE PHH
  • ZEE Business
  • WION
राज्य चुनें
  • उत्तर प्रदेश
  • उत्तराखण्ड
  • मध्य प्रदेश
  • छत्‍तीसगढ़
  • हरियाणा
  • दिल्ली
  • बिहार
  • झारखण्ड
  • राजस्‍थान
  • हिमाचल प्रदेश
  • हिन्दीEnglishमराठीবাংলাதமிழ்മലയാളംગુજરાતીతెలుగుಕನ್ನಡଓଡ଼ିଶାZ BharatPHHBusinessWION
  • facebookyoutubetwitterlinkedinwhatsapp
Zee News Hindi
App
Zee News Hindi
  • News
  • वीडियो
  • फोटोज़
  • रील्स
  • लाइव ब्लॉग
  • राज्य चुनें

Add Zee Business As A Preferred Source
App
  • लेटेस्ट न्यूज़
  • देश
  • खेल
  • दुनिया
  • मनोरंजन
  • बिजनेस
  • ओरिजनल
  • टेक
  • धर्म
  • ऑटो
  • एजुकेशन
  • एस्ट्रोलॉजी
  • राशिफल
  • LIVE टीवी
  • लेटेस्ट न्यूज़
  • देश
  • खेल
  • दुनिया
  • मनोरंजन
  • बिजनेस
  • ओरिजनल
  • टेक
  • धर्म
  • ऑटो
  • एजुकेशन
  • एस्ट्रोलॉजी
  • राशिफल
  • ज़ी न्यूज़ हिंदी
  • /खेल
  • /क्रिकेट
  • /Explained: वैभव सूर्यवंशी में भारत का फ्यूचर कप्तान बनने का दम, क्या टूटेगा सचिन तेंदुलकर और मंसूर अली खान पटौदी का रिकॉर्ड? कोहली जैसे हैं तेवर

Explained: वैभव सूर्यवंशी में भारत का फ्यूचर कप्तान बनने का दम, क्या टूटेगा सचिन तेंदुलकर और मंसूर अली खान पटौदी का रिकॉर्ड? कोहली जैसे हैं तेवर

मैदान पर सबसे कम उम्र के खिलाड़ी होने के बावजूद वैभव सूर्यवंशी ने जिस तरह सीनियर खिलाड़ियों से सजी ईस्ट जोन टीम की कमान संभाली है, उसने उनके लीडरशिप टैलेंट की ओर सबका ध्यान खींचा है. वैभव सूर्यवंशी में सचिन तेंदुलकर की झलक देखने को मिल रही है.

Written ByTarun VermaEdited ByTarun Verma
Published: Sep 09, 2026, 01:34 PM IST|Updated: Sep 09, 2026, 01:49 PM IST
joinshare
Explained: वैभव सूर्यवंशी में भारत का फ्यूचर कप्तान बनने का दम, क्या टूटेगा सचिन तेंदुलकर और मंसूर अली खान पटौदी का रिकॉर्ड? कोहली जैसे हैं तेवर
Image Credit: Vaibhav Sooryavanshi

About the Author

Tarun Verma

Tarun Verma

तरुण वर्मा ज़ी न्यूज़ हिंदी डिजिटल में स्पोर्ट्स डेस्क में कार्यरत हैं. तरुण वर्मा फरवरी 2021 से ज़ी न्यूज का हिस्सा हैं. तरुण वर्मा किसी भी मैच का बारीकी से विश्‍लेषण करने में माहिर हैं. तरुण वर्मा को क्रिकेट व अन्य खेलों से जुड़ी ख़बरों के विभिन्न एंगल्स पर साइड स्टोरीज़ करने के अलावा खिलाड़ियों पर स्‍पेशल पैकेजेस बनाने में बहुत रुचि है. क्रिकेट व अन्य खेलों से जुड़ी हर छोटी-बड़ी जानकारी ज़ी न्यूज़ के पाठकों तक पहुंचाने की ज़िम्मेदारी तरुण वर्मा बख़ूबी निभाते हैं. तरुण वर्मा को क्रिकेट खेलने, किताबें पढ़ने और घूमने का बहुत शौक है. तरुण वर्मा साल 2016 में गौतम गंभीर के कोच संजय भारद्वाज का इंटरव्यू कर चुके हैं. तरुण वर्मा खेलों के कई बड़े-बड़े इवेंट्स को कवर करने का अनुभव रखते हैं. ज़ी न्यूज़ से जुड़ने से पहले तरुण वर्मा इंडिया टुडे ग्रुप मीडिया (Aajtak.in) संस्थान का भी हिस्सा रह चुके हैं. आप Tarun.Verma@India.com पर सीधे ईमेल कर इनसे जुड़ सकते हैं. तरुण वर्मा एक दशक से पत्रकारिता में सक्रिय हैं.
Read More

ट्रेंडिंग

  • न्यूज़
  • फोटो
  • वीडियो
हरियाणा में धान के गेट पास नहीं कटे तो भड़के किसान, करनाल-कैथल रोड किया जाम

हरियाणा में धान के गेट पास नहीं कटे तो भड़के किसान, करनाल-कैथल रोड किया जाम

2

अतीक अहमद के अवैध साम्राज्य पर फिर चला पुलिस का डंडा; मदनलाल के नाम दर्ज 30 करोड़ की 14 बेनामी संपत्तियां कुर्क

3

जान से खिलवाड़? घंटों इंतजार के बाद भी नहीं मिली 108 एंबुलेंस, मालवाहक में ऑक्सीजन सिलेंडर बांधकर मरीज पहुंचे अस्पताल

4

'गुस्सा और बेबसी महसूस हुई', शिल्पा राव का शो बीच में रोके जाने पर भड़के पति; बोले-हम नहीं भूलेंगे

5

'मौत को छूकर टक से वापस आ गया': UK में तूफान बोएलो का खौफनाक मंजर; प्लेन की ऐसी लैंडिंग देख कांप उठी रूह

logo
  • contact us
  • privacy policy
  • legal
  • investor info
  • advertise with us
© 1998-2026 Indiadotcom Digital Private Limited, All Rights Reserved.

दलीप ट्रॉफी के दौरान ईस्ट जोन के उपकप्तान वैभव सूर्यवंशी की खूब चर्चा हो रही है. चाहे क्वार्टर-फाइनल हो, सेमीफाइनल हो या फिर फाइनल हो... उपकप्तान वैभव सूर्यवंशी को जब भी मैदान पर कप्तानी का रोल मिला है, उन्होंने अपना कमाल दिखाया है. ईशान किशन ईस्ट जोन के नियमित कप्तान हैं, जब भी वह मैदान से बाहर जाते हैं, तो उपकप्तान वैभव सूर्यवंशी कप्तानी के रोल में आ जाते हैं. वैभव सूर्यवंशी बतौर कप्तान मैदान पर अपनी सक्रियता से माहौल बना रहे हैं. महज 15 साल की उम्र में एक सीनियर फर्स्ट-क्लास टीम की कप्तानी संभालकर वैभव सूर्यवंशी ने दिखा दिया कि वह भारत के फ्यूचर कप्तान बनने का दम रखते हैं.

15 साल के वैभव सूर्यवंशी को जब ईस्ट जोन का उपकप्तान बनाया गया तो उनको लेकर सवाल भी उठे, लेकिन ईस्ट जोन के सेलेक्टर्स अपने फैसले से पीछे नहीं हटे. उनका मानना था कि वैभव सूर्यवंशी को सिर्फ तत्काल कप्तानी की जरूरतों के लिए नहीं, बल्कि लंबे समय में एक बेहतर लीडर के तौर पर तैयार करने के लिए यह जिम्मेदारी दी गई है. खास बात यह है कि साल 2024 की शुरुआत में फर्स्ट-क्लास क्रिकेट में कदम रखने वाले वैभव सूर्यवंशी अभी अपने करियर का केवल तीसरा दलीप ट्रॉफी मुकाबला और 11वां फर्स्ट-क्लास मैच खेल रहे हैं. इसके बावजूद उन्हें ऐसी ईस्ट जोन टीम की कप्तानी संभालने का मौका मिला, जिसमें मोहम्मद शमी, मुकेश कुमार और अभिमन्यु ईश्वरन जैसे अनुभवी इंटरनेशनल और घरेलू क्रिकेटर मौजूद हैं.

1. वैभव सूर्यवंशी की सचिन तेंदुलकर से तुलना

मैदान पर सबसे कम उम्र के खिलाड़ी होने के बावजूद वैभव सूर्यवंशी ने जिस तरह सीनियर खिलाड़ियों से सजी ईस्ट जोन टीम की कमान संभाली है, उसने उनके लीडरशिप टैलेंट की ओर सबका ध्यान खींचा है. वैभव सूर्यवंशी में सचिन तेंदुलकर की झलक देखने को मिल रही है. 15 साल की उम्र में किसी सीनियर फर्स्ट-क्लास टीम की कप्तानी करना बेहद दुर्लभ है और वैभव सूर्यवंशी के लिए यह मौका उनके क्रिकेट करियर में एक अहम पड़ाव माना जा रहा है. वैभव सूर्यवंशी ने अब क्रिकेट के जानकारों को यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि वह भविष्य में टीम इंडिया की कप्तानी करने के दावेदार हैं. दलीप ट्रॉफी के सेमीफाइनल और फाइनल में वैभव सूर्यवंशी ने ईशान किशन की मैदान पर गैरमौजूदगी में मैच के कुछ मौकों पर ईस्ट जोन की कप्तानी संभाली है. वैभव सूर्यवंशी ने इस दौरान DRS के कुछ बेहतरीन व सफल फैसले लिए, मैदान पर हर स्लेजिंग का मुंहतोड़ जवाब दिया और अपने गेंदबाजों का बेहतर इस्तेमाल भी किया है.

2. सचिन तेंदुलकर कब बने थे भारत के कप्तान?

सचिन तेंदुलकर ने मार्च 1995 में डोमेस्टिक क्रिकेट में पहली बार कप्तानी की थी, तब उनकी उम्र लगभग 22 साल थी. साल 1995 में 27 मार्च से 31 मार्च तक मुंबई और पंजाब के बीच मुंबई के वानखेड़े स्टेडियम में रणजी ट्रॉफी का फाइनल मुकाबला खेला गया था. सचिन तेंदुलकर ने इस मैच के जरिए डोमेस्टिक क्रिकेट में अपनी कप्तानी का डेब्यू किया. सचिन तेंदुलकर के लिए यह मैच बेहद यादगार रहा. पंजाब के खिलाफ रणजी ट्रॉफी (1994-1995 सीजन) के फाइनल मैच में सचिन तेंदुलकर ने दोनों पारियों में शतक जड़ दिया. मास्टर ब्लास्टर ने पहली पारी में 140 रन और दूसरी पारी में 139 रन बनाए. सचिन तेंदुलकर के शानदार प्रदर्शन की बदौलत मुंबई को पहली पारी के स्कोर (690 रन) के आधार पर इस फाइनल मैच का विजेता घोषित किया गया. सचिन तेंदुलकर ने अपनी शानदार कप्तानी की बदौलत मुंबई को उसका 32वां रणजी खिताब जिताने में बड़ा रोल निभाया था.

सचिन तेंदुलकर ने 28 अगस्त 1996 को पहली बार इंटरनेशनल क्रिकेट में भारत की कप्तानी की थी. इस दौरान मास्टर ब्लास्टर की उम्र लगभग 23 साल थी. यह चार देशों का वनडे टूर्नामेंट था, जिसका नाम सिंगर वर्ल्ड सीरीज था. इस टूर्नामेंट में भारत, श्रीलंका, ऑस्ट्रेलिया और जिम्बाब्वे की टीमें शामिल थीं. सचिन तेंदुलकर ने मेजबान श्रीलंका के खिलाफ मैच से 28 अगस्त 1996 को इंटरनेशनल क्रिकेट में अपनी कप्तानी के सफर की शुरुआत की. सचिन तेंदुलकर ने इस मैच में भारत के लिए ओपनिंग करते हुए 138 गेंद पर 110 रन ठोक दिए, जिसमें 5 चौके और एक छक्का शामिल रहा.

सचिन तेंदुलकर के शतक की बदौलत भारत ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 50 ओवर में 5 विकेट गंवाकर 226 रन बनाए थे और श्रीलंका को जीत के लिए 227 रन का टारगेट दिया था. जवाब में श्रीलंका की टीम ने 44.2 ओवर में 230/1 का स्कोर बनाते हुए 34 गेंद बाकी रहते यह मैच 9 विकेट से जीत लिया. सचिन तेंदुलकर की कप्तानी में भारत को 98 इंटरनेशनल मैचों में केवल 27 मुकाबलों में जीत मिली, जबकि 52 मैचों में उसे हार का सामना करना पड़ा. ODI में सचिन की कप्तानी में भारत को 73 मुकाबलों में सिर्फ 23 मैचों में जीत नसीब हुई. टेस्ट क्रिकेट में तो आंकड़े और भी निराशाजनक रहे. सचिन की कप्तानी में भारत ने 25 टेस्ट खेले और इनमें वह महज 4 मैच ही जीत सका. साल 2000 में सचिन ने भारतीय टीम की कप्तानी छोड़ने का फैसला किया.

3. क्या मंसूर अली खान का रिकॉर्ड तोड़ेंगे वैभव सूर्यवंशी?

वैभव सूर्यवंशी को अगर अगले 5 साल में भारत का कप्तान बनाया जाता है, तो वह इंटरनेशनल क्रिकेट में टीम इंडिया की कप्तानी करने वाले सबसे युवा भारतीय कप्तान बन जाएंगे. भारतीय क्रिकेट के इतिहास में सबसे कम उम्र में इंटरनेशनल लेवल पर टीम इंडिया की कप्तानी करने का रिकॉर्ड दिग्गज कप्तान मंसूर अली खान पटौदी के नाम पर दर्ज है. मंसूर अली खान पटौदी ने 21 साल और 77 दिन की उम्र में इंटरनेशनल लेवल पर टीम इंडिया की कप्तानी करने का रिकॉर्ड बनाया था. मंसूर अली खान पटौदी ने 23 मार्च 1962 को वेस्टइंडीज के खिलाफ केंसिंग्टन ओवल ब्रिजटाउन (बारबाडोस) में टीम इंडिया की कप्तानी संभाली थी. भारत को वेस्टइंडीज के खिलाफ इस मैच में पारी और 30 रन से हार का सामना करना पड़ा था.

भारतीय टीम इस मैच में टॉस हारकर पहले बल्लेबाजी करने उतरी और अपनी पहली पारी में 258 रन पर ऑलआउट हो गई. जवाब में वेस्टइंडीज ने अपनी पहली पारी में 475 रन का स्कोर खड़ा कर दिया. इसके बाद टीम इंडिया की दूसरी पारी भी 187 रन पर सिमट गई. मंसूर अली खान पटौदी अपनी कप्तानी के पहले ही इंटरनेशनल मैच में कुछ खास कमाल नहीं कर पाए. मंसूर अली खान पटौदी वेस्टइंडीज के खिलाफ इस टेस्ट मैच की पहली पारी में 48 और दूसरी पारी में शून्य के स्कोर पर आउट हो गए. मंसूर अली खान पटौदी ने 40 टेस्ट मैचों में भारत की है. इस दौरान भारतीय टीम को 9 मुकाबलों में जीत और 19 मैचों में हार का सामना करना पड़ा है. इसके अलावा 19 टेस्ट मैच ड्रॉ पर खत्म हुए हैं.

4. क्या कोहली से मिल रहा वैभव का आक्रामक अंदाज

वैभव सूर्यवंशी का आक्रामक अंदाज काफी हद तक विराट कोहली से मेल खाता है. वैभव सूर्यवंशी ने ईस्ट जोन के खिलाफ दलीप ट्रॉफी के फाइनल मैच में अपनी बल्लेबाजी और कप्तानी में गजब के तेवर दिखाए. पहली पारी में वैभव सूर्यवंशी ने 37 गेंद पर 44 रन ठोक दिए. वैभव सूर्यवंशी ने अपने अनुभवी ओपनिंग पार्टनर अभिमन्यू ईश्वरन के साथ मिलकर 100 रन की ओपनिंग पार्टनरशिप की. ईस्ट जोन ने इस पार्टनरशिप की बदौलत एक बड़े स्कोर की नींव रखी. इसके बाद कप्तान ईशान किशन (270 रन) और कुमार कुशाग्र (101 रन) ने मिलकर ईस्ट जोन को 708 रन के विशाल स्कोर तक पहुंचाने में बड़ा रोल निभाया.

वैभव सूर्यवंशी ने कप्तानी के अलावा स्लेजिंग के मोर्चे पर भी मुंहतोड़ जवाब दिया है. दरअसल, दलीप ट्रॉफी फाइनल के पहले दिन वैभव सूर्यवंशी और अभिमन्यू ईश्वरन ने शुरुआती 10 ओवर में तेजी से रन बनाए. साउथ जोन के कप्तान तिलक वर्मा इस दौरान युवा वैभव सूर्यवंशी के पास गए और उनके साथ कुछ बातचीत की. तिलक वर्मा 15 साल के वैभव सूर्यवंशी को स्लेज करने गए थे. वैभव सूर्यवंशी ने इसका बदला भी ले लिया. जब साउथ जोन की टीम अपनी पहली पारी में बल्लेबाजी कर रही थी, तो वैभव सूर्यवंशी ने तिलक वर्मा के पास जाकर उन पर अपने शब्दों के बाण से दबाव बनाया था. साउथ जोन की पहली पारी 336 रन पर सिमट गई. तिलक वर्मा ने इस दौरान 99 रन बनाए.

5. वैभव सूर्यवंशी को किस सुधार की जरूरत?

वैभव सूर्यवंशी को अपने खेल में और भी ज्यादा सुधार करने की जरूरत है. 15 साल के इस किशोर बल्लेबाज को अपनी बैटिंग में और भी ज्यादा निखार लाने की जरूरत है. छक्का बटोरने के लिए हर गेंद पर प्रहार करने की बजाय वैभव सूर्यवंशी को संयम और धैर्य के साथ बल्लेबाजी करनी चाहिए. वैभव सूर्यवंशी के इंटरनेशनल क्रिकेट करियर की अभी-अभी शुरुआत हुई है. ऐसे में 15 साल के इस किशोर बल्लेबाज के पास सुधार करने के लिए काफी वक्त है. भविष्य में वह भारत के महान कप्तान और बल्लेबाज बनने का माद्दा रखते हैं. वैभव सूर्यवंशी में सीखने की काफी ललक है और वह जल्द ही मैच के हालात के हिसाब से बल्लेबाजी करने लगेंगे.

Add Zee News as a Preferred Source
TAGS:
Vaibhav Sooryavanshi