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भारतीय रोवर्स सतनाम सिंह और सलमान खान ने मेंस डबल स्कल्स के फाइनल में ब्रॉन्ज मेडल जीतकर इस इवेंट में भारत को पहली बार एशियन गेम्स मेडल दिलाया. सतनाम सिंह और सलमान खान की भारतीय जोड़ी फाइनल में 6:13.25 का समय लेकर तीसरे स्थान पर रही. चीन की जोड़ी यी शुडी और यीदे नी ने गोल्ड मेडल जीता, जबकि उज्बेकिस्तान की जोड़ी पावेल सोरिन और मेख्रोजबेक ममातकुलोव ने सिल्वर अपने नाम किया. सतनाम सिंह और सलमान खान शुरुआत से ही मेडल की रेस में बने हुए थे. भारतीय जोड़ी 500 मीटर, 1000 मीटर और 1500 मीटर के पड़ाव पर दूसरे स्थान पर थी.
हालांकि आखिरी चरण में उन्हें पीछे छोड़ दिया गया और अंतिम 500 मीटर में भारत तीसरे स्थान पर खिसक गया. इसके बावजूद दोनों ने दबाव में शानदार प्रदर्शन किया और अपनी बढ़त बनाए रखते हुए ब्रॉन्ज मेडल पर कब्जा कर लिया. सलमान खान के लिए यह एशियन गेम्स में पहला पोडियम फिनिश है. खास बात यह है कि उनका रोइंग करियर किसी तय योजना का हिस्सा नहीं था. उन्होंने इस खेल में कदम भारतीय सेना में शामिल होने के बाद रखा. रोइंग में आने से पहले सलमान दिल्ली में 'उबर' कैब चलाकर अपने परिवार का खर्च उठाते थे.
सलमान खान का जन्म उत्तर प्रदेश के अमेठी जिले में स्थित एक गांव 'पूरे ढिंगई' में हुआ था. वह चार भाइयों और दो बहनों में सबसे बड़े हैं. उनके पिता मोहम्मद कासिम खान हरियाणा के तावड़ू में ट्रक-बॉडी बनाने का काम करते थे और सलमान ने वहीं अपनी पढ़ाई पूरी की. जब सलमान सिर्फ 18 साल के थे, तब डेंगू की वजह से उनके पिता का निधन हो गया. इसके बाद परिवार की जिम्मेदारी काफी हद तक उनके कंधों पर आ गई.
पिता के निधन के बाद छोटे भाई-बहनों की जिम्मेदारी सलमान पर आ गई. इसी वजह से भारतीय सेना में शामिल होने का उनका सपना कुछ समय के लिए रुक गया. परिवार को आर्थिक रूप से संभालने के लिए उन्होंने दिल्ली का रुख किया और 'उबर कैब' चलाने लगे. दिन-रात मेहनत करके वह परिवार की जरूरतें पूरी करने में जुटे रहे. हालांकि सेना में जाने का सपना उनके मन से कभी खत्म नहीं हुआ. एक दोस्त ने सलमान से कहा कि उनकी लंबाई और शारीरिक बनावट सेना के लिए उपयुक्त हो सकती है. इसके बाद उन्होंने कैब किसी दूसरे ड्राइवर को सौंप दी और भर्ती की तैयारी में जुट गए. करीब चार महीने की तैयारी के बाद उन्होंने भर्ती रैली, मेडिकल और लिखित परीक्षा पास कर ली.
सलमान खान ने 25 सितंबर 2018 को पुणे स्थित बॉम्बे इंजीनियर ग्रुप जॉइन किया. सेना में आने के बाद कोच सत्यमान, सतीश सिराट और प्रभात मिश्रा ने उनकी शारीरिक क्षमता को पहचाना और उन्हें रोइंग के लिए प्रेरित किया. शुरुआत में सलमान इस खेल को लेकर बहुत उत्साहित नहीं थे, क्योंकि रोइंग उनके करियर प्लान का हिस्सा नहीं थी. लेकिन कोच लगातार उन्हें मौका देते रहे और आखिरकार सलमान ने रोइंग में करियर शुरू कर दिया. सलमान की पहली इंटर-सेंटर रेगाटा में ही उन्हें सिल्वर मेडल मिला. इस सफलता ने उनका आत्मविश्वास बढ़ाया और उन्होंने रोइंग को गंभीरता से लेना शुरू कर दिया.
इसके बाद उन्होंने बटालियन और इंटर-सेंटर प्रतियोगिताओं में भी मेडल जीते. साल 2021 में उन्होंने एर्गोमीटर के जरूरी स्टैंडर्ड्स पूरे किए और पुणे के CME में आर्मी रोइंग नोड के लिए सेलेक्ट हुए. साल 2022 सलमान के करियर के लिए महत्वपूर्ण रहा. उन्होंने गुजरात में आयोजित 36वें नेशनल गेम्स में गोल्ड मेडल जीता. इसी साल उन्होंने 5वीं इंडोर नेशनल चैंपियनशिप में भी गोल्ड मेडल हासिल किया. साल 2023 में उन्होंने सीनियर नेशनल चैंपियनशिप में सिल्वर और ओपन स्प्रिंट नेशनल चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल जीता. इसी साल उन्होंने स्विट्जरलैंड के ल्यूसर्न में आयोजित वर्ल्ड रोइंग कप III में भी भारत का प्रतिनिधित्व किया.
साल 2023 में सलमान को टारगेट ओलंपिक पोडियम स्कीम (TOPS) में शामिल किया गया. उन्हें TOPS के तहत ₹4,09,100 की सहायता मिली. इसके अलावा एनुअल कैलेंडर फॉर ट्रेनिंग एंड कॉम्पिटीशन (ACTC) के तहत उन्हें ₹12,16,589 की सहायता प्राप्त हुई. इसी साल उन्होंने गोवा में आयोजित 37वें नेशनल गेम्स में गोल्ड जीता. इसके बाद 2024 में उन्होंने एशियन रोइंग कप में भी गोल्ड मेडल हासिल किया. इस प्रदर्शन के बाद उन्हें भारतीय सेना में नायब सूबेदार के पद पर प्रमोशन मिला.