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कुदरत ने दो नायाब हीरे फुटबॉल को दिए: लियोनल मेसी और क्रिस्टियानो रोनाल्डो. खेलों में एक जमाना होता है और फिर एक युग होता है. दो दशकों से ज्यादा समय तक वर्ल्ड फुटबॉल एक ट्विन-इंजन पावर ग्रिड पर चल रहा था. करीब 20 साल तक फैंस ने फुटबॉल को ट्रॉफियों या 90 मिनट के अंतर से नहीं, बल्कि नए तय किए गए मानकों, ग्रेविटी को चुनौती देने वाले हेडर और डरे हुए डिफेंडरों को देखा है. मेसी और रोनाल्डो ने फुटबॉल को एक नए तौर पर पेश किया और फैंस के लिए इस खेल को एक तरह से धर्म बना दिया.
अब एक महीने के भीतर दो महान खिलाड़ियों ने इंटरनेशनल फुटबॉल को अलविदा कहके सबको रुला दिया. अगस्त में मेसी ने संन्यास का एलान किया और 6 अक्तूबर को आखिरी इंटरनेशनल मैच अर्जेंटीना के लिए खेला. उस मुकाबले के लिए सभी तैयार थे, लेकिन रोनाल्डो ने ठीक एक महीने बाद 5 नवंबर को जो झटका दिया है, उसने फैंस के दिलों को ही तोड़ दिया. अब वर्ल्ड फुटबॉल पहले जैसा नहीं रहेगा. इंटरनेशनल मुकाबलों में वह रोचकता और फैंस का पागलपन देखने को नहीं मिलेगा. अब सोशल मीडिया पर दोनों दिग्गजों के फैंस के बीच लड़ाई भी देखने को नहीं मिलने वाली है. यह सब अब सपने जैसा लगने लगा है.
यूरो कप फाइनल का वो जुनून
पुर्तगाल ने रोनाल्डो के डेब्यू से पहले एक भी इंटरनेशनल ट्रॉफी नहीं जीती थी. अपने 23 साल के करियर में उन्होंने तीन खिताब दिला दिए. 2016 में यूरो कप की जीत को कौन भूल सकता है. पुर्तगाल के सामने मजबूत फ्रांस की टीम थी. मुकाबला शुरू होते ही पुर्तगाली फैंस को सदमा लगा. आठवें मिनट में फ्रांस के डिफेंडर दमित्री पायेट ने रोनाल्डो को गिरा दिया. इस महान फुटबॉलर को मैदान छोड़कर जाना पड़ा और पुर्तगाल अपने कप्तान के बिना भारी दबाव में आ गया.
जब कोच की भूमिका में आ गए रोनाल्डो
रोनाल्डो रोए और फिर खड़े हुए. वह मैदान में आए और दर्द में खेलते रहे, लेकिन सबकुछ की एक सीमा होती है. वह आखिरकार मुकाबले से बाहर हो गए. इसके बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और कोच के बगल में खड़े होकर टचलाइन से टीम को गाइड करते रहे. सब्सीट्यूट एडर ने 110वें मिनट में गोल कर टीम को 1-0 से आगे कर दिया. रोनाल्डो ने इसके बाद लगातार टीम को मोटिवेट किया और जीत मिलने तक टचलाइन पर एक कोच की तरह टीम का हौसला बढ़ाया. यह रोनाल्डो के करियर का पहला इंटरनेशनल खिताब था. उनकी जीवटता ने पुर्तगाल को पहली बार कोई ट्रॉफी दिला दी.

ट्रॉफियों की लड़ाई
रोनाल्डो ने इसके बाद 2019 और 2025 में यूनियन ऑफ यूरोपियन फुटबॉल एसोसिएशन (यूईएफए) द्वारा लांच किए गए नए टूर्नामेंट नेशंस लीग को भी जीता. इस तरह उन्होंने इंटरनेशल करियर में तीन खिताब जीते. उनकी प्रतिद्वंद्वी मेसी ने एक ट्रॉफी ज्यादा जीती और वह सबसे बड़ी थी. मेसी ने 2021 और 2024 में कोपा अमेरिका, 2022 में फिनालिसिमा और उसी साल वर्ल्ड कप का खिताब जीता. इस वर्ल्ड कप ने भले ही फुटबॉल पंडितों के मन में रोनाल्डो से मेसी को काफी बेहतर और आगे कर दिया, लेकिन पुर्तगाली कप्तान के करियर ने उन्हें महानतम खिलाड़ियों की लिस्ट में बनाए रखा.
इच्छाशक्ति और जादू का असर
इन दो दिग्गजों के इंटरनेशनल फुटबॉल की कहानी लंबे समय तक सुनाई जाएगी. फुटबॉल की एक पूरी पीढ़ी ने वीकेंड पर जागकर यह देखा कि क्या मेसी ने जादुई गोल किया या रोनाल्डो ने फिजिक्स को चुनौती देकर कुछ अनोखा कारनामा कर दिखाया. यह रोनाल्डो की इच्छाशक्ति ही थी, जिसने पुर्तगाल को तीन इंटरनेशनल खिताब दिला दिए. यह मेसी का जादू ही था जिसने फुटबॉल इतिहास में उन्हें सबसे जादुई प्लेयर बना दिया.

खेल पहले जैसा नहीं रहेगा
ईमानदारी से कहें तो खेल चलता रहेगा. नॉर्वे के एर्लिंग हालैंड अपनी कलाबाजियां दिखाते हुए वॉली मारेंगे. फ्रांस के किलियन एम्बाप्पे सुपरसोनिक पेस से डिफेंस को डराते रहेंगे. टैक्टिकल सिस्टम बदलेंगे, एनालिटिक्स बदलते रहेंगे और स्टेडियम में भीड़ भी आएगी, लेकिन मेसी और रोनाल्डो का वह जादू देखने को इंटरनेशनल फुटबॉल में नहीं मिलने वाला है. फुटबॉल खत्म नहीं हुआ, लेकिन फिर भी यह इंटरनेशनल स्तर पर पहले जैसा नहीं लगेगा.