महामुकाबले से पहले जुबानी जंग: ब्राजील के कोच ने भारत के फुटबॉल कल्चर पर कसा तंज, खालिद जमील की दो टूक- मुझे कोई परवाह नहीं
कार्लो एंसेलोटी के 'फुटबॉल कल्चर' वाले बयान पर भारतीय फुटबॉल टीम के मुख्य कोच खालिद जमील ने अपनी प्रतिक्रिया दी है. जमील ने स्पष्ट किया कि उन्हें किसी की टिप्पणियों से फर्क नहीं पड़ता और उनका पूरा ध्यान पनामा के खिलाफ होने वाले अंतरराष्ट्रीय फ्रेंडली मैच पर केंद्रित है.
भारतीय फुटबॉल टीम अगले 12 दिनों के अंदर तीन बड़े मुकाबले खेलने वाली है. पनामा, ब्राजील और उरुग्वे से कठिन मैच होने वाले हैं. तीनों टीमों ने इस साल फीफा वर्ल्ड कप में हिस्सा लिया था. वहीं, ब्राजील ने सबसे ज्यादा 5 बार वर्ल्ड कप जीते हैं. उरुग्वे की टीम 2 बार चैंपियन बनी है. इन तीन मैचों में सबसे ज्यादा नजर भारत-ब्राजील के बीच 3 अक्टूबर को होने वाले मुकाबले पर है. इस भिडंत से पहले जुबानी जंग शुरू हो गई है. ब्राजील के दिग्गज कोच कार्लो एंसेलोटी ने भारत के फुटबॉल कल्चर पर तंज कसा है. उनका कहना है कि यहां इस खेल को लेकर कल्चर काफी कमजोर है.
भारतीय फुटबॉल टीम के मुख्य कोच खालिद जमील ने ब्राजील के कोच कार्लो एंसेलोटी की भारत के फुटबॉल कल्चर पर दी गई टिप्पणी पर किसी विवाद में पड़ने से इनकार कर दिया है. उन्होंने कहा कि हर किसी को अपनी राय रखने का हक है, लेकिन उनकी प्राथमिकता सिर्फ मैदान पर टीम का प्रदर्शन और रणनीति बनाना है.
पनामा के खिलाफ भारत की क्या तैयारी है?
भारतीय टीम गुरुवार को बेंगलुरु में पनामा का सामना करने के लिए तैयार है. कोच खालिद जमील इस फीफा विंडो का इस्तेमाल युवा और अनुभवी खिलाड़ियों के संयोजन को परखने के लिए कर रहे हैं. मैच पूर्व प्रेस कॉन्फ्रेंस में जब उनसे एंसेलोटी के आकलन के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने कहा, ''मुझे फर्क नहीं पड़ता. हर किसी को अपनी राय रखने का हक है.''
एंसेलोटी ने भारतीय फुटबॉल पर क्या कहा था?
ब्राजील के कोच एंसेलोटी ने कोलकाता में भारत के खिलाफ होने वाले मैच से पहले टिप्पणी करते हुए कहा था कि भारत में मजबूत फुटबॉल कल्चर की कमी है और जमीनी स्तर (ग्रासरूट) पर युवाओं के लिए बेहतर माहौल बनाने की जरूरत है. इस पर व्यापक बहस में उलझने के बजाय जमील ने तुरंत ध्यान पनामा के खिलाफ आने वाले मैच पर लाते हुए कहा, ''मैं केवल पनामा के खिलाफ कल होने वाले मैच पर ध्यान केंद्रित करना चाहता हूं.''
पनामा मैच भारतीय टीम के लिए क्यों अहम है?
पनामा के खिलाफ यह मुकाबला भारत के लिए एक कठिन परीक्षा साबित होगा, जिसके बाद टीम अक्टूबर में ब्राजील और उरुग्वे जैसी विश्व स्तरीय टीमों से भिड़ेगी. इस कैंप में गुरप्रीत सिंह संधू, मनवीर सिंह और अनिरुद्ध थापा जैसे अनुभवी सदस्यों के साथ-साथ कई युवा चेहरों को भी परखने का मौका दिया गया है.
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मजबूत टीमों के सामने भारत की रणनीति क्या होगी?
कोच जमील ने संकेत दिए हैं कि भारतीय टीम मजबूत विरोधियों के खिलाफ केवल डिफेंसिव होकर पीछे नहीं बैठेगी. उन्होंने स्पष्ट किया कि टीम परिस्थिति के अनुसार खुद को ढालेगी. जमील के शब्दों में, ''हम एक मजबूत टीम के खिलाफ खेल रहे हैं, लेकिन आप हर समय केवल बचाव नहीं कर सकते. इसलिए अटैक और डिफेंस का संतुलन रहेगा और मैच के हालात के हिसाब से हम रिएक्ट करेंगे.''
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टीम संतुलन पर क्या है योजना?
पनामा के बाद भारत को कोलकाता में ब्राजील और उरुग्वे के खिलाफ हाई-प्रोफाइल मैच खेलने हैं. जमील ने यह भी साफ किया कि कुछ सीनियर खिलाड़ियों को टीम से बाहर रखने का मतलब यह नहीं है कि उनके लिए दरवाजे बंद हो गए हैं. उनकी योजना युवाओं को एक्स्पोज़र देने के साथ-साथ अनुभवी खिलाड़ियों को मिलाकर एक मजबूत टीम तैयार करने की है. वहीं, टीम के सीनियर सदस्य गुरप्रीत सिंह संधू ने जोर देकर कहा कि इन बड़े मुकाबलों को केवल एक अवसर के रूप में देखने के बजाय प्रतिस्पर्धी मैचों की तरह खेला जाना चाहिए.