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एशियन गेम्स 2026 में भारत के लिए खेलने का सपना देख रहीं 18 साल की वुशु खिलाड़ी दिव्यांशी चौधरी उस वक्त टूट गईं, जब उन्हें 19 सितंबर से शुरू होने वाले इस मेगा स्पोर्ट्स इवेंट से कुछ दिन पहले ही भारतीय टीम से अचानक बाहर कर दिया गया. हैरानी की बात ये रही कि दिव्यांशी चौधरी की जगह नाओरेम रोशिबिना देवी को भारतीय टीम में शामिल किया गया, जिन्हें खुद दिव्यांशी चौधरी ने एशियन गेम्स 2026 के ट्रायल में हराया था. यह मामला अचानक विवादों में आ गया है. भारतीय टीम से अचानक ऐन मौके पर बाहर किए जाने के बाद दिव्यांशी चौधरी का एक वीडियो सामने आया है. वीडियो में दिव्यांशी चौधरी भावुक नजर आई और उन्होंने अपनी जान देने को लेकर भी बेहद गंभीर और चिंताजनक बातें कही.
दिव्यांशी चौधरी को एशियन गेम्स टीम से बाहर किए जाने पर उनके पिता सुनील कुमार सूंडा ने ZEE NEWS के साथ Exclusive बातचीत में बड़ा खुलासा किया है. सुनील कुमार सूंडा ने कहा कि शुक्रवार को सुबह के समय दिव्यांशी को टीम से हटाए जाने की जानकारी दी गई और कोई वजह नहीं बताई गई. सुनील कुमार सूंडा ने रोशिबिना देवी के सेलेक्शन पर भी सवाल उठाए. दिव्यांशी चौधरी के पिता सुनील कुमार सूंडा का दावा है कि वुशु एसोसिएशन ऑफ इंडिया ने उनकी बेटी दिव्यांशी चौधरी के साथ पक्षपातपूर्ण रवैया अपनाया है और भारतीय टीम से अचानक बाहर करके अन्याय किया है. एशियन गेम्स की टीम से दिव्यांशी चौधरी को बाहर किए जाने का मामला अब तूल पकड़ता नजर आ रहा है.

दिव्यांशी चौधरी के पिता सुनील कुमार सूंडा ने सेलेक्शन प्रोसेस को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं. दिव्यांशी चौधरी के पिता सुनील कुमार सूंडा ने कहा, 'वुशु एसोसिएशन ऑफ इंडिया ने दिव्यांशी को टीम से हटाए जाने की कोई वजह नहीं बताई. हमें इस फैसले के बारे में पहले से स्पष्ट जानकारी भी नहीं दी गई थी. दिव्यांशी को शुक्रवार सुबह ही बताया गया कि वह टीम के साथ ट्रैवल नहीं करेंगी.' दिव्यांशी चौधरी की जगह रोशिबिना देवी के सेलेक्शन पर भी उनके पिता सुनील कुमार सूंडा ने सवाल खड़े किए हैं. सुनील कुमार सूंडा का कहना है कि सेलेक्शन प्रोसेस में ट्रायल के प्रदर्शन को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए था.

सुनील कुमार सूंडा ने कहा, 'इस साल जून 2026 में श्रीनगर में एशियन गेम्स 2026 के लिए ट्रायल हुए थे. दिव्यांशी ने 60 किग्रा कैटेगरी में वुशु सेलेक्शन ट्रायल के फाइनल में चंडीगढ़ की खिलाड़ी हिमांशी मलिक को हराया था. इससे पहले दिव्यांशी ने एशियन गेम्स 2026 ट्रायल के सेमीफाइनल में रोशिबिना देवी को भी हराया था. अगर एसोसिएशन को किसी एक खिलाड़ी को भेजना ही था, तो ट्रायल में दिव्यांशी से फाइनल में हारकर दूसरे नंबर पर रहने वाली खिलाड़ी हिमांशी मलिक को ही भेज देते, लेकिन वुशु एसोसिएशन ऑफ इंडिया ने ऐसा नहीं किया. एसोसिएशन ने इसके उलट ट्रायल में चौथे नंबर पर रहने वाली रोशिबिना देवी को ही दिव्यांशी की जगह भेजने का फैसला कर लिया, जो उनकी सोची-समझी साजिश को दिखाता है. यह एक मेहनती खिलाड़ी के साथ एसोसिएशन का पक्षपातपूर्ण बर्ताव है.'

सुनील कुमार सूंडा ने कहा, 'एशियन गेम्स 2022 के दौरान रोशिबिना देवी को चोट के साथ खेलने का मौका दिया गया था, लेकिन दिव्यांशी के केस में ऐसा नहीं किया गया और उन्हें एशियन गेम्स 2026 की टीम से बाहर कर दिया गया. अगर रोशिबिना देवी एशियन गेम्स 2022 में चोट के साथ खेल सकती थीं, तो उनकी बेटी को भी एशियन गेम्स 2026 में चोट के साथ खेलने का मौका क्यों नहीं दिया गया. एसोसिएशन ने इस मामले में दिव्यांशी के साथ नाइंसाफी और अन्याय किया है.' दिव्यांशी चौधरी के पिता सुनील कुमार सूंडा ने इसके बाद अपनी बेटी की चोट को लेकर भी खुलासा किया है.

दिव्यांशी के पिता सुनील कुमार सूंडा ने आगे कहा, 'करीब 20 दिन पहले दिव्यांशी को घुटने में चोट लगी थी. चोट लगने के बाद दिव्यांशी को डॉक्टर के पास ले जाया गया था. डॉक्टर ने जांच में एंटीरियर क्रूसिएट लिगामेंट (ACL) की चोट बताई थी और कहा कि चोट ऐसी नहीं है जिसके कारण दिव्यांशी का खेलना पूरी तरह असंभव हो. वह रिहैब और टेंपिग करके अपने गेम को खेल सकती है. पिछले 20 दिन से दिव्यांशी अपने गेम में अपनी ट्रेनिंग भी कर रही हैं. वुशु एसोसिएशन ऑफ इंडिया ने हमें कोई लेटर या जानकारी नहीं दी. एशियन गेम्स 2026 के लिए वुशु टीम के रवाना होने से ठीक 2 दिन पहले ही वुशु एसोसिएशन ऑफ इंडिया ने चुपके से दिव्यांशी का नाम काट दिया.
वुशु एसोसिएशन ऑफ इंडिया ने भी दिव्यांशी चौधरी के पूरे मामले पर अपनी सफाई दी है. एसोसिएशन के अध्यक्ष जितेंद्र बाजवा ने कहा कि दिव्यांशी का नाम एसोसिएशन ने नहीं हटाया, बल्कि स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (SAI) ने घुटने की चोट सामने आने के बाद उन्हें टीम से बाहर किया. जितेंद्र बाजवा के मुताबिक, दिव्यांशी करीब एक महीने पहले SAI की ओर से आयोजित नेशनल कैंप में शामिल हुई थीं. उनका कहना है कि दिव्यांशी के घुटने में चोट थी और वह ट्रेनिंग से बचकर इसे छिपाने की कोशिश कर रही थीं. बाजवा ने बताया कि जब SAI को चोट के बारे में जानकारी मिली, तो उनका नाम टीम से हटा दिया गया.
जितेंद्र बाजवा ने कहा, 'दिव्यांशी नेशनल कैंप में शामिल हुई थीं. उनके घुटने में चोट थी और वह ट्रेनिंग से बचकर इसे छिपाने की कोशिश कर रही थीं. जब SAI को इस बारे में पता चला, तो उनका नाम बदल दिया गया.' जितेंद्र बाजवा ने कहा कि कैंप में मौजूद कोचों ने दिव्यांशी की चोट की जांच कराने की सलाह दी थी, क्योंकि वह ट्रेनिंग नहीं कर रही थीं. बाजवा के मुताबिक, कोचों ने SAI को इसकी जानकारी दी. इसके बाद SAI ने मेडिकल टेस्ट कराया, जिसमें दिव्यांशी के घुटने में चोट होने की पुष्टि हुई. उन्होंने कहा कि इस चोटिल खिलाड़ी को एशियन गेम्स में नहीं भेजा जा सकता था, इसलिए टीम से उनका नाम हटाना पड़ा.
दिव्यांशी की जगह रोशिबिना देवी को टीम में शामिल किए जाने पर भी सवाल उठे. रोशिबिना देवी ट्रायल के सेमीफाइनल में हार गई थीं और फाइनल में पहुंचने में सफल नहीं हुई थीं. जितेंद्र बाजवा ने साफ किया कि रोशिबिना को किसी पक्षपात के कारण नहीं चुना गया. उनके अनुसार, ट्रायल के फाइनल में हारने वाली खिलाड़ी हिमांशी भी चोटिल हो गई थीं. बाजवा ने बताया कि चंडीगढ़ की हिमांशी के जबड़े में फ्रैक्चर हो गया था. इसी वजह से उनका नाम टीम में शामिल नहीं किया जा सका. इसके बाद कोचों ने दिव्यांशी के स्थान पर रोशिबिना देवी के नाम की सिफारिश की.वुशु एसोसिएशन ऑफ इंडिया के अध्यक्ष ने यह भी कहा कि दिव्यांशी के एशियन गेम्स से बाहर होने से फेडरेशन निराश है. उन्होंने दिव्यांशी को बेहद प्रतिभाशाली खिलाड़ी बताया और कहा कि उन्होंने ट्रायल में शानदार प्रदर्शन किया था. बाजवा के मुताबिक, यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि इतनी टैलेंटेड खिलाड़ी एशियन गेम्स में हिस्सा नहीं ले पाएंगी.