)
एशियन गेम्स 2026 में भारतीय शूटिंग का सम्मान बचाने वाली नीरू ढांडा को देश ने बड़ा सम्मान दिया है. उन्हें जापान के आइची-नागोया में चल रहे एशियाई खेलों के समापन समारोह (क्लोजिंग सेरेमनी) में ध्वजवाहक बनाया गया है. नीरू को राष्ट्रीय ध्वज ले जाने का ऐतिहासिक सम्मान मिला है. इससे उनके इस शानदार अभियान का एक बेहतरीन समापन होगा. वह जापान में देश की सबसे सफल एथलीटों में से एक बनकर उभरीं. 27 वर्षीय ट्रैप शूटर नीरू ढांडा ने इस प्रतियोगिता में दो गोल्ड और एक सिल्वर मेडल जीतकर जबरदस्त प्रदर्शन किया.
नीरू ने अपने अभियान की शुरुआत महिलाओं की इंडिविजुअल ट्रैप शूटिंग में गोल्ड मेडल जीतकर की थी. इसके बाद उन्होंने मनीषा कीर और आशिमा अहलावत के साथ जोड़ी बनाकर महिला टीम स्पर्धा में भारत के लिए सिल्वर मेडल हासिल किया. उनका सबसे बड़ा मेडल कलेक्शन ट्रैप मिक्स्ड टीम इवेंट में पूरा हुआ, जहां उन्होंने कायनन चेनाई के साथ मिलकर एक और गोल्ड मेडल अपने नाम किया. इसके साथ ही इस प्रतियोगिता में उनके कुल मेडलों की संख्या तीन हो गई.
ध्वजवाहक बनाने का फैसला किसने किया?
नीरू ढांडा को भारत की महिला ध्वजवाहक चुने जाने के फैसले की पुष्टि शुक्रवार को डिप्टी शेफ डी मिशन अंजलि भागवत ने की. भागवत ने बताया कि नीरू महिला ध्वजवाहक बनने के लिए शनिवार सुबह नागोया लौट रही हैं, जबकि पुरुष ध्वजवाहक का फैसला अगले दिन लिया जाएगा.
तीसरा मेडल जीतने के बाद क्या हुआ?
नीरू ढांडा अपना तीसरा मेडल जीतने के बाद भारत वापस आ गई थीं. हालांकि, समापन समारोह में भारतीय दल की अगुवाई करने और तिरंगा थामने के लिए वह शनिवार सुबह फिर से नागोया रवाना होंगी. नागोया एशियन गेम्स की यह सफलता उनके इस बेहद शानदार साल में एक और बड़ी उपलब्धि जोड़ती है. इससे पहले इसी वर्ष उन्होंने लोनाटो में आयोजित ISSF वर्ल्ड कप में महिलाओं की ट्रैप शूटिंग में गोल्ड मेडल जीता था, जिसने उन्हें भारत की अग्रणी निशानेबाजों में स्थापित किया.
भारतीय शूटिंग के लिए यह सफलता क्यों खास?
जापान में एशियन गेम्स के दौरान भारत के अधिकांश शूटर संघर्ष करते नजर आए. यहां तक कि मनु भाकर जैसी ओलंपिक मेडलिस्ट भी कोई पदक नहीं जीत पाई. इससे देश काफी निराश हुआ. ऐसे में नीरू के तीन मेडलों ने खुशी लौटाई. उन्होंने इंडिविजुअल, टीम और मिक्स्ड-टीम स्पर्धाओं में उनकी निरंतरता की बदौलत उन्होंने दो अलग-अलग फॉर्मेट में गोल्ड मेडल जीते. खेलों के दौरान तीन बार पोडियम पर खड़े होकर मेडल पहनने के बाद, अब नीरू अंतिम समारोह में भारतीय दल का नेतृत्व करेंगी. वह भारत के पुरुष ध्वजवाहक के साथ मिलकर राष्ट्रीय ध्वज थामेंगी और परेड में भारतीय खिलाड़ियों की अगुवाई करेंगी.