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सनातन धर्म में गंगा नदी को केवल एक नदी नहीं, बल्कि मां का दर्जा दिया गया है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार गंगाजल को अमृत के समान पवित्र माना गया है. मान्यता है कि गंगा मां के जल में स्नान करने मात्र से व्यक्ति के जन्मों-जन्मों के पाप धुल जाते हैं और मोक्ष की प्राप्ति होती है.
यही वजह है कि अंतिम समय में भी व्यक्ति के मुंह में गंगाजल डालने की परंपरा सदियों से चली आ रही है. गंगाजल की वैज्ञानिक और आध्यात्मिक खूबी ये है कि ये वर्षों तक रखे रहने के बाद भी कभी खराब नहीं होता है.
लगभग हर हिंदू परिवार अपने घर के पूजा स्थान पर गंगाजल जरूर रखता है, लेकिन इसे रखने के कुछ खास नियम होते हैं, जिनका पालन करना बेहद जरूरी माना जाता है.
अक्सर लोग तीर्थ यात्रा से लौटते समय प्लास्टिक की बोतलों में गंगाजल भरकर घर ले आते हैं और उसी में रख देते हैं. वास्तु शास्त्र और धर्मशास्त्रों के अनुसार प्लास्टिक के बर्तन में गंगाजल रखना बहुत ही अशुद्ध माना जाता है.
गंगाजल को हमेशा पवित्र धातुओं जैसे तांबा, पीतल, चांदी या फिर मिट्टी के कलश में ही रखना चाहिए. तांबे और पीतल के बर्तन में जल रखने से उसकी पवित्रता बनी रहती है और घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है.
इसलिए प्लास्टिक की बोतल से निकालकर इसे तुरंत किसी शुद्ध धातु के पात्र में रख देना चाहिए.
घर में गंगाजल को स्थापित करने के लिए स्थान का चुनाव करते समय खास सावधानी बरतनी चाहिए. इसे हमेशा घर के मंदिर में या पूजा स्थल के पास ही रखना सबसे शुभ फलदाई माना जाता है.
वास्तु के अनुसार उत्तर-पूर्व दिशा गंगाजल रखने के लिए सबसे उत्तम मानी गई है. ध्यान रहे कि गंगाजल को कभी भी रसोईघर या बाथरूम के आसपास या उससे सटी दीवार पर न रखें. ऐसा करने से वास्तु दोष लगता है और घर की सुख-शांति में बाधा आ सकती है.
गंगाजल को कभी भी सीधे कड़क धूप में या खुले आसमान के नीचे नहीं रखना चाहिए. इसके लिए किसी साफ-सुथरी और छायादार जगह का चुनाव करना चाहिए.
जिस अलमारी या आले में गंगाजल रखा हो, वहां रोजाना साफ-सफाई होनी चाहिए. गंदे हाथों से या बिना स्नान किए कभी भी गंगाजल के पात्र को स्पर्श नहीं करना चाहिए.
जब भी पूजा-पाठ या घर में छिड़काव के लिए जल की आवश्यकता हो, तो हमेशा आचमनी या साफ चम्मच से ही जल निकालें.
जिस कमरे या स्थान पर पवित्र गंगाजल रखा हो, वहां की मर्यादा का पूरा ध्यान रखना चाहिए. उस कमरे में भूलकर भी मांस, मदिरा या तामसिक भोजन का सेवन नहीं करना चाहिए.
इसके साथ ही गंगाजल वाले कमरे में जूठे बर्तन या गंदे कपड़े बिखेरकर नहीं रखने चाहिए. माना जाता है कि जहां अशुद्धता होती है, वहां से लक्ष्मी जी रूठ जाती हैं और घर में दरिद्रता का वास होने लगता है. इसलिए उस स्थान को हमेशा स्वच्छ और पवित्र बनाए रखें.
गंगाजल का प्रयोग केवल घर में रखने तक सीमित नहीं है, बल्कि हर छोटे-बड़े शुभ कार्यों और पूजा-अनुष्ठानों में इसका उपयोग अनिवार्य माना जाता है.
गंगा दशहरा, मकर संक्रांति या ग्रहण के बाद साधारण पानी में थोड़ा सा गंगाजल मिलाकर स्नान करने से तीर्थ स्नान के समान ही पुण्य प्राप्त होता है.
यदि घर में लगातार क्लेश या नकारात्मकता का माहौल रहता है, तो रोज सुबह पूजा के बाद पूरे घर में गंगाजल का छिड़काव करना चाहिए. इससे घर का वातावरण शुद्ध होता है और मानसिक शांति मिलती है.
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(Disclaimer): यह खबर धार्मिक मान्यताओं, वास्तु शास्त्र के सिद्धांतों और लोक परंपराओं पर आधारित है. इसका उद्देश्य पाठकों को सामान्य सांस्कृतिक एवं धार्मिक जानकारियां प्रदान करना है.