शरद पूर्णिमा का सनातन धर्म में विशेष महत्व है. जिसे कोजागरी पूर्णिमा, कौमुदी पूर्णिमा व रास पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है. इस पर्व को आश्विन मास की पूर्णिमा तिथि पर मनाने का विधान है. इस साल शरद पूर्णिमा 25 अक्टूबर 2026, रविवार को मनाया जाएगा. इसी दिन चंद्रमा अपनी राशि और नक्षत्र दोनों बदलने वाला है. इस तरह से शरद पूर्णिमा पर चंद्रमा के राशि और नक्षत्र परिवर्तन का शुभ संयोग होने से कुछ राशि के जातकों को विशेष लाभ होने वाला है. आइए जानें इसका सकारात्मक प्रभाव किन राशियों पर पड़ेगा और शरद पूर्णिमा पर कौन से शुभ मुहूर्त बन रहे हैं.
अश्विनी नक्षत्र में शाम 07:21 बजे चंद्रमा का प्रवेश होगा. 26 अक्टूबर शाम 05:40 बजे तक इस नक्षत्र में चंद्रमा संचरण करेंगे. वहीं, 25 अक्टूबर को ही शाम के 07:21 बजे मीन राशि से निकलकर चंद्रमा का गोचर मेष राशि में होगा. इस राशि में 27 अक्टूबर की रात 09:06 बजे तक चंद्रमा का संचरण होगा.
ज्योतिषाचार्य अनामिका सिंह बताती हैं कि शरद पूर्णिमा पर चंद्रमा का मेष राशि और अश्विनी नक्षत्र में प्रवेश करना एक अति शुभ संयोग है. ध्यान दें अश्विनी नक्षत्र के देवता अश्विनीकुमार हैं और नक्षत्र के स्वामी केतु हैं. दूसरी ओर मेष राशि का स्वामी मंगल ग्रह है. धार्मिक परंपरा में तो शरद पूर्णिमा की रात चंद्रमा अपनी सोलह कलाओं से परिपूर्ण होकर चमकता है. वहीं जब बात वैदिक ज्योतिष की आती है तो चंद्रमा को मन, भावनाओं, माता और संवेदनशीलता का कारक माना जाता है. पारंपरिक ज्योतिष के अनुसार पूर्ण चंद्रमा यानी पूर्णिमा का चंद्रमा अपनी सबसे मजबूत स्थिति में होता है. ऐसे में शरद पूर्णिमा के चंद्रमा और उसके गोचर का प्रभाव भी कुछ राशि वालों के जीवन पर अति सकारात्मक हो सकता है.
ज्योतिषाचार्य अनामिका सिंह के अनुसार आइए जानें किन 4 राशियों के जातकों के लिए चंद्रमा का यह राशि और नक्षत्र परिवर्तन शुभ रहने वाला है.
मेष राशि के जातकों के लिए शरद पूर्णिमा पर चंद्रमा का नक्षत्र और राशि परिवर्तन अति शुभ फलदायी सिद्ध होने वाला है. घर-परिवार से संबंधित महत्वपूर्ण फैसले लेने की क्षमता बढ़ेगी. संपत्ति में वृद्धि होगी और गाड़ी खरीदने का भी संयोग बनेगा. घरेलू सुख-सुविधाएं बढ़ेंगी और करियर में तरक्की के रास्ते खुलेंगे. रुके हुए कार्यों को आगे बढ़ाने का मौका मिलेगा.
मिथुन राशि के लोगों का रुका हुआ धन मिल सकेगा और बिजनेस में नए लोगों से जातक संपर्क बना पाएंगे. आय के कई रास्ते खुल सकते हैं. मित्रों और प्रभावशाली लोगों की मदद से पड़ी परेशानी का हल पा सकेंगे. लंबे समय से रुकी हुई सफलता को पाने का समय है. इस अवधि में जातकों को मन में संतोष का भाव रखना होगा.
तुला राशि वालों के लिए यह समयावधि शुभ सिद्ध होगी. जीवनसाथी के साथ समझ बढ़ेगी. पार्टनरशिप में बिजनेस करने वालों को बड़ा आर्थिक लाभ हो सकता है. कोई बड़ी डील हासिल हो सकती है. जातक सही रास्ते पर आगे बढ़ पाएंगे. व्यक्तिगत संबंध पहले से बेहतर होंगे. पुरानी गलतफहमियां और टकराव खत्म होंगे. मन शांत रहेगा.
चंद्रमा के डबल गोचर से मकर राशि वालों का अच्छा समय शुरू हो सकता है. घर, भूमि, गाड़ी जैसी सुविधाओं से लेकर पारिवारिक सुख की प्राप्ति होगी. जीवनसाथी का सहयोग मिलेगा. बिजनेस में पार्टनरशिप के कारण बड़ी योजना पर काम शुरू किया जा सकेगा. संपत्ति संबंधी कार्यों में मौके हासिल होंगे.
शरद पूर्णिमा पर्व जीवन में समृद्धि, प्रेम, भक्ति के साथ ही पूर्णता को दर्शाता है. इस दिन चंद्र देव की पूजा करने से जीवन की परेशानियां दूर होती हैं, मन शांत रहता है और धन हानि रुकती है. आइए जानें शरद पूर्णिमा के शुभ मुहूर्त क्या हैं.
अभिजीत मुहूर्त - सुबह के 11:48 बजे से दोपहर के 12:33 बजे तक.
अमृत काल - शाम के 05:03 बजे से शाम के 06:34 बजे तक
ब्रह्म मुहूर्त - सुबह के 04:56 बजे से सुबह के 05:44 बजे तक.
सर्वार्थसिद्धि योग - 25 अक्टूबर 2026 को शाम के 07:22 बजे से लेकर अगल दिन 26 अक्टूबर को सुबह के 06:32 बजे तक.
निशिता मुहूर्त रात 11:40 बजे से लेकर देर रात 12:31 बजे तक होगा.
ज्योतिषविद के अनुसार, 26 अक्टूबर को शरद पूर्णिमा का स्नान-दान किया जाएगा. इस दिन ब्रह्म मुहूर्त में स्नान करें और फिर पूजा आदि कर जरूरतमंदों में दान करें. इस दिन ब्रह्म मुहूर्त सुबह 04:57 बजे से लेकर सुबह 05:45 बजे तक होगा. वहीं, अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:48 बजे से लेकर दोपहर 12:33 बजे तक होगा.
(डिस्क्लेमर- यह सामग्री पारंपरिक ज्योतिषीय मान्यताओं एवं ग्रह गोचर की व्याख्याओं पर आधारित है. इसे सामान्य सूचना के रूप में देखें, न कि किसी निश्चित परिणाम या भविष्यवाणी के दावे के रूप में. किसी भी व्यक्ति पर ग्रह गोचर का प्रभाव उसकी जन्म कुंडली में ग्रहों की स्थिति, दशा, अंतर्दशा तथा अन्य ज्योतिषीय कारकों के आधार पर अलग-अलग हो सकता है.)