शरद पूर्णिमा पर्व वृंदावन की गलियों में गजब का उत्साह लेकर आता है. इस दिन बांके बिहारी अपने भक्तों को अपने अद्भुत रूप में दर्शन देते हैं जिसका इंतजार लोगों को सालभर होता है. बिहारी जी बंसी धारण करते हैं और महारास मुद्रा में विशेष शृंगार करते हैं. इस दिन मंदिर में एक सुंदर नजार देखने को मिलता है. सफेद पोशाक, मोर मुकुट और सोलह श्रृंगार में बिहारी जी की छवि अति मनमोहक जान पड़ती है. आइए इस लेख में विस्तार से जानें कि भक्त क्यों इस दिन का सालभर इंतजार करते हैं, बांके बिहारी के रास मुद्रा के दर्शन का क्या महत्व है, सोलह कलाओं वाले चंद्रमा का इस रूप से क्या संबंध है और शरद पूर्णिमा का महारास से क्या संबंध है? साथ ही ये भी जानेंगे कि शरद पूर्णिमा पर बिहारी जी के दर्शन का समय क्या है?
इस साल 25 अक्टूबर 2026, रविवार शरद पूर्णिमा पर्व मानाया जाएगा. ध्यान दें भगवान के इस रास मुद्रा स्वरूप के दर्शन साल में केवल एक बार ही हो पाते हैं. इस दिन बांके बिहारी के दर्शन के लिए लोग देशभर से आते हैं. इस दिन भगवान श्री कृष्ण गर्भ गृह से निकलते हैं और जगमोहन में चांदी के सिंहासन पर विराजमान होते हैं और भक्तों को दर्शन देते हैं.
ऐसी धार्मिक मान्यता है कि शरद पूर्णिमा की रात को श्रीकृष्ण ने यमुना जी के पास स्थित वंशीवट में गोपियों संग महारास किया था. धार्मिक मान्यता है कि शरद पूर्णिमा पर सोलह कलाओं से परिपूर्ण चंद्रमा होता है और उसकी किरणों से अमृत की वर्षा होती है. जिसके कारण ही श्रीकृष्ण ने इस रात महारास किया था. यही कारण है कि चंद्रमा की रोशनी में बिहारी जी को विराजमान किया जाता है. इस दिन बिहारी जी को खीर, मक्खन और मिश्री आदि का भोग चढ़ाया जाता है. इस दिव्य लीला की स्मृति में ही आज भी वृंदावन के बांके बिहारी मंदिर में बिहारी जी का विशेष शृंगार कर शरद पूर्णिमा पर दर्शन देते हैं. पूरे साल में ठाकुर जी केवल शरद पूर्णिमा पर ही बंसी धारण करते हैं. बिहारी जी को इस दिन महारास की मुद्रा में सजाया जाता है.
शरद पूर्णिमा के दिन बांके बिहारी मंदिर सुबह 07:30 बजे खुलेगा
शरद पूर्णिमा के दिन दोपहर में मंदिर 01:00 बजे बांके बिहारी मंदिर बंद होगा.
शाम को 05:30 बजे से लेकर 10:30 बजे तक बांके बिहारी के दर्शन पा सकेंगे.
बांके बिहारी मंदिर के पास ही निधिवन स्थित है जहां पर बांके बिहारी प्रकट हुए. ऐसी मान्यता है कि स्वामी हरिदास जी की साधना और संगीत से बिहारी जी प्रसन्न हुए और निधिवन में प्रकट हुए. मान्यता ये भी है कि राधा रानी और गोपियों के साथ निधिवन में ही भगवान श्रीकृष्ण ने दिव्य रासलीला की और आज भी यह रासलीला हर रात निधिवन में होती है. जिसके कारण शाम के बाद परिसर में कोई नहीं रुकता है. बांके बिहारी मंदिर के अलावा और भी कई मंदिरों में ठाकुर जी सुंदर रूप में दर्शन देता है. वृंदावन के सप्त निधि में भी शरद पूर्णिमा पर ठाकुर जी सफेद पोशाक में शृंगार कर दर्शन देते हैं. इसके साथ ही कई और कार्यक्रम भी आयोजित किए जाते हैं.
वृंदावन के सप्त निधि--
श्री राधा मदन मोहनजी मंदिर
श्री गोविंद देवजी मंदिर
श्री राधा गोपीनाथजी मंदिर
श्री राधा रमण लालजी मंदिर
श्री राधा वल्लभ लालजी मंदिर
श्री राधा दामोदरजी मंदिर
श्री राधा श्यामसुंदरजी मंदिर
(डिस्क्लेमर: यह जानकारी जन-श्रुति, धार्मिक मान्यताओं और स्थानीय जानकारी पर आधारित है, हम इसकी पूर्ण सटीकता का दावा नहीं करते. मंदिर के समय के लिए आधिकारिक वेबसाइट से पुष्टि करें.)