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घर में हर कोने की अपनी एक जगह होती है, वास्तु शास्त्र में तो यही सिखाया गया है. किचन के लिए सबसे बढ़िया दिशा मानी जाती है दक्षिण-पूर्व, यानी अग्निकोण. लेकिन असल जिंदगी में ऐसा कम ही होता है. घर बनते वक्त जगह की तंगी या नक्शे की मजबूरी की वजह से किचन कहीं और ही बन जाता है.
कहा जाता है कि गलत दिशा वाला किचन घर के लोगों की सेहत और मन की शांति दोनों पर असर डाल सकता है. पर अगर आपका किचन भी सही दिशा में नहीं है, तो टेंशन लेने या दीवार तोड़वाने की जरूरत नहीं. कुछ छोटे उपाय अपनाकर इस दिक्कत को काफी हद तक ठीक किया जा सकता है.
वास्तु के मुताबिक जब किचन सही दिशा में न हो, तो सबसे पहले अग्नि तत्व को संभालना पड़ता है. इसके लिए एक आसान तरकीब है. गैस चूल्हे के ठीक पीछे वाली दीवार पर लाल, नारंगी या मिट्टी जैसे रंग की टाइल्स लगवा दें.
इससे किचन में अग्नि की ऊर्जा अपने आप मजबूत होती है. एक और बात का ध्यान रखें, खाना बनाते वक्त मुंह हमेशा पूर्व की तरफ रखें.
इतना करने से घर की नेगेटिविटी कम होने लगती है, और खाने में भी एक अच्छी सी एनर्जी आती है, कम से कम मान्यता तो यही कहती है.
एक और तरीका है तांबे का इस्तेमाल. किचन की दक्षिण-पूर्व या दक्षिण वाली दीवार पर तांबे के 3 पिरामिड या कॉपर हेलिक्स रख दें.
तांबे को वास्तु में अग्नि और शुभता का प्रतीक माना गया है, इसलिए यह गलत दिशा की नेगेटिव एनर्जी को सोखने में मदद करता है.
घर के लोगों के बीच तालमेल बढ़ता है, और घर में एक तरह की शांति बनी रहती है, ऐसा लोग मानते आए हैं.
किचन जिस भी दिशा में गलत बना हो, उसके हिसाब से चूल्हे के नीचे अलग-अलग रंग का पत्थर रखने की सलाह दी जाती है. मसलन दक्षिण-पश्चिम में किचन है तो चूल्हे के नीचे पीला मार्बल रख दें.
बाकी किसी भी गलत दिशा के लिए हरे रंग का बोर्ड या पत्थर काम आता है. इससे चूल्हे की आग गलत दिशा की नेगेटिविटी से टकराने से बच जाती है, जिससे सेहत पर पड़ने वाला असर भी कम हो जाता है, ऐसा कहा जाता है.
छोटे घरों में अक्सर एक दिक्कत आती है, सिंक और गैस चूल्हा बिल्कुल आमने-सामने लग जाते हैं. आग और पानी का यह मेल वास्तु के हिसाब से ठीक नहीं, इससे घर में बेवजह की तकरार बढ़ सकती है.
सीधा उपाय है, दोनों के बीच कम से कम 3 फीट की दूरी बनाकर रखें. जगह न हो तो लकड़ी या कपड़े का एक छोटा पार्टिशन लगा दें, और उस हिस्से में हरा रंग ज्यादा इस्तेमाल करें ताकि एनर्जी बैलेंस बनी रहे.
बहुत से घरों में रोज की दवाइयां किचन में ही रखी रहती हैं, ये आदत वास्तु के हिसाब से सही नहीं मानी जाती. कहते हैं इससे घर में बीमारी का माहौल बना रहता है और डॉक्टर के चक्कर भी बढ़ जाते हैं.
अगर घर में झगड़े ज्यादा हो रहे हों, तो मंगलवार के दिन हनुमान चालीसा पढ़ें और मेन गेट पर स्वास्तिक बना दें. बस इतनी सी बातों का ध्यान रखकर किचन के वास्तु दोष को दूर रखा जा सकता है.
डिस्क्लेमर (Disclaimer):
यह लेख वास्तु शास्त्र के सिद्धांतों, एक्सपर्ट्स की राय और पारंपरिक मान्यताओं पर आधारित है. यह सामग्री केवल पाठकों की जानकारी और सामान्य ज्ञान के उद्देश्य से तैयार की गई है.