)
पौराणिक कथाओं में भगवान श्री कृष्ण की बाल लीलाओं के कई दिलचस्प कहानियां देखने को मिलती हैं. जब श्री कृष्ण छोटे थे तब वो नंद बाबा की गायों को जंगल घास चराने ले जाया करते थे.
उस समय मथुरा का राजा कंस, रोज-रोज नए राक्षस भेज दिया करता था. एक बार उसने एक अरिष्टासुर नाम के एक खूंखार राक्षस को वृंदावन भेजा था.
अब अपने दोस्तों को बचाने के लिए श्री कृष्ण ने उस राक्षस का अंत कर दिया था. लेकिन इसके बाद कान्हा जी पर गो-हत्या का पाप लग गया था.
आज हम इस खबर में ये जानेंगे कि ये पाप कान्हा को कैसे लगा था और इससे मुक्ति कैसे मिली थी.
राजा कंस ने जिस राक्षस को वृंदावन भेजा था वो भगवान के अपार शक्ति को अच्छे तरीके से जानता था. इसलिए उसने दिमाग लगाया और सामने से हमला करने के बजाय छल का रास्ता चुना.
उसने अपना रूप बदलकर एक सांड का रख लिया था. उसके बाद वो जाकर जंगल में गायों के झुंड में शामिल हो गया. वो छिपकर काफी देर तक कान्हा पर हमला करने का इंतजार करता रहा.
लेकिन जब उसे काफी देर तक इंतजार करने के बाद भी उसे हमला करने का मौका नहीं मिला तो उसने वहां के गाय चराने वाले बच्चों पर हमला करना शुरू कर दिया. वो कृष्ण के दोस्तों को चोट पहुंचाने लगा और उन्हें मारने की कोशिश करने लगा.
जब श्री कृष्ण ने अपने दोस्तों को मुसीबत में देखा, तो वे सब समझ गए. कान्हा को तुरंत समझ में आ गया कि गाय के रूप में छिपा ये कोई साधारण जीव नहीं बल्कि कंस का भेजा राक्षस है.
इसके बाद भगवान कृष्ण ने बिना देर किए अरिष्टासुर की टांग पकड़ी और उसे हवा में घुमाकर जोर से जमीन पर पटक दिया.
कान्हा के इस भीषण प्रहार से उस राक्षस की मौके पर ही मौत हो गई. इस तरह श्री कृष्ण ने अपने सभी दोस्तों को उस भयानक संकट से बचा लिया.
अरिष्टासुर का वध होने के बाद जब ये खबर राधा रानी तक पहुंची, तो वे चिंता में पड़ गईं. राधा जी ने कान्हा से कहा कि भले ही वो राक्षस था, लेकिन तुमने गो-वंश के रूप में मौजूद जीव को मारा है.
इसलिए तुम पर गो-हत्या का घोर पाप लग चुका है. इस महा-पाप से मुक्ति पाने के लिए तुम्हें दुनिया के सभी पवित्र तीर्थों की यात्रा करनी होगी और वहां स्नान करना पड़ेगा.
श्री कृष्ण को राधा रानी की बात सही लगी, लेकिन इतनी जल्दी सारे तीर्थों की यात्रा करना बहुत कठिन था.
अपनी इस बड़ी दुविधा का हल निकालने के लिए श्री कृष्ण देवर्षि नारद मुनि के पास पहुंचे. उन्होंने नारद जी से इस पाप से मुक्ति पाने का सरल उपाय पूछा.
नारद मुनि ने मुस्कुराते हुए कान्हा को सलाह दी कि वे दुनिया भर के सभी तीर्थों को अपने पास बुलाएं. इसके बाद श्री कृष्ण ने अपनी बांसुरी से एक विशाल कुंड खोदा.
कान्हा के आदेश पर ब्रह्मांड के सभी पवित्र तीर्थ जल रूप में उस कुंड में आकर समा गए. इस तरह कान्हा के सामने ही सारे तीर्थ प्रकट हो गए.
कुंड में सभी तीर्थों का जल भर जाने के बाद भगवान श्री कृष्ण ने उसमें भक्ति भाव से स्नान किया. इस पावन स्नान के साथ ही कान्हा के ऊपर से गो-हत्या का पाप हमेशा के लिए मिट गया.
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार मथुरा के पास स्थित अरिता गांव में यह ऐतिहासिक कुंड आज भी मौजूद है.
इस कुंड को श्याम कुंड के नाम से जाना जाता है. हर साल हजारों श्रद्धालु इस कुंड के दर्शन करने और इसमें स्नान करने के लिए दूर-दूर से आते हैं.
(Disclaimer): यह लेख धार्मिक मान्यताओं, पौराणिक कथाओं और लोक-प्रचलित प्रसंगों पर आधारित है.