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धनतेरस का त्यौहार साल 2026 में 6 नवंबर को मनाया जाएगा. इस दिन भगवान धन्वंतरि के साथ माता लक्ष्मी और कुबेर जी की पूजा की जाती है.
आज के दिन लोग अपने घरों की सफाई करते हैं और नई चीजें खरीदते हैं. ऐसी माना जाता है कि धनतेरस पर की गई खरीदारी से घर में खुशहाली आती है.
लेकिन बहुत कम लोगों को ही पता होगा कि कुबेर देवता को ही धन का देवता क्यों माना जाता है. आज हम इस खबर में ये जानकारी पूरे डिटेल से देंगे.
देवताओं के खजाने के मालिक कुबेर जी को माना जाता है. साथ ही वो यक्षों के राजा भी हैं.दुनिया भर के सारे खजानों और धन-दौलत की संभाल करने की जिम्मेदारी उन्हीं की होती है.
इसी वजह से उन्हें धन के देवता के साथ धन का असली रखवाला भी कहा जाता है.
भगवान कुबेर ने धन का देवता बनने के लिए बहुत कड़ी तपस्या की थी. उनकी इस भक्ति से खुश होकर ब्रह्मा जी ने उन्हें स्वर्ग के खजाने की जिम्मेदारी सौंप दी थी.
तभी से उन्हें देवताओं के खजाने की देखभाल करने वाला और धन-दौलत का मालिक माना जाने लगा.
इस पावन दिन पर स्वास्थ्य के देवता धन्वंतरि, सुख-वैभव की देवी लक्ष्मी और खजाने के रक्षक कुबेर की पूजा की जाती है.
कई घरों में मां लक्ष्मी और कुबेर जी की एक साथ आराधना की जाती है. माना जाता है कि इनका पूजा करने से घर में पैसों की कमी नहीं होती है.
बिजनेस करने वालों के लिए तो ये दिन बहुत खास होता है. इस दिन वो अपने दुकानों की साफ-सफाई करते हैं.
इसके बाद धन रखने की जगह पर विधि-विधान से पूजा की जाती है. माना जाता है कि ऐसा करने से बिजनेस में खूब तरक्की होती है और पूरे साल मां लक्ष्मी की कृपा बनी रहती है.
इस दिन आपको अपने घर और पूजा की जगह को अच्छे से साफ कर लेना चाहिए. इसके बाद एक लकड़ी की चौकी पर मां लक्ष्मी और भगवान कुबेर की मूर्ति रख लेना चाहिए.
इसके बाद घी का दीया जलाएं और रोली, चावल, फूल और मिठाई चढ़ाएं. इसके बाद सच्चे मन से पूजा कर लें.
डिस्क्लेमर: इस लेख में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं, पंचांग और लोक परंपराओं पर आधारित है. इसका उद्देश्य केवल पाठकों तक सही जानकारी पहुंचाना है.