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धनतेरस पर क्यों होती है धन के देवता कुबेर की पूजा? जानिए कैसे मिला उन्हें स्वर्ग का खजाना

साल 2026 में 6 नवंबर को धनतेरस का पर्व मनाया जाएगा. इस दिन भगवान धन्वंतरि और माता लक्ष्मी के साथ खजाने के रक्षक कुबेर देव की पूजा की जाती है. इस खबर में हम जानेंगे कि कुबेर जी कैसे धन के देवता थे और पूजा की सही विधि क्या है.

धनतेरस पर क्यों होती है धन के देवता कुबेर की पूजा? जानिए कैसे मिला उन्हें स्वर्ग का खजाना

धनतेरस का त्यौहार साल 2026 में 6 नवंबर को मनाया जाएगा. इस दिन भगवान धन्वंतरि के साथ माता लक्ष्मी और कुबेर जी की पूजा की जाती है.

आज के दिन लोग अपने घरों की सफाई करते हैं और नई चीजें खरीदते हैं. ऐसी माना जाता है कि धनतेरस पर की गई खरीदारी से घर में खुशहाली आती है.

लेकिन बहुत कम लोगों को ही पता होगा कि कुबेर देवता को ही धन का देवता क्यों माना जाता है. आज हम इस खबर में ये जानकारी पूरे डिटेल से देंगे.

कौन हैं धन के देवता कुबेर?

देवताओं के खजाने के मालिक कुबेर जी को माना जाता है. साथ ही वो यक्षों के राजा भी हैं.दुनिया भर के सारे खजानों और धन-दौलत की संभाल करने की जिम्मेदारी उन्हीं की होती है.

इसी वजह से उन्हें धन के देवता के साथ धन का असली रखवाला भी कहा जाता है.

कैसे बने कुबेर धन के देवता?

भगवान कुबेर ने धन का देवता बनने के लिए बहुत कड़ी तपस्या की थी. उनकी इस भक्ति से खुश होकर ब्रह्मा जी ने उन्हें स्वर्ग के खजाने की जिम्मेदारी सौंप दी थी.

तभी से उन्हें देवताओं के खजाने की देखभाल करने वाला और धन-दौलत का मालिक माना जाने लगा.

धनतेरस पर क्यों होती है कुबेर की पूजा?

इस पावन दिन पर स्वास्थ्य के देवता धन्वंतरि, सुख-वैभव की देवी लक्ष्मी और खजाने के रक्षक कुबेर की पूजा की जाती है.

कई घरों में मां लक्ष्मी और कुबेर जी की एक साथ आराधना की जाती है. माना जाता है कि इनका पूजा करने से घर में पैसों की कमी नहीं होती है.

व्यापारी वर्ग के लिए क्यों खास है ये दिन?

बिजनेस करने वालों के लिए तो ये दिन बहुत खास होता है. इस दिन वो अपने दुकानों की साफ-सफाई करते हैं.

इसके बाद धन रखने की जगह पर विधि-विधान से पूजा की जाती है. माना जाता है कि ऐसा करने से बिजनेस में खूब तरक्की होती है और पूरे साल मां लक्ष्मी की कृपा बनी रहती है.

धनतेरस पर कैसे करें कुबेर देव की पूजा?

इस दिन आपको अपने घर और पूजा की जगह को अच्छे से साफ कर लेना चाहिए. इसके बाद एक लकड़ी की चौकी पर मां लक्ष्मी और भगवान कुबेर की मूर्ति रख लेना चाहिए.

इसके बाद घी का दीया जलाएं और रोली, चावल, फूल और मिठाई चढ़ाएं. इसके बाद सच्चे मन से पूजा कर लें.

डिस्क्लेमर: इस लेख में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं, पंचांग और लोक परंपराओं पर आधारित है. इसका उद्देश्य केवल पाठकों तक सही जानकारी पहुंचाना है.

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About the Author

Harsh Singh

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हर्ष सिंह जी न्यूज डिजिटल में एक अनुभवी और धारदार शैली के पत्रकार हैं. उन्होंने मार्च 2024 में जी न्यूज जॉइन किया था. वर्तमान में हर्ष धर्म और ज्योतिष से जुड़ी खबरों की खास कवरेज कर रहे हैं. वे देश-दुनिया के धार्मिक आयोजनों, अध्यात्म और ज्योतिषीय गणनाओं से जुड़े जरूरी अपडेट्स दर्शकों तक पूरी सटीकता के साथ पहुंचाते हैं. हर्ष को उनकी फैक्ट-आधारित और भरोसेमंद लेखन शैली के लिए जाना जाता है.बनारस के महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ से मास कम्युनिकेशन में पोस्ट-ग्रेजुएशन करने वाले हर्ष अपनी पूरी ऊर्जा और समझ के साथ धर्म-कर्म और ऐस्ट्रो की दुनिया के खबरों को सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचा रहे हैं.अगर आप हर्ष सिंह से संपर्क करना चाहते हैं या उनसे जुड़ा कोई सुझाव साझा करना चाहते हैं, तो उन्हें इस ईमेल आईडी पर लिख सकते हैं: Harsh.singh@India.com
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