घट स्थापना में कलश पर मौली बांधना क्यों है जरूरी? जानिए इसका रहस्य
इस खबर में हम नवरात्र में घट स्थापना के दौरान कलश पर कलावा या मौली क्यों बांधी जाती है उसके बारे में जानेंगे. साथ ही इसका धार्मिक महत्व, ग्रहों पर असर और रक्षासूत्र से जुड़ी पौराणिक मान्यताओं के बारे में जानेंगे.
सनातन धर्म में नवरात्र का खास महत्व है. नवरात्र के पहले दिन भक्त अपने घरों और पूजा पंडालों में विधि-विधान से कलश स्थापना यानी घट स्थापना करते हैं.
इस दौरान आपने अक्सर देखा होगा कि तांबे या मिट्टी के कलश के गले में कलावा यानी मौली का पवित्र धागा जरूर बांधा जाता है.
पर क्या आपने कभी सोचा है कि पूजा में कलश के ऊपर कलावा क्यों बांधा जाता है. कहा जाता है कि बिना कलश पर कलावा बांधे पूजा पूरी नहीं होती है. इस खबर में हम जानेंगे आखिर ऐसा क्यों होता है.
देवी-देवताओं को बुलावा देने का प्रतीक माना जाता है कलश
सनातन परंपरा में कलश को सिर्फ एक साधारण बर्तन नहीं माना जाता है. इसे पूरे ब्रह्मांड और सभी देवी-देवताओं के निवास स्थान का प्रतीक माना गया है.
नवरात्र के पहले दिन जब हम घट स्थापना करते हैं, तो वास्तव में हम मां दुर्गा की दैवीय शक्तियों का अपने घर में बुलावा देते हैं.
इस दौरान कलश में नौ दिनों तक मां दुर्गा का वास और दिव्य ऊर्जा बनी रहती है.
कलश के पास अखंड ज्योति जलाकर देवी मां के आगमन की खुशी मनाई जाती है. ऐसे में कलश की पवित्रता बनाए रखना सबसे ज्यादा जरूरी काम होता है.
कलश की पवित्रता और सुरक्षा
ये परंपरा तो सदियों पुरानी चलती आई है. कलावा को बांधने के वजह से कलश की शुद्धता बनी रहती है.
ये कलावा कलश को सभी प्रकार के अशुद्धि को दूर रखता है. जब इस कलावे को कलश पर बांधा जाता है तो इसकी आध्यात्मिक शक्ति और भी ज्यादा बढ़ जाती है.
इसका एक और फायदा होता है कि पुजन स्थल की पवित्रता बनी रहती है और पूजा में कोई समस्या नहीं होती है.
नौ ग्रहों की पॉजटिव एनर्जी फैलाता है ये रक्षासूत्र
ज्योतिष शास्त्र की माने तो कलश में नवों ग्रहों का वास होता है. जब हम कलावा बांधते हैं तो नौ ग्रहों से मिलने वाला आशीर्वाद चारों ओर फैल जाता है.
इससे घर में शांति का माहौल बनता है, और आस-पास की नेगेटिवीटी दूर हो जाती है. चारों तरफ पॉजटिव एनर्जी फैलने लगती है.
परिवार के लोगों को कामयाबी मिलती है और घर की पैसों की दिक्कत भी धीरे-धीरे दूर होने लगते हैं.
भक्त और भगवान के बीच आध्यात्मिक बंधन का प्रतीक
ये कलावा भक्त और ईश्वर के बीच के मजबूत रिश्ते को दिखाने का काम करता है. ये सिर्फ एक धागा नहीं है, इसका मतलब ये होता है कि भक्त ने देवी मां की शरण ले ली है.
जिसके बाद मां का आशीर्वाद उसपर हमेशा रहेगा. ये पवित्र धागा पूजा के सभी तत्वों को एक साथ जोड़े रखने का काम करता है.
इसे बांधने से मां दुर्गा अपने भक्तों को सुरक्षा का कवच प्रदान करती हैं और घर में सुख-समृद्धि के योग बनने लगते हैं.
कलावा बांधे बिना अधूरी मानी जाती है घट स्थापना
जिस तरह किसी इंसान की कलाई पर कलावा बांधने से यह उसकी रक्षा करता है, ठीक उसी तरह कलश पर बंधा कलावा उसकी सुरक्षा सुनिश्चित करता है.
नवरात्र के नौ दिनों में माता रानी की कृपा दृष्टि इसी कलश के आसपास बनी रहती है. इसलिए अगर आप भी अपने घर में नवरात्र के दौरान घट स्थापना करते हैं, तो कलश में कलावा बांधना कभी न भूलें.
(Disclaimer): यह लेख हिंदू धर्म शास्त्रों, पौराणिक मान्यताओं और ज्योतिषीय संदर्भों पर आधारित है. इसका उद्देश्य पाठकों तक धार्मिक परंपराओं की जानकारी पहुंचाना है.
ये भी पढ़ें: उम्मीद की नई किरण: 34 साल बाद खुला ऐतिहासिक शीतलनाथ मंदिर, कश्मीरी पंडितों की घर वापसी की जगी आस
<response-element class="no-md md-has-block-component" ng-version="0.0.0-PLACEHOLDER"><code-block class="ng-tns-c3379029758-156 enable-luminous-code-block ng-star-inserted" style="" _nghost-ng-c3379029758="">