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Maa Matangi Jhootha Bhog Significance: माता शक्ति की 10 महाविद्याओं में से एक मां मातंगी बुद्धि, वचन, तंत्र और कला की देवी हैं. जिनको तांत्रिक सरस्वती का रूप भी माना गया है. माता मातंगी को लेकर धार्मिक मान्यता है कि जो भी मां मातंगी की उपासना करता है यानी मातंगी महाविद्या की सिद्धि प्राप्त कर लेता है उस व्यक्ति की कला या संगीत से पूरी दुनिया आकर्षित होती है, ऐसे लोग अपनी कला के दम पर किसी को भी अपने वश में कर सकते हैं. वशीकरण के लिए भी इस महाविद्या की बड़ी मान्यता बताई गई है. हालांकि, मां मातंगी को लेकर जो सबसे चर्चित धार्मिक मान्यता है वो ये कि माता को भोग में जूठन अर्पित किया जाता है. आइए माता मातंगी के बारे में विस्तार से जानें.
देवी मातंगी का स्वरूप निराला है. माता के चार हाथ और तीन नेत्र हैं. माता गहरे नीले रंग या श्याम वर्ण की हैं जो अर्ध चंद्र धारण करती हैं. रत्नजड़ित सिंहासन पर माता बैठती हैं. इसके अलाव कमल के आसन पर माता विराजती हैं. माता के गले में गुंजा के बीजों की माला है. मां के दायें हाथों में वीणा और मानव खोपड़ी है. बायें हाथ में खड़ग है और एक हाथ अभय मुद्रा में है. तोता हर समय मां के साथ रहता है जो इस बात का प्रतीक हैं कि माता वाणी और वचन की देवी है.
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, देवी मातंगी की उत्पत्ति की कथा इस तरह है कि एक बार भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी कैलाश पर महादेव और मां पार्वती से मिलने गए. भगवान विष्णु अपने साथ खाद्य सामग्री भी ले गए थे. जिसे उन्होंने शिव जी को भेट किया. भगवान शिव और मां पार्वती ने भोजन का सेवन किया लेकिन भोजन का कुछ अंश धरती पर गिर पड़ा. उन गिरे हुए भोजन के भागों से ही एक श्याम वर्ण वाली दासी उत्पन्न हो गई जिनको मातंगी नाम दिया गया. उनकी सबसे पहली उपासना भगवान विष्णु ने ही की. मां मातंगी जूठन से उत्पन्न हुई जिसके कारण मां मातंगी को जूठन का भोग आर्पित किया जाता है. शिव जी का एक नाम मतंग भी है जिनकी शक्ति मातंगी है.
मां मातंगी को लेकर एक मान्यता ये भी है कि देवी मातंगी मतंग ऋषि की पुत्री है. माता दुर्गा की उपासना और आशीर्वाद से ही मतंग ऋषि के यहां एक कन्या का जन्म हुआ जिसका नाम देवी मातंगी रखा गया. मान्यता है कि देवी मातंगी भारत के आदिवासियों की देवी हैं.
मां मातंगी की पूजा करने से भक्त को गृहस्थ सुख की प्राप्ति होती है, शत्रुओं का नाश होता है, भोग-विलास, धन, वाक सिद्धि और बुद्धि का आशीर्वाद प्राप्त होता है. माता मातंगी की उपासना करने से बुद्धि और विद्या का विकास होता है. वाणी शुद्ध और मधुर होती है. माता मातंगी के आशीर्वाद से व्यक्ति के भीतर कला व संगीत का गुण बढ़ता है और व्यक्ति इन क्षेत्रों में उन्नति करता है. ध्यान दें मां की उपासना में व्रत न रखकर अपने वचन को शुद्ध करके भी माता को प्रसन्न किया जा सकता है. किसी को बुरा न कहना, गाली न देना या मन में किसी के लिए बुरे विचार न लाना, इन आदतों से ही माता भक्त से प्रसन्न होकर आशीर्वाद देती हैं. माता की पूजा करने से जादू-टोना, टोटका, इंद्रजाल और माया से भी व्यक्ति को मुक्ति मिल सकती है. तांत्रिक माता मातंगी की पूजा वशीकरण जैसी विद्या की सिद्धि के लिए भी की जाती है. शारीरिक सुंदरता को बढ़ावा देने के लिए भी मातंगी मंत्र के जाप के बारे में बताया गया है. हालांकि, किसी भी मंत्र का जाप जानकार पंडित या ज्योतिषाचार्य की सलाह पर ही करें.
(डिस्क्लेमर- यह लेख धार्मिक मान्यताओं, पौराणिक कथाओं और लोकश्रुतियों पर आधारित है. इसकी प्रमाणिकता की पुष्टि हम नहीं करते. पूजा से पूर्व विद्वान से परामर्श अवश्य लें.)