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शव पर मंडराती हैं शक्तियां, जानिए क्यों मौत के तुरंत बाद नाक-कान में लगाई जाती है रुई?

गरुड़ पुराण के अनुसार मृत्यु के बाद शव के नाक और कान में रुई लगाने से आत्मा का शरीर से मोह खत्म होता है और शरीर बुरी शक्तियों से सुरक्षित रहता है.

शव पर मंडराती हैं शक्तियां, जानिए क्यों मौत के तुरंत बाद नाक-कान में लगाई जाती है रुई?

आपने देखा होगा कि जब किसी की मृत्यु हो जाती है तो लोग उसके कान और नाक में रूई लगा देते हैं. लेकिन सवाल ये उठता कि आखिर ऐसा किया क्यों जाता है.

कुछ लोगों को तो इसका मतलब भी नहीं पता होता है बस इसे एक पुराना रश्म मानकर छोड़ देते हैं. मौत के बाद की सभी जानकारी गरूण पुराण में लिखी हुई है.

आज हम इस खबर में जानेंगे कि मरने के बाद आखिर नाक और कान बंद क्यों किए जाते हैं.

शरीर से आत्मा का लगाव खत्म करने की परंपरा

गरुड़ पुराण की माने तो जब भी किसी की मौत होती है तो उसकी आत्मा उस शरीर के आस पास घूमती रहती है. उसका अपने शरीर से प्यार नहीं खत्म होता है.

वो ऐसा इसलिए करती है क्योंकि उसे उस शरीर में फिर से जाना होता है. नाक और कान शरीर के ऐसे रास्तों में से एक हैं जहां से हवा आसानी से अंदर बाहर हो सकता है.

इसीलिए इन खुले रास्तों को रुई से बंद कर दिया जाता है. जिससे आत्मा को ये अच्छे से समझ आ जाए कि अब उसके रहने के लायक वो शरीर नहीं बचा है. उसके बाद वो आत्मा अपने आगे के रास्ते पर निकल जाती है.

बुरी ताकतों से मरे हुए शरीर को बचाने का तरीका

पुरानी मान्यताओं के अनुसार इंसान के मरते ही शरीर पर बुरी और नकारात्मक शक्तियों का असर बढ़ने लगता है. ऐसा माना जाता है कि हवा में घूम रही बुरी शक्तियां खाली शरीर पर कब्जा करने की कोशिश करती हैं.

नाक और कान के जरिए शरीर के अंदर पहुंचना सबसे आसान होता है. इसी वजह से अंतिम संस्कार से पहले शव के इन हिस्सों में रुई लगा दी जाती है, जिससे मृत शरीर पूरी तरह सुरक्षित रहता है और उस पर किसी बुरी नजर या शक्ति का साया नहीं पड़ता.

मुंह में तुलसी और गंगाजल रखने की वजह

अंतिम संस्कार के समय सिर्फ नाक-कान बंद करना ही काफी नहीं होता, बल्कि मृतक के मुंह में तुलसी का पत्ता और गंगाजल की बूंदें डालना भी बेहद जरूरी माना गया है.

भगवान विष्णु को तुलसी बहुत पसंद है. माना जाता है कि मुंह में तुलसी का पत्ता होने से आत्मा को सीधे भगवान के चरणों में जगह मिलती है.

वहीं गंगाजल की बूंदें शरीर को पवित्र बनाती हैं, जिससे इंसान के जिंदगी भर के पाप मिट जाते हैं और आत्मा को आगे की यात्रा में ज्यादा दुख नहीं सहना पड़ता.

जमीन पर कुशा बिछाकर सही दिशा में लिटाने का नियम

जब घर में किसी की मृत्यु होती है, तो शव को सीधा फर्श पर नहीं लिटाया जाता. पहले जमीन पर कुशा घास बिछाई जाती है और फिर शव को उस पर रखा जाता है.

शव का सिर हमेशा दक्षिण दिशा की तरफ और पैर उत्तर दिशा की तरफ रखे जाते हैं. शास्त्रों में दक्षिण दिशा को यमराज की दिशा कहा गया है.

इसके साथ ही मृतक के दोनों पैरों के अंगूठों को सफेद धागे से बांध दिया जाता है, ताकि शरीर एक जगह स्थिर रहे और उसे ले जाने में आसानी हो.

रात के समय अंतिम संस्कार न करने की सख्त मनाही

अंतिम संस्कार के समय को लेकर भी गरुड़ पुराण कई खास बातें बताई गई हैं. जिसमें शव को नहलाकर और नए कपड़े पहनाकर ही श्मशान घाट ले जाया जाता है.

शास्त्रों में रात के समय यानी सूर्यास्त के बाद दाह संस्कार करने की साफ मनाही है. 

अगर किसी की मृत्यु शाम के समय होती है, तो उसके अंतिम संस्कार के लिए अगले दिन सूरज निकलने का इंतजार किया जाता है.

सही नियम और सही समय पर किया गया अंतिम संस्कार ही मृत व्यक्ति को शांति दिलाता है.

(Disclaimer): यह लेख धार्मिक मान्यताओं, गरुड़ पुराण की कथाओं और लोक परंपराओं पर आधारित है.
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About the Author

Harsh Singh

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हर्ष सिंह जी न्यूज डिजिटल में एक अनुभवी और धारदार शैली के पत्रकार हैं. उन्होंने मार्च 2024 में जी न्यूज जॉइन किया था. वर्तमान में हर्ष धर्म और ज्योतिष से जुड़ी खबरों की खास कवरेज कर रहे हैं. वे देश-दुनिया के धार्मिक आयोजनों, अध्यात्म और ज्योतिषीय गणनाओं से जुड़े जरूरी अपडेट्स दर्शकों तक पूरी सटीकता के साथ पहुंचाते हैं. हर्ष को उनकी फैक्ट-आधारित और भरोसेमंद लेखन शैली के लिए जाना जाता है.बनारस के महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ से मास कम्युनिकेशन में पोस्ट-ग्रेजुएशन करने वाले हर्ष अपनी पूरी ऊर्जा और समझ के साथ धर्म-कर्म और ऐस्ट्रो की दुनिया के खबरों को सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचा रहे हैं.अगर आप हर्ष सिंह से संपर्क करना चाहते हैं या उनसे जुड़ा कोई सुझाव साझा करना चाहते हैं, तो उन्हें इस ईमेल आईडी पर लिख सकते हैं: Harsh.singh@India.com
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