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हिंदू मान्यताओं में मां लक्ष्मी धन की देवी हैं जिनकी उपासना करने से घर-परिवार में धन-समृद्धि बनी रहती है. शुक्रवार का दिन और दिवाली पर्व मां लक्ष्मी के लिए समर्पित हैं. धन की देवी मां लक्ष्मी की पूजा करने से घर में बरकत होती है और कभी भी सुख-सुविधा का अभाव नहीं होता है. आपने अक्सर देखा होगा कि मां लक्ष्मी की कई तस्वीरों या मूर्तियों में उनके साथ दो हाथी भी खड़े होते हैं. जो अपनी सूंड से माता लक्ष्मी का अभिषेक करते हैं. कभी-कभी मां हाथी पर भी सवार होती हैं. अब सवाल यह उठता है कि आखिर हाथी से मां लक्ष्मी का क्या संबंध है और क्यों मां लक्ष्मी की तस्वीर में दो हाथी हमेशा दिखाई देते हैं. आइए जानें इसके पीछे का धार्मिक और आध्यात्मिक रहस्य क्या है?
वैसे तो मां लक्ष्मी उल्लू की सवारी करती हैं पर कई बार उनके पीछे दो हाथी देखे जाते हैं. शास्त्रों के अनुसार मां लक्ष्मी के इस रूप को गजलक्ष्मी स्वरूप माना जाता है. मां के साथ हाथी का होना जल और जीवन दोनों का प्रतीक है. लक्ष्मी जी का संबंध जल से है जो जीवन है और कृषि का आधार है. वहीं, हाथी बारिश का प्रतीक है. ऐसे में मां लक्ष्मी के साथ हमेशा हाथी दिखते हैं. हाथी समृद्धि का भी प्रतीक है. दरअसल, पुराने समय में हाथी धन, शक्ति और राजसी वैभव के रूप में देखा जाता था. जिस व्यक्ति के घर में हाथी होता था उसे महाधनवान माना जाता था.
देवी लक्ष्मी के साथ दिखने वाले दोनों हाथियों को लेकर धार्मिक मान्यता है कि ये दोनों ही हाथी अपनी सूंड से देवी लक्ष्मी पर जल अर्पित करके उनका अभिषेक करते हैं, एक मान्यता यह भी है कि ये हाथी अमृत से मां का अभिषेक करते हैं. मान्यता है कि जब समुद्र मंथन हुआ तो ऐरावत हाथी निकला जिसे इंद्रदेव को सौंप दिया गया. उसके बाद माता लक्ष्मी प्रकट हुईं. इस तरह ऐरावत हाथी ने मां लक्ष्मी के समुद्र से निकलने पर उन पर जल चढ़ाया था. माना जाता है कि मां लक्ष्मी के साथ जो हाथी हैं वे हमेशा मां लक्ष्मी की सेवा के लिए प्रस्तुत रहते हैं. उनका स्वागत, सम्मान और अभिषेक करते हैं.
हाथी और मां लक्ष्मी का बहुत गहरा संबंध है. धार्मिक मान्यता है कि हाथी शक्ति, स्थिरता और सौभाग्य का चिह्न है. वहीं, मां लक्ष्मी तो धन की देवी हैं जिनकी उपासना करने से जीवन में सुख-समृद्धि और विलासिता आती है. ऐसे में जब मां लक्ष्मी के साथ हाथी दिखते हैं तो समृद्धि और वैभव कई गुना बढ़ जाता है.
(यह लेख केवल धार्मिक मान्यताओं, शास्त्रों और लोक-परंपराओं पर आधारित है. इसका उद्देश्य केवल जानकारी देना है. किसी भी उपाय को अपनाने से पहले विद्वानों या विशेषज्ञों से सलाह अवश्य लें. हम किसी चमत्कार या धन लाभ का दावा नहीं करते.)