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नवरात्र में रोज पढ़ते हैं दुर्गा चालीसा, पर कभी गौर किया आखिरी दोहे पर? यहीं दर्ज है रचयिता का नाम!

नवरात्र में मां दुर्गा चालीसा का पाठ कई भक्‍त करते हैं और कई लोगों को यह पाठ मुंहजबानी भी याद होता है. लेकिन कम ही लोग ये जानते हैं कि इस पाठ के लेखक कौन हैं?

Written By Shraddha Jain
Published: Oct 12, 2026, 10:55 AM IST | Updated: Oct 12, 2026, 11:02 AM IST
Image Credit: दुर्गा चालीसा पाठ, हनुमान चालीसा से प्रेरित है और मध्‍यकाल में लिखा गया है. (Photo:AI)
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मां दुर्गा की कृपा पाने के लिए दुर्गा चालीसा का पाठ करना बहुत लाभदायी माना गया है. देवी मां के भक्‍त नवरात्र में या रोजाना दुर्गा चालीसा पढ़ते हैं. जिसमें देवी मां की शक्ति और महिमा का गुणगान किया गया है. क्‍या आप जानते हैं कि जिस दुर्गा चालीसा का पाठ करते हैं, उसे किसने लिखा है, उसके रचियता कौन हैं? जबकि दुर्गा चालीसा के आखिरी दोहे में इसके र‍चयिता का नाम भी आता है, लेकिन कम ही लोग इस पर ध्‍यान देते हैं.

किसने लिखी है दुर्गा चालीसा?

दुर्गा चालीसा के लेखक महाकवि देवीदास हैं, जो कि मां दुर्गा के अनन्‍य उपासक थे. हालांकि उनके बारे में विस्‍तृत जानकारी के लिए कोई दस्‍तावेज या जीवनी उपलब्‍ध नहीं है. लेकिन दुर्गा चालीसा के अंत में उन्‍होंने खुद को मां दुर्गा के चरणों का सेवक बताते हुए अपना नाम मेंशन किया.

कब लिखी गई दुर्गा चालीसा?  

दुर्गा चालीसा कब लिखी गई इसे लेकर सही समय का कहीं उल्‍लेख नहीं मिलता है. लेकिन इतिहासकारों के अनुसार, यह रचना मध्‍यकाल में की गई. यह वो समय था जब संस्‍कृत की बजाय अवधी या ब्रज भाषा में देवी-देवताओं के आरती-चालीसा लिखने की परंपरा चरम पर थी. दुर्गा चालीसा किसी ग्रंथ का हिस्‍सा नहीं है, बल्कि यह पीढ़ी-दर-पीढ़ी मौखिक तौर पर या आरती-चालीसा संग्रह की धार्मिक किताबों के जरिए ही आगे बढ़ी.

हनुमान चालीसा से प्रेरित

माना जाता है कि दुर्गा चालीसा की रचना हनुमान चालीसा से प्रेरित होकर की गई. गोस्‍वामी तुलसीदास द्वारा रचित हनुमान चालीसा में 40 चौपाइयां हैं. इसके बाद दुर्गा चालीसा, शिव चालीसा आदि कई चालीसा उससे ही प्रेरित होकर लिखे गए.

जिस तरह हनुमान चालीसा की शुरुआत 2 दोहों से होती है और समापन में एक दोहा आता है. वैसे ही दुर्गा चालीसा में भी शुरुआत में एक दोहा और अंत में एक दोहा है और बीच में 40 चौपाइयां हैं.

दुर्गा चालीसा पाठ करने का लाभ

दुर्गा चालीसा में मां दुर्गा के सौम्‍य, ममतामयी रूप से लेकर रौद्र रूप तक का वर्णन है. मान्‍यता है कि इसका पाठ करने से शत्रुओं पर विजय प्राप्‍त होती है. भय दूर होता है, साहस बढ़ता है, सुख-शांति मिलती है. विशेष तौर पर सभी नवरात्र, शुक्रवार को दुर्गा चालीसा का पाठ करना चाहिए. वहीं रोजाना पूजा में दुर्गा चालीसा बहुत लाभ देता है.

दुर्गा चालीसा में कवि देवीदास का नाम

दुर्गा चालीसा की 40 चौपाइयों के बाद आखिरी दोहे में इसके रचयिता देवीदास जी का नाम आता है.

दोहा - ''देवीदास शरण निज जानी। 
करहु कृपा जगदम्ब भवानी॥''

इसका अर्थ है - सब जान लेने पर देवीदास ने आपकी शरण में आया है. हे जगदम्बा भवानी कृपा करो.

(Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं और प्रचलित पाठ पर आधारित है. अलग-अलग संस्करणों में पाठ के शब्दों या क्रम में अंतर हो सकता है. पाठक मूल ग्रंथ या प्रमाणित संस्करण से जानकारी का मिलान कर सकते हैं.)

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About the Author

पत्रकारिता में 15 वर्षों का व्यापक अनुभव रखने वाली श्रद्धा जैन वर्तमान में Zee News की नेशनल डिजिटल टीम में बतौर असिस्‍टेंट न्‍यूज एडिटर सक्रिय हैं. जहाँ वे धर्म, ज्योतिष, ग्रह गोचर, अंक शास्‍त्र और वास्तु शास्त्र जैसे विषयों पर अपनी विशेषज्ञता के लिए जानी जाती हैं। उन्होंने मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन और सिम्बॉयसिस इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी से क्रिएटिव राइटिंग की पढ़ाई की है. बतौर फोटो जर्नलिस्ट करियर शुरू करने वाली श्रद्धा ने दूरदर्शन, दैनिक भास्कर और चौथी दुनिया जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दी हैं.12 वर्षों की फील्ड रिपोर्टिंग के दौरान राजनीति और सामाजिक मुद्दों पर गहरी पकड़ बनाने के बाद, उन्होंने डिजिटल मीडिया की ओर रुख किया और देश 24*7 जैसे पोर्टल्स में नेतृत्व की भूमिका निभाई. वर्तमान में धर्म, ज्योतिष, वास्तु और हस्तरेखा जैसे विषयों पर गहन अध्ययन और लेखन करते हुए जटिल विषयों को सरल और रोचक भाषा में पाठकों के सामने पेश कर रही हैं.
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