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Vrischika Sankranti 2026 Date: वृश्चिक संक्रांति का बड़ा धार्मिक महत्व है. जब भी किसी राशि में सूर्य का प्रवेश होता है तो उसे उस राशि की संक्रांति कहते हैं. इसी तरह सूर्य शुक्र के स्वामित्व वाली तुला राशि से निकलकर मंगल के स्वामित्व वाली वृश्चिक राशि में प्रवेश करेंगे. जिसे वृश्चिक संक्रांति कहा जाएगा. वृश्चिक संक्रांति के दिन सूर्य देव की पूजा कर कुछ विशेष चीजों का जरूरतमंदों में दान करें तो जीवन में सुख और सम्मान बढ़ता है और शरीर निरोगी रहता है. आइए जानें इस साल वृश्चिक संक्रांति कब है, इस दिन पुण्य और महापुण्य काल कब से कब तक होगा और किस विधि से सूर्य देव की इस दिन पूजा करें?
वृश्चिक संक्रांति शुभ मुहूर्त और काल
वृश्चिक संक्रांति- सोमवार, 16 नवंबर 2026 को
वृश्चिक संक्रांति पुण्य काल- दोपहर 12:06 बजे से लेकर शाम 05:27 बजे तक.
वृश्चिक संक्रांति महा पुण्य काल- दोपहर 03:40 बजे से लेकर शाम 05:27 बजे तक.
वृश्चिक संक्रांति का क्षण- शाम 07:48 बजे.
नोट- संक्रांति का क्षण सूर्यास्त के बाद यानी शाम में पड़ रहा है ऐसे में इस दिन पुण्य काल और महा पुण्य काल में दान देने व स्नान आदि करना शुभ माना जाता है. हालांकि संक्रांति सूर्योदय के समय अर्घ्य और सूर्य पूजा की विधि पूरी कर सकते हैं.
वृश्चिक संक्रांति के दिन सूर्योदय से पहले जाग जाएं.
पवित्र नदी में या घर में ही नहाने के पानी में गंगाजल मिलाकर शुद्ध स्नान करें.
लाल या केसरिया वस्त्र पहनें.
अब तांबे के लोटे में जल लें और उसमें हल्दी, सिंदूर, लाल चंदन और रोली मिलाएं.
सूर्योदय होते ही सूर्य देव को इसी जल से अर्घ्य दें.
सूर्य देव को अर्घ्य देते समय सूर्य मंत्र- “ॐ सूर्याय नमः” का जाप करें.
सूर्य भगवान को गुड़ या गुड़ से बनी खीर का भोग अर्पित करें.
धूप जलाएं और पूरे घर में घुमाएं.
सूर्य देव की उपासना करने के बाद कुछ चीजों का दान करें. जैसे- अन्न, वस्त्र और जरूरी चीजें.
संक्रांति तिथि पर दान करें लेकिन उससे पहले स्नान आदि कर सूर्य देव को अर्घ्य जरूर दें. वृश्चिक संक्रांति पर जो भी जातक उगते हुए सूर्य देव को प्रणाम करता है उसकी कुंडली से सूर्य दोष दूर होता है और पितृ दोष से भी मुक्ति मिलती है. इस दिन वस्त्र, भोजन और कंबल आदि का दान करना उत्तम माना गया है. वृश्चिक संक्रांति के दौरान धीरे-धीरे ठंड बढ़ने लगती है. ऐसे में सूर्य देव की उपासना करने के बाद गुड़ और तिल का प्रसाद बांटें और ठंड संबंधी चीजों का दान करें, जैसे कंबल या स्वेटर.
(डिस्क्लेमर: इस लेख में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं, ज्योतिष और पंचांग पर आधारित है. इसका उद्देश्य केवल सामान्य जानकारी देना है. किसी भी उपाय, पूजा या दान को अपनाने से पहले अपने विद्वान पंडित या ज्योतिषी से सलाह अवश्य लें.)