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DNA:क्या आपकी मिठाई मांसाहारी है? चांदी के नाम पर आप एल्युमिनियम और जानवरों की चमड़ी खा रहे हैं!

दिवाली पर मिठाइयों की मांग बढ़ने के साथ ही चांदी के वर्क में मिलावट का खेल भी तेज हो जाता है. क्या आप जानते हैं कि चांदी के नाम पर आप एल्युमिनियम और जानवरों के अवशेषों से बना खतरनाक वर्क खा रहे हैं?

DNA:क्या आपकी मिठाई मांसाहारी है? चांदी के नाम पर आप एल्युमिनियम और जानवरों की चमड़ी खा रहे हैं!
Image Credit: DNA:असली चांदी या ज़हर? दिवाली पर मिठाई और चांदी के वर्क का कड़वा सच

DNA मित्रों हमारा आज का विश्लेषण सोना-चांदी और मिठाई के नाम पर हो रहे छल से जुड़ा है. 4 दिन बाद दिवाली है. आप सबने अपनी पसंदीदा मिठाई की लिस्ट तैयार कर ली होगी. क्योंकि इनमें से कुछ मिठाइयों को आप..दिवाली की शाम, लक्ष्मी पूजा के समय प्रसाद के रूप में भी चढ़ाएंगे. आज हम, आपको ज़ी न्यूज़ के कैमरे से दिखाने वाले हैं, चमकती चांदी वाली मिठाई में नॉनवेज है. मिठाई पर चांदी के नाम पर ऐसे धातु हैं जो आपकी सेहत के लिए जहरीले हैं.

मित्रो, जब आप मिठाई की दुकान पर जाते हैं तो आप कई तरह की मिठाइयों पर चांदी का वर्क देखते होंगे.. काजू कतली, बर्फी, सोन पापड़ी और सूखे मेवों से बनी मिठाइयों पर अकसर चांदी का वर्क लगाया जाता है.. मिठाइयों पर वर्क का प्रयोग इसीलिए किया जाता है क्योंकि चांदी में एंटी-बैक्टेरियल गुण होते हैं.. वो मिठाई को खराब होने से बचाता है.. लेकिन DNA इन्वेस्टिगेशन में पता चला है कि यही वर्क मिठाई के साथ साथ आपकी सेहत और आपकी आस्था के साथ खिलवाड़ कर रहा है.. 

आपको आज देखना चाहिए कि चांदी के वर्क को बनाने के लिए कैसे जानवरों की चमड़ी का प्रयोग किया जा रहा है.. हमारी इस इनवेस्टिगेशन में आपको ये पता चलेगा, जिसे आप चांदी का वर्क समझकर खा रहे हैं वो असल में चांदी नहीं बल्कि ऐसे धातु हैं जो आपकी किडनी और लीवर को खराब कर रहे हैं... हमने अपने खुफिया कैमरे में चांदी के वर्क की सच्चाई को कैद किया है.. लेकिन उसे देखने से पहले आपको ये जानना चाहिए कि चांदी के वर्क का इस्तेमाल कितने बड़े पैमाने पर किया जाता है..

भारत में सालाना लगभग 250 टन से ज्यादा चांदी का वर्क इस्तेमाल किया जाता है. और इस खपत का 70 प्रतिशत हिस्सा पारंपरिक मिठाइयों पर कोटिंग के रूप में उपयोग होता है. ऐसा नहीं है कि मिठाइयों पर किसी भी तरह के वर्क का प्रयोग किया जाता है.. इसके लिए खाद्य सुरक्षा विभाग ने बाकायदा नियम बनाए हैं. चांदी के वर्क के लिए मानक कहता है कि वर्क में 99.9 प्रतिशत शुद्धता वाली चांदी का ही प्रयोग किया जा सकता है. इसके अलावा वर्क की शीट का वजन 2.8 ग्राम प्रति वर्ग मीटर होना चाहिए. 

मानक ये भी कहता है कि वर्क में एक समान मोटाई की शीट होनी चाहिए. उसमें सिलवटें और मोड़ नहीं होने चाहिए, लेकिन बाजार में इन नियमों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं.. आम आदमी के लिए इस वर्क की परख करना लगभग नामुमकिन होता है.. मिठाई पर चमकीली सी चीज़ को लोग चांदी का वर्क समझकर निश्चिंत होकर खा लेते हैं.. आज वर्क के इसी फर्क को समझाने के लिए हमने इसका रिएलिटी चेक किया है.. आपको DNA की ये इन्वेस्टिगेशन देखनी चाहिए

नकली वर्क आखिर होता क्या है.. ये जानने के लिए हमारी टीम पहुंची मेरठ... जहां चांदी के वर्क का बड़ा कारोबार है. यहां चांदी वर्क के कई थोक वक्रेता हैं... और इसी बाजार में हमें मिला चांदी के वर्क का एक दूसरा चेहरा.

यहां वर्क की दो किस्में मौजूद हैं... एक असली चांदी का... और दूसरा ऐसा वर्क, जो दिखता तो चांदी जैसा है... लेकिन उसमें चांदी की शुद्धता नहीं है.

  • रिपोर्टर- क्या रेट है?
  • वर्क विक्रेता- 100 रुपये की गड्डी है
  • रिपोर्टर- इसमें पीस कितने हैं?
  • वर्क विक्रेता- 100
  • रिपोर्टर- वहां तो बता रहे थे 2 हजार का 150 पीस
  • वर्क विक्रेता- 2 हजार का ?
  • रिपोर्टर- अंतर है क्या दोनों में?
  • वर्क विक्रेता- एक बात बताएं, अगर वो 2 हजार की 150 पीस बता रहे हैं तो वो चांदी का होगा.
  • रिपोर्टर- ये कौन सा है?
  • वर्क विक्रेता- ये कुछ और है. 

कीमत का अंतर ही असली और नकली वर्क के बीच का पहला सुराग है. लेकिन इस सस्ते वर्क को बेचने वालों का आत्मविश्वास देखिए... इनके मुताबिक, मिठाई पर इसका असर ही नहीं पड़ता. यानी वर्क चांदी का हो या किसी और चीज का... मिठाई की चमक बरकरार रहेगी!

  • रिपोर्टर- चाचा हमें अभी काम है त्योहारों का
  • वर्क विक्रेता- त्योहारों का ना? ये लगा रहे हैं आजकल
  • रिपोर्टर- इसमें अंतर क्या होता है
  • वर्क विक्रेता- अंतर कुछ नहीं होता है. अंतर ये होता है कि वो सिल्वर का होता है
  • रिपोर्टर- इसमें कम क्या क्या हैं
  • वर्क विक्रेता- मिठाई पर फर्क पड़ ही नहीं सकता है चाहे आप दो महीने लगा लो

इस बाजार में बेईमानी का एक दिलचस्प अंदाज भी दिखा. वर्क बेचा जा रहा है... लेकिन उसके असली होने का दावा नहीं. दुकानदार खुद बता रहे हैं कि इसमें पूरी चांदी नहीं है. फर्क सिर्फ इतना है कि ग्राहक को यह बात कितनी समझ आती है... और वह कितनी आसानी से इसे खरीद लेता है.

  • रिपोर्टर- पूरा शुद्ध नहीं है ये?
  • वर्क विक्रेता- पूरा शुद्ध नहीं है
  • रिपोर्टर- क्या मिलावट है इसमें
  • वर्क विक्रेता- इसमें पूरा चांदी नहीं होता है
  • वो 99 प्रतिशत शुद्ध है
  • रिपोर्टर- इसमें कम है
  • वर्क विक्रेता- हां
  • रिपोर्टर- पहचान में नहीं आता
  • वर्क विक्रेता- नहीं

यानी दुकानदार की जुबान पर साफ है कि यह वर्क पूरी तरह शुद्ध चांदी का नहीं है... लेकिन इसकी पहचान करना आम ग्राहक के लिए आसान नहीं.

हम एक और वर्क विक्रेता के पास पहुंचे. यहां सामने वाले काउंटर पर असली चांदी का वर्क तैयार किया जा रहा था... लेकिन जैसे ही हमने सस्ता वर्क मांगा, हमारे सामने एक दूसरा विकल्प रख दिया गया. कीमत कम... चमक ज्यादा... मगर इस चांदी के वर्क से चांदी गुम है

  • वर्क विक्रेता- लोकल है ये
  • रिपोर्टर- इसमें और इसमें अंतर? ये मोटा है या पतला है?
  • वर्क विक्रेता- पतला है
  • रिपोर्टर- क्या रेट पड़ेगा
  • वर्क विक्रेता- 1 हजार रुपये
  • रिपोर्टर- 1 रुपये का एक
  • वर्क विक्रेता- चमक बहुत है इसमें. उससे ज्यादा चमक है इसमें))
  • रिपोर्टर- दोनों में अंतर क्या है?
  • वर्क विक्रेता- ये थोड़ा भारी है
  • वो शुद्ध चांदी का है, ये लोकल वर्क है
  • रिपोर्टर- लोकल मतलब क्या.. इसमें कुछ मिलाया है?
  • वर्क विक्रेता- इसकी चीज ही अलग आती है

मेरठ के बाजार में हमें ऐसा वर्क खुलेआम बिकता मिला, जिसमें चांदी है ही नहीं.. लेकिन मिठाई की दुकानों पर पहुंचते-पहुंचते यही चमक असली चांदी जैसी नजर आने लगती है.

DNA मित्रो, चांदी के वर्क में फर्क वाली ये इनवेस्टिगेशन करते वक्त हमारी टीम को ये भी पता चला कि इस वर्क से हिंदुओं की आस्था को बहुत गहरा चोट पहुंच रहा है.. जिन मिठाइयों का उपयोग पूजा पाठ में किया जाता है. लक्ष्मी-गणेश को भोग लगाने में किया जाता है..उस पर नॉनवेज वर्क लगाया जाता है. इस इनवेस्टिगेशन का हिस्सा हम आपको आगे दिखाने वाले हैं..लेकिन उससे पहले आपको देखना चाहिए कि नकली वर्क का बाजार क्यों फल फूल रहा है.

असली चांदी के वर्क की कीमत लगभग 10 रुपये प्रति शीट होती है..जबकि नकली वर्क बाजार में सिर्फ एक रुपये में मिलता है.मित्रो, पहला पाप तो नकली वर्क बनाने वाले कर रहे हैं.. और दूसरा नौ रुपये के लालच में इस वर्क को खरीदकर आपको खिलाने वाले मिठाई विक्रेता. वर्क के नाम पर बाजार में कितना बड़ा खेल चल रहा है, उसे आपको कुछ आंकड़ों के जरिये समझना चाहिए..

फूड एडिटिव्स एंड कंटेमिनेंट्स जर्नल के एक सर्वे में पाया गया कि बाजार में मिलने वाले वर्क वाली मिठाइयों में सिर्फ 46 प्रतिशत ही मानकों पर खरे उतरे थे.. बाकी 54% वर्क में मिलावट थी. इसी महीने राजस्थान के बाजारों में किए गए एक और सर्वे में पता चला कि चांदी के वर्क के 96 प्रतिशत सैंपल प्योरिटी टेस्ट में फेल हो गए..

ये सैंपल क्यों फेल हो रहे हैं.. और इनमें क्या मिलावट की जा रही है.. आपको DNA इन्वेस्टिगेशन में देखना चाहिए.असली और नकली वर्क का फर्क आम इंसान की आंखें नहीं पहचान पाएंगे.. लिहाजा हमारी टीम ने खुफिया कैमरे में इसकी सच्चाई भी कैद की.. अभी तक ये तो तय था कि नकली वर्क में चांदी नहीं होती है.. लेकिन इसकी जगह होता क्या है.. ये सुनकर आप चौंक जाएंगे. नकली वर्क में चांदी की जगह चांदी की तरह दिखने वाले एल्युमिनियम का प्रयोग होता है. यकीन नहीं हो रहा है तो खुद वर्क के विक्रेता से असलियत पढ़ें...

  • रिपोर्टर- बनता किससे है
  • वर्क विक्रेता- इससे ही बनता है
  • रिपोर्टर- ये तो बता दिया आपने, वो चीज क्या चीज होती है.. क्या आइटम है
  • वर्क विक्रेता- उसका माल अलग आता है
  • रिपोर्टर- सिल्वर है.. क्या है
  • वर्क विक्रेता- वो सिल्वर है, चांदी नहीं है..
  • रिपोर्टर- सिल्वर और चांदी तो एक ही चीज है
  • वर्क विक्रेता- नहीं अलग होती है
  • रिपोर्टर- क्या है
  • वो किस चीज से बनता है.. डुप्लीकेट सिल्वर क्या है
  • वर्क विक्रेता- एक बात बताऊं मैं खुल कर
  • रिपोर्टर- खुली बात तो हो रही है
  • वर्क विक्रेता- ट्रांसफार्मर जब फुंकता(जलता) है ना, तो कट जाता है.. कटने के बाद इसमें से बड़ा निकलता है.. उसमें से निकलती है..
  • रिपोर्टर- एल्यूमीनियम
  • वर्क विक्रेता- एल्यूमीनियम है
  • रिपोर्टर- नुकसान करता होगा
  • वर्क विक्रेता- मोटा वाला नुकसान देगा.. पतला वाला नहीं

आपको लग रहा होगा कि एल्यूमीनियम का ये वर्क मेरठ में बन रहा है.. ज्यादा से ज्यादा इसकी सप्लाई आसपास के इलाकों में होगी.. लेकिन अगर आप ऐसा सोच रहे हैं तो आप मुगालते में हैं.. क्योंकि बहुत मुमकिन है कि आपने भी इसी वर्क की मिठाई जरूर खाई होगी.. यकीन नहीं होता है तो इनके सप्लाई चेन की डीटेल चेक कर लीजिए

  • वर्क विक्रेता- ये वाला दिल्ली में बहुत बिक रहा है
  • रिपोर्टर- माल कहां कहां जाता है आपका
  • वर्क विक्रेता- पता नहीं कहां कहां जाता है
  • रिपोर्टर- आसपास कहां कहां सप्लाई है
  • वर्क विक्रेता- दिल्ली, बेंगलुरू तक है

अगर आप एल्यूमीनियम के वर्क खाने की संभावना से ही असहज हो गए हैं तो जरा रुकिए.. अभी तो एक और सरप्राइज बाकी है. त्योहारों पर आप जो मिठाई खाते हैं.. जिस मिठाई से भगवान को भोग लगाते हैं.. उसके बनने की प्रोसेस सुनकर और देखकर आपके पांव के नीचे से जमीन खिसक जाएगी

  • रिपोर्टर- ये फटता नहीं है?
  • वर्क विक्रेता- नहीं, 3 महीने चलता है, 10 हजार रुपये का आता है
  • रिपोर्टर- ये वाला हिस्सा.. ये क्या है
  • वर्क विक्रेता- ये.... वो होता है.. बकरे का चमड़ा..इससे फटता नहीं है..
  • रिपोर्टर- मिठाई में खाने में दिक्कत तो नहीं होगी
  • वर्क विक्रेता- नहीं

एक तरफ चांदी की जगह एल्युमिनियम... और दूसरी तरफ वर्क को पीटने और फैलाने की प्रक्रिया में बकरे की खाल के इस्तेमाल. यानी मिठाई पर लगने वाली इस चमकदार परत के पीछे की कहानी, उसकी चमक से बिल्कुल अलग है.

मित्रों, हो सकता है..जिस मिठाई को आप दिवाली पर लक्ष्मी-गणेश को भोग लगाने वाले हों ..उसे जानवरों की खाल के बीच में रखकर बनाया जा रहा हो. खाद्य सुरक्षा विभाग ने वर्क बनाने के इस तरीके को पूरी तरह से प्रतिबंधित किया हुआ है. पारंपरिक रूप से वर्क बनाने के लिए चांदी को मवेशियों की आंतों की परतों के बीच रखकर हाथों से पीटा जाता था. आंतों की नमी और लचीलापन चांदी को बेहद पतला बनाने में मदद करते थे..

लेकिन देश की बड़ी शाकाहारी आबादी और नैतिक चिंताओं को देखते हुए FSSAI ने 2016 में चांदी के वर्क के निर्माण में पशुओं की खाल या आंतों के उपयोग पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया था. लेकिन ये प्रतिबंध जमीन पर लागू होता दिखाई नहीं दे रहा है. वर्क बनाने वाले लोग.. खुफिया कैमरे पर दावा कर रहे हैं कि वर्क को बनाने के लिए वो बकरे की स्किन का इस्तेमाल कर रहे हैं. यानी वो आपकी आस्था के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं. छल कर रहे हैं. पाप कर रहे हैं.

मित्रो, खिलवाड़ सिर्फ आस्था के साथ नहीं हो रहा. लोगों की सेहत के साथ भी हो रहा है. चांदी के वर्क के नमूनों की एक जांच में ये पाया गया था कि

  • 10 प्रतिशत नमूनों में सिर्फ एल्युमिनियम मिलाया गया था..
  • 86 प्रतिशत में चांदी के साथ साथ कॉपर की मात्रा पाई गई थी..
  • 54 प्रतिशत नमूनों में क्रोमियम, निकेल और लेड जैसे धातु थे..
  • 28 प्रतिशत नमूनों में कैडमियम मिला था..

चांदी के वर्क में ये मिलावट आपकी सेहत को कैसे बिगाड़ रही है, आपको ये भी जानना चाहिए..

DNA मित्रो, आम आदमी के लिए असली और नकली वर्क के बीच वैसे तो फर्क करना मुश्किल है.. क्योंकि मिठाइयों के ऊपर वर्क पूरी तरह से चिपक जाता है..लेकिन इसका एक तरीका ये हो सकता है कि इसे अपनी उंगलियों पर रखकर घिरें. अगर वो टूटकर उंगलियों से चिपक जाए तो वर्क असली है. अगर वो गुठली बनकर इकट्ठा हो जाए तो मान लीजिए कि वर्क नकली है..उसमें चांदी की जगह कोई और धातु है.

मित्रो, DNA इन्वेस्टिगेशन में हमें नकली चांदी के वर्क का जो सैंपल मिला है.. हमने उसे एक लैब में टेस्ट करने के लिए दिया है.. इस वर्क में क्या क्या हानिकारक धातु मिलाए गए हैं.. इसकी रिपोर्ट हम कल DNA में आपके साथ साझा करने वाले हैं.. साथ ही कल हम धनतेरस से पहले चांदी के सिक्कों में मिलावट का DNA टेस्ट भी करने वाले हैं... कल हमारी ये रिपोर्ट आपको बिल्कुल भी मिस नहीं करनी चाहिए..

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About the Author

Ravindra Pratap Singh

Ravindra Pratap Singh

रवींद्र प्रताप सिंह ने साल 2015 में जागरण.कॉम से डिजिटल मीडिया में कदम रखा मौजूदा समय वो ज़ी न्यूज डिजिटल में चीफ सब एडिटर हैं. अगस्त 2025 में उन्होंने ज़ी न्यूज ज्वाइन किया है. रवींद्र देश और दुनिया की खबरों के अलावा खेलों में क्रिकेट जगत और क्राइम की खबरों पर बेहतरीन पकड़ रखते हैं. इसके पहले रवींद्र रिपब्लिक भारत में इवनिंग शिफ्ट के इंचार्ज रहे और शाम की शिफ्ट संभालते हुए होम पेज की जिम्मेदारी रवींद्र के ऊपर थी. उससे पहले रवींद्र ने जनसत्ता और न्यूज नेशन में भी शाम की शिफ्ट और होम पेज की जिम्मेदारी बखूबी निभाई. इसके पहले रवींद्र ने 5 सालों तक पी7 और लाइव इंडिया जैसे न्यूज चैनलों में काम किया था. रवींद्र आकाशवाणी में काम करने का अनुभव रखते. अवध यूनिवर्सिटी से मॉस कम्युनिकेशन से पोस्ट ग्रेजुएट रवींद्र पिछले डेढ़ दशक से सक्रिय पत्रकारिता कर रहे हैं. आप रवींद्र से जुड़ने के लिए Ravindra.Singh@India.com पर मेल कर सकते हैं या फिर फेसबुक पर संपर्क करने के लिए https://www.facebook.com/pintu.singh.397 और एक्स पर https://x.com/rs66533 रवींद्र से संपर्क किया जा सकता है. 
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