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दहन नहीं, शुरुआत! भारत के इस राज्य में दशहरे पर बच्चे चावल की थाली में लिखते हैं गणेश मंत्र, जानें अनोखी परंपरा

दशहरे पर सिर्फ रावण दहन और शस्‍त्र पूजा ही नहीं होती है. बल्कि यह दिन विद्यारंभ परंपरा के लिए भी बेहद शुभ माना जाता है. दक्षिण भारत में इसे लेकर विशेष अनुष्‍ठान किया जाता है. जानिए यह परंपरा क्‍या है और इसका क्‍या महत्‍व है.

Written By Shraddha Jain
Published: Oct 19, 2026, 12:55 PM IST | Updated: Oct 19, 2026, 12:58 PM IST
Image Credit: दशहरा का दिन छोटे बच्‍चों की पढ़ाई की शुरुआत करवाने के लिए विशेष होता है. (Photo:AI)
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दशहरा आते ही रावण दहन की तस्वीरें जेहन में आने लगती हैं. गांव से लेकर शहर तक बड़े-बड़े पुतले जलाए जाते हैं. बुराई पर अच्‍छाई की जीत का पर्व मनाया जाता है. साथ ही इस दिन नए काम की शुरुआत की जाती है. नई गाड़ी खरीदी जाती हैं, वाहनों की पूजा की जाती है, शस्‍त्र पूजा की जाती है, मशीनों की पूजा की जाती है. इसके अलावा दशहरा का दिन विद्या आरंभ के लिए बहुत अच्‍छा माना जाता है. इस दिन छोटे बच्‍चों को शब्‍द ज्ञान कराया जाता है. इस नाम है विद्यारंभम संस्‍कार है.

छोटे बच्‍चों को अक्षर ज्ञान

आमतौर पर बच्‍चे जब पढ़ना-लिखना सीखते हैं तो उनके हाथ में स्‍लेट-कलम और कॉपी-किताब दी जाती हैं. लेकिन दक्षिण भारत में और कई अन्‍य स्‍थानों पर बच्‍चे के ज्ञान लेने की शुरुआत का पहला कदम एक बड़ा अनुष्‍ठान होता है. इसे विद्यारंभ संस्‍कार कहते हैं. जिस तरह वसंत पंचमी के दिन 2 से 3 साल के छोटे बच्‍चों को पढ़ाई की शुरुआत कराई जाती है. वैसे ही दशहरे का दिन भी पढ़ाई शुरू करने के लिए बेहद शुभ माना जाता है. इस दिन बच्‍चों को अक्षर ज्ञान कराया जाता है.

चावल की थाली में लिखवाते हैं गणेश मंत्र

विद्यारंभ के लिए अलग-अलग जगहों पर अलग-अलग परंपराएं निभाई जाती हैं. जैसे कहीं बच्‍चे से कॉपी-किताब, कलम की पूजा कराई जाती है और फिर उससे कोई अक्षर लिखवाया जाता है.

वहीं दक्षिण भारतीय राज्‍यों में एक थाली में चावल भरकर रखे जाते हैं. फिर गणेश जी की विधि-विधान से पूजा की जाती है. इसके बाद गुरु, पंडित या परिवार का कोई बड़ा सदस्‍य बच्‍चे का हाथ पकड़कर उससे चावल की थाली में कोई अक्षर या मंत्र लिखवाता है. आमतौर पर बच्‍चे से 'ऊं गणपतये नम:' मंत्र लिखवाया जाता है.

जीभ पर सोने की अंगूठी से लिखते हैं अक्षर

जिस तरह लिखने की शुरुआत मंत्र लिखकर की जाती है, वैसे ही बच्‍चे के अक्षर बोलने की शुरुआत भी खास अनुष्‍ठान से की जाती है. इसके लिए बच्‍चे की जीभ पर सोने की अंगूठी से कोई अक्षर लिखा जाता है. इसके बाद बच्‍चे से अक्षर बुलवाए जाते हैं.

विद्यारंभ का महत्‍व

इस तरह अक्षर बोलने और लिखने के यह विशेष अनुष्‍ठान बताते हैं कि व्‍यक्ति के लिए ज्ञान कितना अहम है. उसके बोले गए शब्‍द सोने से कीमती होते हैं. उसका ज्ञान ही उसकी सबसे बड़ी ताकत होता है. बच्‍चे से बुद्धि के दाता भगवान गणेश जी का मंत्र लिखवाया जाता है, ताकि उस पर हमेशा उनकी कृपा बनी रहे.

यहां तक कि केरल में दशहरे के मौके पर मंदिरों में विद्यारंभम संस्‍कार के लिए सामूहिक आयोजन भी होते हैं, जहां परिवार अपने बच्चों को पहला अक्षर लिखवाने के लिए लेकर पहुंचते हैं. इस मौके को यहां बड़े उत्‍सव की तरह मनाते हैं.

(Disclaimer: यह स्टोरी धार्मिक-सांस्कृतिक मान्यताओं पर आधारित है. मंत्र और अनुष्ठान की विधि अलग-अलग परिवारों, मंदिरों और स्थानीय परंपराओं के अनुसार बदल सकती है. धार्मिक मान्यताओं का उल्लेख सांस्कृतिक संदर्भ में किया गया है.)
 

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About the Author

पत्रकारिता में 15 वर्षों का व्यापक अनुभव रखने वाली श्रद्धा जैन वर्तमान में Zee News की नेशनल डिजिटल टीम में बतौर असिस्‍टेंट न्‍यूज एडिटर सक्रिय हैं. जहाँ वे धर्म, ज्योतिष, ग्रह गोचर, अंक शास्‍त्र और वास्तु शास्त्र जैसे विषयों पर अपनी विशेषज्ञता के लिए जानी जाती हैं। उन्होंने मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन और सिम्बॉयसिस इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी से क्रिएटिव राइटिंग की पढ़ाई की है. बतौर फोटो जर्नलिस्ट करियर शुरू करने वाली श्रद्धा ने दूरदर्शन, दैनिक भास्कर और चौथी दुनिया जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दी हैं.12 वर्षों की फील्ड रिपोर्टिंग के दौरान राजनीति और सामाजिक मुद्दों पर गहरी पकड़ बनाने के बाद, उन्होंने डिजिटल मीडिया की ओर रुख किया और देश 24*7 जैसे पोर्टल्स में नेतृत्व की भूमिका निभाई. वर्तमान में धर्म, ज्योतिष, वास्तु और हस्तरेखा जैसे विषयों पर गहन अध्ययन और लेखन करते हुए जटिल विषयों को सरल और रोचक भाषा में पाठकों के सामने पेश कर रही हैं.
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