दहन नहीं, शुरुआत! भारत के इस राज्य में दशहरे पर बच्चे चावल की थाली में लिखते हैं गणेश मंत्र, जानें अनोखी परंपरा
दशहरे पर सिर्फ रावण दहन और शस्त्र पूजा ही नहीं होती है. बल्कि यह दिन विद्यारंभ परंपरा के लिए भी बेहद शुभ माना जाता है. दक्षिण भारत में इसे लेकर विशेष अनुष्ठान किया जाता है. जानिए यह परंपरा क्या है और इसका क्या महत्व है.
दशहरा आते ही रावण दहन की तस्वीरें जेहन में आने लगती हैं. गांव से लेकर शहर तक बड़े-बड़े पुतले जलाए जाते हैं. बुराई पर अच्छाई की जीत का पर्व मनाया जाता है. साथ ही इस दिन नए काम की शुरुआत की जाती है. नई गाड़ी खरीदी जाती हैं, वाहनों की पूजा की जाती है, शस्त्र पूजा की जाती है, मशीनों की पूजा की जाती है. इसके अलावा दशहरा का दिन विद्या आरंभ के लिए बहुत अच्छा माना जाता है. इस दिन छोटे बच्चों को शब्द ज्ञान कराया जाता है. इस नाम है विद्यारंभम संस्कार है.
छोटे बच्चों को अक्षर ज्ञान
आमतौर पर बच्चे जब पढ़ना-लिखना सीखते हैं तो उनके हाथ में स्लेट-कलम और कॉपी-किताब दी जाती हैं. लेकिन दक्षिण भारत में और कई अन्य स्थानों पर बच्चे के ज्ञान लेने की शुरुआत का पहला कदम एक बड़ा अनुष्ठान होता है. इसे विद्यारंभ संस्कार कहते हैं. जिस तरह वसंत पंचमी के दिन 2 से 3 साल के छोटे बच्चों को पढ़ाई की शुरुआत कराई जाती है. वैसे ही दशहरे का दिन भी पढ़ाई शुरू करने के लिए बेहद शुभ माना जाता है. इस दिन बच्चों को अक्षर ज्ञान कराया जाता है.
चावल की थाली में लिखवाते हैं गणेश मंत्र
विद्यारंभ के लिए अलग-अलग जगहों पर अलग-अलग परंपराएं निभाई जाती हैं. जैसे कहीं बच्चे से कॉपी-किताब, कलम की पूजा कराई जाती है और फिर उससे कोई अक्षर लिखवाया जाता है.
वहीं दक्षिण भारतीय राज्यों में एक थाली में चावल भरकर रखे जाते हैं. फिर गणेश जी की विधि-विधान से पूजा की जाती है. इसके बाद गुरु, पंडित या परिवार का कोई बड़ा सदस्य बच्चे का हाथ पकड़कर उससे चावल की थाली में कोई अक्षर या मंत्र लिखवाता है. आमतौर पर बच्चे से 'ऊं गणपतये नम:' मंत्र लिखवाया जाता है.
जीभ पर सोने की अंगूठी से लिखते हैं अक्षर
जिस तरह लिखने की शुरुआत मंत्र लिखकर की जाती है, वैसे ही बच्चे के अक्षर बोलने की शुरुआत भी खास अनुष्ठान से की जाती है. इसके लिए बच्चे की जीभ पर सोने की अंगूठी से कोई अक्षर लिखा जाता है. इसके बाद बच्चे से अक्षर बुलवाए जाते हैं.
विद्यारंभ का महत्व
इस तरह अक्षर बोलने और लिखने के यह विशेष अनुष्ठान बताते हैं कि व्यक्ति के लिए ज्ञान कितना अहम है. उसके बोले गए शब्द सोने से कीमती होते हैं. उसका ज्ञान ही उसकी सबसे बड़ी ताकत होता है. बच्चे से बुद्धि के दाता भगवान गणेश जी का मंत्र लिखवाया जाता है, ताकि उस पर हमेशा उनकी कृपा बनी रहे.
यहां तक कि केरल में दशहरे के मौके पर मंदिरों में विद्यारंभम संस्कार के लिए सामूहिक आयोजन भी होते हैं, जहां परिवार अपने बच्चों को पहला अक्षर लिखवाने के लिए लेकर पहुंचते हैं. इस मौके को यहां बड़े उत्सव की तरह मनाते हैं.
(Disclaimer: यह स्टोरी धार्मिक-सांस्कृतिक मान्यताओं पर आधारित है. मंत्र और अनुष्ठान की विधि अलग-अलग परिवारों, मंदिरों और स्थानीय परंपराओं के अनुसार बदल सकती है. धार्मिक मान्यताओं का उल्लेख सांस्कृतिक संदर्भ में किया गया है.)