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नवरात्रि शुरू होते ही डूब जाएगा धन-समृद्धि देने वाला शुक्र तारा, नहीं हो सकेंगे गृहप्रवेश समेत ये मंगल कार्य

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नवरात्रि शुरू होते ही डूब जाएगा धन-समृद्धि देने वाला शुक्र तारा, नहीं हो सकेंगे गृहप्रवेश समेत ये मंगल कार्य
Image Credit: नवरात्र प्रारंभ होने के अगले दिन ही 12 अक्‍टूबर को शुक्र अस्‍त हो जाएंगे, जिससे शुभ कामों पर रोक लग जाएगी. (Photo: AI)

नवरात्रि को बेहद पवित्र और मंगलकारी समय माना जाता है. पितृ पक्ष खत्‍म होने के बाद शारदीय नवरात्र प्रारंभ होती हैं और इस दौरान लंबे समय से रुके हुए कुछ मंगल कार्य प्रारंभ हो जाते हैं जैसे- गृह प्रवेश, नए काम या व्‍यापार की शुरुआत, नए वाहन की खरीदी आदि. लेकिन साल 2026 में नवरात्र के दौरान इनमें से कुछ कार्य नहीं हो सकेंगे, इसके पीछे वजह है शुभ कार्यों से जुड़े शुक्र ग्रह का अस्‍त रहना.

कब से अस्‍त हो रहे शुभ ग्रह?

द्रिक पंचांग के अनुसार, शुक्र ग्रह 12 अक्‍टूबर 2026 की शाम 06:19 से अस्‍त हो जाएंगे और 29 अक्‍टूबर 2026 की सुबह 6 बजे तक अस्‍त रहेंगे. जबकि शारदीय नवरात्र 11 अक्‍टूबर 2026 से प्रारंभ हो जाएंगी. यानी कि एक दिन पहले नवरात्र शुरू होते ही अगले दिन से शुक्र अस्‍त के कारण कुछ शुभ-मांगलिक कार्य पर रोक लग जाएगी.

वहीं कुछ लोग 23 सितंबर 2026 से ही शुक्र अस्‍त मान रहे हैं, जब वह सूर्य के थोड़ा करीब पहुंचेंगे. जबकि ज्‍योतिष में शुक्र वक्री स्थिति में सूर्य से 10 डिग्री पर या सामान्‍य स्थिति में 8 डिग्री के अंश पर आए तभी उसे अस्‍त माना जाता है, जो कि शुक्र 12 अक्‍टूबर को आएगा. इस बीच 3 अक्‍टूबर को शुक्र वक्री होंगे.

शुक्र का उदित रहना क्‍यों जरूरी?

हिंदू धर्म और ज्‍योतिष में शुक्र का संबंध, धन-वैभव, समृद्धि, प्रेम यानी कि भौतिक सुख से माना गया है. इसलिए शादी, सगाई, मुंडन, गृहप्रवेश, नए काम की शुरुआत, यज्ञ-अनुष्‍ठान जैसे शुभ कार्यों को तभी किया जाता है जब शुक्र उदित स्थिति में हो.

जब‍ शुक्र या कोई भी ग्रह सूर्य के बेहद करीब आ जाता है, तो उसका प्रभाव कम हो जाता है और वह अशुभ फल देने लगता है. इसलिए शुभ ग्रहों गुरु और शुक्र के अस्‍त होने पर शुभ-मांगलिक कार्य नहीं किए जाते हैं.

इस साल शुक्र अस्‍त पर नहीं होंगे ये कार्य

ज्‍योतिषाचार्य दिलीप गुप्‍ता के अनुसार, अक्‍टूबर 2026 में शुक्र अस्‍त होने के दौरान नए गृहप्रवेश नहीं किया जा सकेंगे. हालांकि नवरात्र का समय बेहद पवित्र होता है और ये 9 दिन स्‍वयंसिद्ध मुहूर्त माने जाते हैं इसलिए नए काम की शुरुआत करने या नया एग्रीमेंट करने में कोई बाधा नहीं है.

हालांकि चातुर्मास अवधि होने के कारण सगाई, विवाह, मुंडन, जनेऊ संस्‍कार आदि वैसे भी बैन रहेंगे. यह सब कार्य 21 नवंबर 2026 को देवउठनी एकादशी पर चातुर्मास खत्‍न होने के बाद ही प्रारंभ हो सकेंगे. हालांकि कुछ जगहों पर विवाह पक्‍की होने की रस्‍म जैसे रोका आदि नवरात्र के बाद कर लिए जाते हैं, लेकिन इस साल शुक्र अस्‍त होने से ये कार्य करना उचित नहीं माना जाएगा.

(Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं और ज्योतिषीय गणनाओं पर आधारित है. अलग-अलग पंचांग और स्थान के अनुसार तिथि व मुहूर्त में अंतर हो सकता है. किसी भी मांगलिक कार्य के लिए स्थानीय पंचांग या विद्वान से सलाह लें.)

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About the Author

Shraddha Jain

Shraddha Jain

पत्रकारिता में 15 वर्षों का व्यापक अनुभव रखने वाली श्रद्धा जैन वर्तमान में Zee News की नेशनल डिजिटल टीम में बतौर असिस्‍टेंट न्‍यूज एडिटर सक्रिय हैं. जहाँ वे धर्म, ज्योतिष, ग्रह गोचर, अंक शास्‍त्र और वास्तु शास्त्र जैसे विषयों पर अपनी विशेषज्ञता के लिए जानी जाती हैं। उन्होंने मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन और सिम्बॉयसिस इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी से क्रिएटिव राइटिंग की पढ़ाई की है. बतौर फोटो जर्नलिस्ट करियर शुरू करने वाली श्रद्धा ने दूरदर्शन, दैनिक भास्कर और चौथी दुनिया जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दी हैं.12 वर्षों की फील्ड रिपोर्टिंग के दौरान राजनीति और सामाजिक मुद्दों पर गहरी पकड़ बनाने के बाद, उन्होंने डिजिटल मीडिया की ओर रुख किया और देश 24*7 जैसे पोर्टल्स में नेतृत्व की भूमिका निभाई. वर्तमान में धर्म, ज्योतिष, वास्तु और हस्तरेखा जैसे विषयों पर गहन अध्ययन और लेखन करते हुए जटिल विषयों को सरल और रोचक भाषा में पाठकों के सामने पेश कर रही हैं.
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