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शारदीय नवरात्र के सातवें दिन मां कालरात्रि की उपासना, जानें क्या है इस दिन का शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और भोग

Navratri 7th day 2026, मां कालरात्रि की पूजा नवरात्रि के सातवें दिन होती है. मां कालरात्रि को समर्पित इस तिथि पर किस विधि से पूजा करें, शुभ मुहूर्त और मां का प्रिय भोग क्या है. आइए जानें.

Written By Padma Shree Shubham
Published: Oct 16, 2026, 08:09 PM IST | Updated: Oct 16, 2026, 08:20 PM IST
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मां दुर्गा की सातवीं शक्ति यानी मां कालरात्रि की उपासना शारदीय नवरात्र के सातवें दिन यानी आश्विन शुक्ल सप्तमी तिथि पर की जाएगी. इस दिन मां कालरात्रि की पूजा करने से मन के भय का नाश होता है और भक्त के लिए ब्रह्मांड की समस्त सिद्धियों के द्वार खुलते हैं. मां कालरात्रि अपने भक्तों के जीवन से सभी कष्टों, बाधाओं और भय का नाश कर मनवांछित फल प्राप्ति का आशीर्वाद देती हैं. सभी नकारात्मक शक्तियों को दूर करती हैं.  मां कालरात्रि की की पूजा की विधि से लेकर भोग और स्वरूप के बारे में आइए इस लेख में जानें.

मां कालरात्रि का स्वरूप

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मां कालरात्रि के शरीर का रंग घने अंधकार के जैसा काला है. मां के सिर के बाल बड़े-बड़े और बिखरे हुए हैं. गले में चमकदार माला है. मां केतीन नेत्र हैं जिनसे विद्युत के समान चमकीली किरणें निकलती है. मां की नाक से श्वास-प्रश्वास से अग्नि की भयंकर ज्वाला निकलती है. माता का वाहन गर्दभ यानी गदह है. दाहिने हाथ की वरमुद्रा से माता अपने भक्तों को वरदान देती हैं. दाहिनी तरफ का नीचला हाथ अभयमुद्रा में है. बाईं तरफ के ऊपर वाले हाथ में लोहे का कांटा है और नीचे वाले हाथ में माता ने खड्ग धारण किया है. मुश्किल समय में मां कालरात्रि की उपासना करने से मानसिक शांति मिलती है. साहस का संचार होता है. मां को 'शुभंकरी' कहते हैं. मां का स्वरूप भले ही अति भयानक और विकराल हो लेकिन अपने भक्तों के लिए माता हमेशा ममता की भावना रखती है और हर संकट से निकालती हैं. मां की उपासना से भक्त का कल्याण होता है.

नवरात्र की सप्तमी तिथि और मुहूर्त

शारदीय नवरात्रि का सप्तमी तिथि का व्रत 17 अक्टूबर 2026, शनिवार को रखा जाएगा.।
अभिजीत मुहूर्त: सुबह 11:43 बजे से लेकर दोपहर 12:28 बजे तक
ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 04:59 बजे से लेकर सुबह 05:47 बजे तक
अपराह्न पूजा मुहूर्त: दोपहर 03:54 बजे से लेकर शाम 06:14 बजे तक।

मां कालरात्रि की पूजा विधि

मां कालरात्रि की पूजा करने के लिए सूर्योदय से पूर्व उठ जाएं.
स्नान आदि करें और साफ वस्त्र धारण करें.
पूजा स्थल को साफ कर लें और गंगाजल छिड़क कर शुद्ध करें.
मां कालरात्रि की प्रतिमा को चौकी पर सजाएं. 
मां को रोली, कुमकुम, अक्षत अर्पित करें.
फूल, धूप और दीप अर्पित करें.
अब मां उसका प्रिय भोग अर्पित करें.
मां की आरती करें.
ध्यान कर मां के मंत्र का जाप करें.

मां कालरात्रि का प्रिय भोग

मां कालरात्रि का प्रिय भोग गुड़ या गुड़ से बनी सामग्री है. जैसे गुड़ का हलवा, गुड़ की खीर या मालपुआ या गुड़-चने. इन भोगों को पा कर माता अति प्रसन्न होती हैं.

मां कालरात्रि का प्रिय रंग

मां दुर्गा के भयानक रूप मां कालरात्रि का प्रिय रंग नीला और काला हैं. कई धार्मिक मान्यताओं और परंपराओं में माता का प्रिय रंग भूरा और ग्रे भी बताया गया है. इस दिन नीले रंग के वस्त्र पहनकर मां की उपासना करें तो शुभ होगा.

(डिस्क्लेमर- यह सामग्री धार्मिक मान्यताओं, प्रचलित परंपराओं एवं उपलब्ध धार्मिक स्रोतों पर आधारित है. विभिन्न क्षेत्रों, समुदायों और परंपराओं के अनुसार व्रत-त्योहारों की तिथि, पूजा-विधि एवं मान्यताओं में अंतर संभव है. पाठक इसे सामान्य धार्मिक जानकारी के रूप में देखें.)

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About the Author

पद्मा श्री शुभम् को पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 साल का अनुभव. मॉस कम्‍युनिकेशन ग्रेजुएट और हिंदी लिटरेचर से पोस्‍ट ग्रेजुएट. मीडिया में डिजिटल प्लेटफॉर्म से करियर शुरू करने के बाद कई संस्थाओं में काम किया. Nedrick News, TFI Post जैसी संस्थाओं में कार्यरत रहीं. इसके बाद Zee News जॉइन किया. समाचार और वर्तमान घटनाओं पर लिखने पढ़ने में रुचि. धर्म और ज्योतिष में अधिक रुचि. वर्तमान में धर्म और ज्योतिष संबंधी लेख लिखने में कार्यरत. पद्मा से आप padma.shubham@India.com मेल के जरिए सीधे संपर्क कर सकते हैं.
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