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शारदीय नवरात्रि के पावन दिन शुरू हो गए हैं और हर ओर जय माता दी के जयकारे गूंजने लगे हैं. हालांकि, क्या आपने कभी ये सोचा है कि मां दुर्गा के ठीक नौ ही स्वरूप क्यों वर्णन में आते हैं? इसके पीछे गहरे रहस्य छिपे हैं. पहला महिषासुर से युद्ध और वध से जुड़ा है जिसके लिए मां नौ रूप धरे थें. दूसरा रहस्य मानव के जीवन चक्र से जुड़ा है. जहां पर मां के नौ रूप यानी शैलपुत्री से सिद्धिदात्री तक मानव जीवन की पूर्ण यात्रा को समझा जा सकता है. आइए इसके बारे में विस्तार से जानें.
पौराणिक कथा है कि महिषासुर नाम के एक असुर ने तीनों लोकों में आतंक मचाया हुआ था जिससे तीनों लोगों में हाहाकार मच गया. फिर उसके बाद राक्षस के अंत के लिए सभी देवी-देवताओं ने अपनी शक्तियों को मिलाकर मां दुर्गा को प्रकट किया. देवी और महिषासुर के बीच लगातार 9 दिनों तक खूब युद्ध चला. इन 9 दिनों में माता ने नौ रूप धरे. अंत में आश्विन शुक्ल दशमी तिथि पर माता ने दुर्गा स्वरूप लेकर महिषासुर का वध कर दिया.
आध्यात्मिक दृष्टिकोण से देखें तो मां दुर्गा के 9 पावन स्वरूप मानव जीवन की पूर्ण यात्रा को दर्शाते हैं. इसे बहुत ही आसानी से समझा जा सकता है. देखिए माता के नौ देवियों की लिस्ट और उसका आध्यात्मिक महत्व--
(डिस्क्लेमर- यह सामग्री धार्मिक मान्यताओं, प्रचलित परंपराओं एवं उपलब्ध धार्मिक स्रोतों पर आधारित है. विभिन्न क्षेत्रों, समुदायों और परंपराओं के अनुसार व्रत-त्योहारों की तिथि, पूजा-विधि एवं मान्यताओं में अंतर संभव है. पाठक इसे सामान्य धार्मिक जानकारी के रूप में देखें.)