शारदीय नवरात्र के आठवें दिन मां महागौरी की उपासना, अष्टमी तिथि पर क्या है पूजा और कन्या पूजन की विधि, नोट कर लें शुभ मुहूर्त
शारदीय नवरात्र के आठवें दिन मां महागौरी की उपासना करने की विधि क्या है, अष्टमी तिथि पर किस विधि से कन्या पूजन करें और इस दिन का शुभ मुहूर्त क्या है? आइए इस लेख में विस्तार से जानें.
Durga Ashtami Kab Hai 2026: शारदीय नवरात्र में अष्टमी तिथि पर मां महागौरी की उपासना करने का विधान है. इस साल 12 अक्टूबर को शारदीय नवरात्र की शुरुआत हुई है और अब 19 अक्टूबर को महाअष्टमी का व्रत रखकर भक्त मां महागौरी की पूजा पूरे विधि-विधान से करेंगे. महाअष्टमी को दुर्गा अष्टमी भी कहा जाता है. इस दिन कई घरों में कन्या पूजन करने की भी परंपरा है. अष्टमी पर व्रत रखकर लोग हवन भी करते हैं. ऐसे में यह तिथि नवरात्र की एक बहुत ही महत्वपूर्ण तिथि है. आइए इस लेख में जानें कि कन्या पूजन करने की क्या विधि है, किस तरह से मां महागौरी की पूजा करें, महाष्टमी तिथि का शुभ मुहूर्त क्या है और मां महागौरी का स्वरूप कैसा है.
मां महागौरी का स्वरूप
मां महागौरी का रंग अति गोरा है और उनकी चार भुजाएं हैं. मां महागौरी को श्वेतांबरधरा के नाम से भक्त पुकारते हैं. मां महागौरी अपने भक्तों के लिए अन्नपूर्णा हैं. माता कोमल हैं और अपने हाथ में त्रिशूल और डमरु धारण करती हैं. मां का एक हाथ अभयमुद्रा में है और एक हाथ वरमुद्रा में है. मां महागौरी अपने भक्तों को शांति पाने का आशीर्वाद देती हैं. माता पवित्रता और सौम्यता का प्रतीक हैं.
नवरात्र महाअष्टमी 2026 तिथि
हिंदू पंचांग के अनुसार, इस साल अष्टमी तिथि की शुरुआत 18 अक्टूबर को सुबह के समय 08:27 बजे से होगी और 19 अक्टूबर को सुबह के 10:51 बजे तिथि का समापन होगा. उदया तिथि में महाअष्टमी का कन्या पूजन 19 अक्टूबर को सोमवार के दिन किया जाएगा. हालांकि, कुछ लोग 18 अक्टूबर को भी अष्टमी तिथि मानते हुए मां महागौरी की पूजा कर कन्या पूजन और हवन अनुष्ठान कर रहे हैं.
महाष्टमी पर कन्या पूजा का शुभ मुहूर्त
ब्रह्म मुहूर्त- सुबह 04:52 बजे से लेकर सुबह 05:40 बजे तक
अमृत काल- सुबह 07:28 बजे से लेकर सुबह 09:16 बजे तक
अभिजीत मुहूर्त- सुबह 11:49 बजे से लेकर दोपहर 12:34 बजे तक
मां महागौरी की पूजा विधि
सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि करें और सफेद रंग के वस्त्र पहनें.
मां महागौरी की प्रतिमा को गंगाजल अर्पित करें.
माता को सफेद रंग के वस्त्र और फूल चढ़ाएं.
अब कुमकुम या रोली अर्पित करें.
माता को शृंगार की सामग्री अर्पित करें.
नारियल से बनी मिठाई, हलवा-पूरी और काले चने का भोग अर्पित करें.
मां महागौरी के मंत्रों के जाप करें.
अंत में माता की भव्य आरती करें और भूलचूक के लिए क्षमा मांगे.
माता महागौरी के मंत्र
'श्वेते वृषेसमारूढा श्वेताम्बरधरा शुचिः।
महागौरी शुभं दद्यान्महादेव प्रमोददा॥'
'या देवी सर्वभूतेषु मां महागौरी रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥'
अष्टमी पर कन्या पूजन की विधि
अगर आपके घर में महाष्टमी पर कन्या पूजन होता है तो 2 से 10 वर्ष की 9 कन्याओं को आदर-सम्मान के साथ घर में बुलाएं. एक थाल में जल लेकर कन्याओं के चरण धोएं. अब उन्हें आसन पर बैठाएं. कन्याओं के साथ में एक बालक भी होना चाहिए जोकि बटुक भैरव का प्रतीक होता है. अब कन्याओं के माथे पर रोली लगाएं फूल और अक्षत चढ़ाएं. मां दुर्गा का स्मरण करते हुए कन्याओं को पूरी, हलवा, चना परोसें. भोजन कराने के बाद मिठाई या फल खाने को दें. अब कन्याओं कुछ उपहार और धनराशि दें. उन्हें स्नेह करें. उनके चरण स्पर्श कर उनका आशीर्वाद लें. अंत में माता रानी के जयकारे लगाकर देवी मां का आशीर्वाद लें.
(डिस्क्लेमर- यह सामग्री धार्मिक मान्यताओं, प्रचलित परंपराओं एवं उपलब्ध धार्मिक स्रोतों पर आधारित है. विभिन्न क्षेत्रों, समुदायों और परंपराओं के अनुसार व्रत-त्योहारों की तिथि, पूजा-विधि एवं मान्यताओं में अंतर संभव है. पाठक इसे सामान्य धार्मिक जानकारी के रूप में देखें.)