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Shardiya navratri 2026: शारदीय नवरात्र के पहले दिन घटस्थापना और मां शैलपुत्री की उपासना, जानें पूजा विधि, शुभ मुहूर्त और माता का प्रिय भोग

Ghatsthapana Shubh Muhurat: शारदीय नवरात्र के पहले दिन मां दुर्गा के प्रथम स्वरूप मां शैलपुत्री की उपासना की जाती है और इस दिन कलश स्थापना की विधि भी निभाई जाती है. आइए नवरात्र में घटस्थापना और माता की पूजा की विधि मुहूर्त जानें.

Written By Padma Shree Shubham
Published: Oct 10, 2026, 02:48 PM IST | Updated: Oct 10, 2026, 03:05 PM IST
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Shardiya navratri 2026 kalash sthapana (11 October): मां दुर्गा की उपासना का पावन पर्व शारदीय नवरात्र 11 अक्टूबर 2026, रविवार से शुरू हो रहा है. इस दिन मां दुर्गा के प्रथम स्वरूप मां शैलपुत्री की पूजा की जाएगी लेकिन उससे पहले विधि-विधान से और शुभ मुहूर्त में कलश स्थापना की जाएगी. इस दिन अखंड ज्योत जलाया जाएगा. धार्मिक मान्यता है कि नवरात्र में कलश स्थापना करने से मां दुर्गा अति प्रसन्न होती हैं और मनोकामनाओं की पूर्ति करती हैं. इस साल शारदीय नवरात्र 11 अक्टूबर से शुरू हो रहा है.

शारदीय नवरात्र का पहला दिन

नवरात्र के प्रतिपदा तिथि पर कलश स्थापना किया जाता है. ध्यान दें हिंदू पंचांग के अनुसार, 10 अक्टूबर 2026 की रात को 09:19 बजे से 11 अक्टूबर 2026 को रात के 09:30 बजे आश्विन शुक्ल प्रतिपदा तिथि बनी रहेगी. उदया तिथि के अनुसार प्रतिपदा तिथि 11 अक्टूबर को होगा और इसी दिन शुभ मुहूर्त में कलश स्थापना और मां शैलपुत्री की पूजा की जाएगी. आइए  घटस्थापना की विधि, मां शैलपुत्री की पूजा विधि, शुभ मुहूर्त आदि के बारे में इस लेख में विस्तार से जानें.

प्रतिपदा तिथि पर घटस्थापना का विधान

शारदीय नवरात्र घटस्थापना के शुभ मुहूर्त 2026

11 अक्तूबर को घटस्थापना के लिए सुबह का शुभ मुहूर्त सुबह 06:19 बजे से लेकर सुबह 10:12 बजे तक होगा. इस अवधि में घटस्थापना करेंगे और फिर मां शैलपुत्री की पूजा करेंगे. घटस्थापना के लिए अभिजित मुहूर्त सुबह 11:44 बजे से लेकर दोपहर 12:31 बजे तक होगा.

घटस्थापना के लिए शुभ चौघड़िया मुहूर्त:

चर (सामान्य): सुबह 07:33 बजे से लेकर सुबह 09:00 बजे तक.
लाभ (उत्तम): सुबह 09:00 बजे से लेकर सुबह 10:28 बजे तक.
अमृत (सर्वोत्तम): सुबह 10:28 बजे से लेकर सुबह 11:56 बजे तक.
शुभ (उत्तम): दोपहर 01:24 बजे से लेकर दोपहर 02:51 बजे तक.

राहुकाल में न करें घटस्थापना

राहुकाल में घटस्थापना जैसे शुभ कार्य को करना वर्जित माना गया है. ऐसे में 11 अक्टूबर को राहुकाल का ध्यान रखते हुए घटस्थापना विधि को पूरा करें. राहुकाल शाम 4:34 बजे से लेकर शाम 6:01 बजे तक होगा.

घटस्थापना की विधि

घटस्थापना के लिए मिट्टी या पीतल का एक साफ कलश लें.
कलश पर तिलक लगाएं और उसमें रक्षा सूत्र या मौली बांधें. 
कलश में शुद्ध जल भरें. गंगाजल भी भर सकते हैं.
कलश में थोड़ी खड़ी हल्दी, एक सुपारी और सिक्के डालें.
गोमती चक्र या कौड़ियां भी कलश में डाल सकते हैं.
अब डंठल लगे पांच आम के पत्तों पर तिलक करें.
इसे कलश के मुंह पर रखें और उसके ऊपर नारियल रख दें.
नारियल को लाल चुनरी से ढक दें और उस पर भी मौली बांधें.
अब पूजा वाली जगह पर चावल रखें और उस पर कलश को स्थापित कर दें.
अब आगे की पूजा यानी मां शैलपुत्री की पूजा करें.

प्रतिपदा तिथि पर मां शैलपुत्री की पूजा का विधान

मां शैलपुत्री का स्वरूप

देवी मां का पहला स्वरूप यानी मां शैलपुत्री पर्वतराज हिमालय की पुत्री हैं जो अपने दाहिने हाथ में त्रिशूल धारण करती हैं और मां के बाएं हाथ में कमल है. माता बैल पर सवार हैं और इन्हें सफेद रंग अत्यंत प्रिय है. माता शक्ति, स्थिरता और प्रकृति का प्रतीक हैं जो चंद्रमा से जुड़े अशुभ प्रभावों को दूर करती हैं और भक्त को मानसिक शांति का आशीर्वाद देती हैं.

मां शैलपुत्री का भोग

मां शैलपुत्री को भोग में सफेद बर्फी, रबड़ी, दूध से बनी मिठाई, मावे के लड्डू या गाय के घी से बने हलवे का भोग अर्पित करें. माता प्रसन्न होकर परिवार को सुख-शांति और खुशहाली का आशीर्वाद देंगी.

मां शैलपुत्री की पूजा विधि

शैलपुत्री माता की पूजा विधि
एक लकड़ी की चौकी पर लाल कपड़ा बिछाएं.
उससे पहले कपड़े पर केसर से शं लिख दें.
चौकी पर शैलपुत्री मां की तस्वीर स्थापित करें.
हाथ में लाल रंग के फूल धारण कर माता का ध्यान करें और माता का मंत्र बोलें.
ध्यान के लिए मंत्र है-  ऊँ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डाय विच्चे ओम् शैलपुत्री देव्यै नम:
अब फूल को माता को अर्पित करें और शैलपुत्री देवी के मंत्र का जाप 108 बार करें.
मंत्र है - ओम् शं शैलपुत्री देव्यै: नम:
मां से मनोकामना पूर्ति और परिवार पर कृपा बनाए रखने की प्रार्थना करें.
इसी पूजा में अखंड ज्योत जलाएं. कोशिश करें की प्रतिपदा से नवमी तिथि तक दीपक न बूझे.

(डिस्क्लेमर- यह सामग्री धार्मिक मान्यताओं, प्रचलित परंपराओं एवं उपलब्ध धार्मिक स्रोतों पर आधारित है. विभिन्न क्षेत्रों, समुदायों और परंपराओं के अनुसार व्रत-त्योहारों की तिथि, पूजा-विधि एवं मान्यताओं में अंतर संभव है. पाठक इसे सामान्य धार्मिक जानकारी के रूप में देखें.)

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पद्मा श्री शुभम् को पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 साल का अनुभव. मॉस कम्‍युनिकेशन ग्रेजुएट और हिंदी लिटरेचर से पोस्‍ट ग्रेजुएट. मीडिया में डिजिटल प्लेटफॉर्म से करियर शुरू करने के बाद कई संस्थाओं में काम किया. Nedrick News, TFI Post जैसी संस्थाओं में कार्यरत रहीं. इसके बाद Zee News जॉइन किया. समाचार और वर्तमान घटनाओं पर लिखने पढ़ने में रुचि. धर्म और ज्योतिष में अधिक रुचि. वर्तमान में धर्म और ज्योतिष संबंधी लेख लिखने में कार्यरत. पद्मा से आप padma.shubham@India.com मेल के जरिए सीधे संपर्क कर सकते हैं.
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