App

यहां मरने से पहले खुद का पिंडदान करते हैं लोग, जानिए भस्मकूट पर्वत के इस अनोखे मंदिर की परंपरा

बिहार के गया स्थित जनार्दन मंदिर में लोग जीते जी अपना पिंडदान करते हैं. 3 दिनों तक चलने वाले इस अनोखे अनुष्ठान से पितृ दोष समाप्त होते हैं और मृत्यु के बाद मोक्ष मिलता है.

यहां मरने से पहले खुद का पिंडदान करते हैं लोग, जानिए भस्मकूट पर्वत के इस अनोखे मंदिर की परंपरा

पितृपक्ष की शुरूआत हो चुकी है, जिसके बाद देश भर में पूर्वजों के आत्मा की शांति के लिए श्राद्ध और तर्पण करने का समय शुरू हो जाता है. हर साल आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा से लेकर सर्वपितृ अमावस्या तक ये पावन कार्य चलता है.

ज्यादातर लोग अपने मृत परिजनों और पितरों के लिए पिंडदान करते हैं. लेकिन बिहार के गया में एक ऐसा ऐतिहासिक मंदिर मौजूद है जहां इंसान अपने जीते जी खुद अपना पिंडदान करता है.

ये अनोखी और रहस्यमयी परंपरा सदियों पुरानी है. इस मंदिर में खुद का श्राद्ध करने के लिए दूर-दूर से लोग पहुंचते हैं. आज हम इस स्टोरी में इस मंदिर के बारे में डिटेल से जानेंगे.

भस्मकूट पर्वत पर स्थित है प्रसिद्ध जनार्दन मंदिर

इस रहस्यमयी और अनोखे मंदिर का नाम जनार्दन मंदिर है. ये मंदिर गयाजी के पवित्र भस्मकूट पर्वत पर स्थित है. मंदिर में भगवान विष्णु अपने जनार्दन स्वरूप में साक्षात विराजमान हैं.

ये मंदिर मां मंगला गौरी मंदिर के ठीक उत्तर दिशा में बना हुआ है. पूरे देश में गयाजी को मोक्ष की भूमि माना जाता है. गयाजी में वैसे तो 54 पिंडवेदी और 53 पवित्र स्थल हैं. लेकिन जनार्दन मंदिर इकलौती ऐसी जगह है जहां जीवित व्यक्ति का श्राद्ध कर्म कराया जाता है.

बेऔलाद और संन्यासी लोग क्यों कराते हैं आत्मश्राद्ध

इस मंदिर में जीवित रहते हुए श्राद्ध कराने के पीछे बेहद गहरा धार्मिक कारण है. जिन लोगों की कोई संतान नहीं होती या परिवार में पिंडदान करने वाला कोई वारिस नहीं होता, वो लोग यहां आकर अपना श्राद्ध कराते हैं.

इसके अलावा संसार का त्याग करके संन्यास लेने वाले साधु-संत भी जीवित रहते अपना पिंडदान करते हैं. मान्यता है कि बिना श्राद्ध के आत्मा को मोक्ष नहीं मिलता.

ऐसे में लोग अपनी मृत्यु से पहले ही मोक्ष का रास्ता साफ कर लेते हैं. यहां भगवान विष्णु स्वयं भक्त द्वारा अर्पित पिंड को स्वीकार करते हैं.

मृत्यु के बाद परिजनों को नहीं करना पड़ता अनुष्ठान

जनार्दन मंदिर में जीवित रहते हुए पिंडदान करने का बड़ा धार्मिक महत्व बताया गया है. जो व्यक्ति अपने जीवनकाल में ही ये अनुष्ठान कर लेता है, उसके सारे पितृ दोष तुरंत खत्म हो जाते हैं.

मृत्यु के बाद उसकी आत्मा को यमलोक में किसी प्रकार का कष्ट नहीं भोगना पड़ता. सबसे खास बात ये है कि इस अनुष्ठान के बाद व्यक्ति के निधन पर परिजनों को दोबारा पिंडदान करने की जरूरत नहीं पड़ती है.

भगवान जनार्दन के आशीर्वाद से आत्मा को सीधा मोक्ष और विष्णु लोक की प्राप्ति होती है.

बिना तिल के 3 दिनों में पूरा होता है ये गुप्त विधान

जनार्दन मंदिर में आत्मश्राद्ध का ये विधान पूरे 3 दिनों तक चलता है. गयाजी पहुंचने पर सबसे पहले वैष्णव सिद्धि का संकल्प लेकर पुराने पापों का प्रायश्चित किया जाता है.

इसके बाद जनार्दन स्वामी के सामने खास पूजा-अर्चना और मंत्र जाप होता है. आम श्राद्ध में तिल का इस्तेमाल जरूरी माना जाता है, लेकिन जीवित पिंडदान में तिल का उपयोग बिल्कुल नहीं होता है.

इसमें केवल दही और चावल से बने 3 पिंड अर्पित किए जाते हैं. श्रद्धालु भगवान से प्रार्थना करते हैं कि देह त्यागने के बाद उन्हें सीधा मोक्ष मिले.

श्रद्धा और मोक्ष की अद्भुत मिसाल है ये परंपरा

पितृपक्ष के दौरान जनार्दन मंदिर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है. लोग बहुत ही निष्ठा और नियम-संयम के साथ इस 3 दिवसीय अनुष्ठान को पूरा करते हैं.

हिंदू धर्म में मोक्ष प्राप्ति के लिए इस प्रक्रिया को बेहद प्रामाणिक माना गया है. ये मंदिर न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि जीवन और मृत्यु के गूढ़ रहस्य को भी दर्शाता है.

अगर आप भी गयाजी जा रहे हैं, तो भस्मकूट पर्वत स्थित इस अलौकिक मंदिर के दर्शन जरूर करें.

(Disclaimer): यह आलेख गयाजी तीर्थ क्षेत्र के स्थानीय पंडितों, जनार्दन मंदिर की पौराणिक मान्यताओं और धार्मिक ग्रंथों में वर्णित जानकारियों पर आधारित है.

Add Zee News as a Preferred Source
TAGS:

About the Author

Harsh Singh

Harsh Singh

हर्ष सिंह जी न्यूज डिजिटल में एक अनुभवी और धारदार शैली के पत्रकार हैं. उन्होंने मार्च 2024 में जी न्यूज जॉइन किया था. वर्तमान में हर्ष धर्म और ज्योतिष से जुड़ी खबरों की खास कवरेज कर रहे हैं. वे देश-दुनिया के धार्मिक आयोजनों, अध्यात्म और ज्योतिषीय गणनाओं से जुड़े जरूरी अपडेट्स दर्शकों तक पूरी सटीकता के साथ पहुंचाते हैं. हर्ष को उनकी फैक्ट-आधारित और भरोसेमंद लेखन शैली के लिए जाना जाता है.बनारस के महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ से मास कम्युनिकेशन में पोस्ट-ग्रेजुएशन करने वाले हर्ष अपनी पूरी ऊर्जा और समझ के साथ धर्म-कर्म और ऐस्ट्रो की दुनिया के खबरों को सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचा रहे हैं.अगर आप हर्ष सिंह से संपर्क करना चाहते हैं या उनसे जुड़ा कोई सुझाव साझा करना चाहते हैं, तो उन्हें इस ईमेल आईडी पर लिख सकते हैं: Harsh.singh@India.com
Read More