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गाड़ी खरीदते ही लोग क्यों भागते हैं इस मंदिर? पलामू के 61 साल पुराने धाम में विराजमान हैं 'मां कालरात्रि', टल जाता है हर हादसा!

पलामू के मेदिनीनगर स्थित 61 साल पुराने दक्षिणेश्वर काली मंदिर में मां कालरात्रि विराजमान हैं. इस खबर में हम आपको बताएंगे कि क्यों नई गाड़ी की पहली पूजा कराने के लिए लोग इस मंदिर आते हैं.

गाड़ी खरीदते ही लोग क्यों भागते हैं इस मंदिर? पलामू के 61 साल पुराने धाम में विराजमान हैं 'मां कालरात्रि', टल जाता है हर हादसा!

भारत में बहुत सारे चमत्कारी मंदिर हैं, जो अपने अलग-अलग खासियतों के लिए जाना जाता है. आज हम जिस मंदिर के बारे में बताने जा रहे हैं उसका नाम दक्षिणेश्वर काली मंदिर है.

ये मंदिर झारखंड के पलामू जिला मुख्यालय मेदिनीनगर के रेड़मा चौक के पास भगवती भवन परिसर में स्थित है.

इस मंदिर की सबसे बड़ी खासियत ये है कि आसपास के इलाकों में जब भी कोई नई गाड़ी खरीदता है, तो उसकी पहली पूजा यहीं कराने आता है.

माना जाता है कि मां कालरात्रि के दर पर सच्चे मन से माथा टेकने वाले हर भक्त की मनोकामना पूरी होती है. इतना ही नहीं यहां नवरात्रि के दौरान भी लोगों की दर्शन करने के लिए भीड़ उमड़ती है.

आज हम इस खबर में इस मंदिर के परंपराओं और इतिहास के बारे में डिटेल से जानेंगे. 

मां कालरात्रि के शुभंकरी रूप की होती है खास पूजा

वहां के लोगों का कहना है कि यहां मां काली की पूजा मां कालरात्रि के स्वरूप में की जाती है. नवरात्रि के सातवें दिन पूजी जाने वाली मां कालरात्रि का एक नाम शुभंकरी भी है.

धार्मिक मान्यता है कि मां शुभंकरी के दर्शन करने से भक्तों के सभी काम शुभ होते हैं और जीवन के सारी समस्याएं दूर हो जाती हैं.

इसी वजह से यहां नवरात्रि के अलावा भी पूरे साल भक्त यहां आशीर्वाद लेने आते रहते हैं. मां का ये रूप भक्तों को हर प्रकार के भय से मुक्ति दिलाता है.

नई गाड़ियों की पहली पूजा

इस मंदिर की सबसे ज्यादा माने जाने वाली परंपरा नई गाड़ियों की पहली पूजा से जुड़ी हुई है. जब भी वहां के लोग नई गाड़ी खरीदते हैं, तो सबसे पहले मंदिर जाते हैं.

वहां के पुजारी से पूजा कराते हैं. जो पूरे विधि-विधान से होता है. ऐसा नहीं है कि बस वहीं के लोग आते हैं. पलामू के अलावा लातेहार, गढ़वा और आसपास के जिलों से भी लोग अपनी नई गाड़ियां लेकर यहां आते हैं.

वहां के लोग इसे किसी भी सफर की सुरक्षित और शुभ शुरुआत के लिए बहुत जरूरी मानते हैं.

61 साल पुराना है इतिहास

वहां के लोग बताते हैं कि मां दक्षिणेश्वर काली की स्थापना साल 1965 में हुईं थी. इस तरह ये मंदिर करीब 61 साल पुराना है.

शुरुआत में ये एक छोटा सा मंदिर था, लेकिन समय के साथ पूजा करने वालों की गिनती बढ़ती गई.

इसके बाद वहां के लोगों के मदद से इस मंदिर को और बेहतर किया गया. अब यहां द्वादश ज्योतिर्लिंग, राधा-कृष्ण दरबार, शीतला माता, भगवान शिव-पार्वती और हनुमान जी की भव्य प्रतिमाएं भी स्थापित हैं.

झारखंड के अलावा बिहार, यूपी और बंगाल से आते हैं भक्त

इस मंदिर के दर्शन के लिए बस झारखंड से ही लोग नहीं आते. यहां बिहार, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल से भी बड़ी संख्या में दर्शन करने वाले पहुंचते हैं.

रांची, पटना और दिल्ली जैसे बड़े शहरों में रहने वाले लोग भी जब भी यहां आते हैं, मां के दर्शन करना नहीं भूलते.

सावन के महीने और शारदीय नवरात्रि के समय में यहां दर्शन करने के लिए भक्तों की भीड़ टूट पड़ती है.

नवरात्रि में सजता है दरबार और दिन में दो बार खुलता है पट

नवरात्रि के पावन अवसर पर मंदिर में मां का श्रृंगार और पूजा की जाती है. इस दौरान श्रद्धालुओं के लिए विशाल भंडारे का आयोजन भी किया जाता है.

मंदिर में पूजा-अर्चना के लिए समय तय है. सुबह 6 बजे से दोपहर 12 बजे तक और शाम 4 बजे से रात 9 बजे तक मंदिर का पट श्रद्धालुओं के लिए खुला रहता है.

अगर आपको पूजा सामग्री लेना चाहते हैं तो आप बाहर मौजूद दुकानों से ले सकते हैं. वहां नारियल, चुनरी और या और कोई प्रसाद खरीदने में कोई परेशानी नहीं होती है. 

(Disclaimer): यह लेख स्थानीय धार्मिक मान्यताओं, मंदिर के पुजारियों के बयान और मीडिया रिपोर्ट्स में दी गई जानकारियों पर आधारित है.

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Harsh Singh

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हर्ष सिंह जी न्यूज डिजिटल में एक अनुभवी और धारदार शैली के पत्रकार हैं. उन्होंने मार्च 2024 में जी न्यूज जॉइन किया था. वर्तमान में हर्ष धर्म और ज्योतिष से जुड़ी खबरों की खास कवरेज कर रहे हैं. वे देश-दुनिया के धार्मिक आयोजनों, अध्यात्म और ज्योतिषीय गणनाओं से जुड़े जरूरी अपडेट्स दर्शकों तक पूरी सटीकता के साथ पहुंचाते हैं. हर्ष को उनकी फैक्ट-आधारित और भरोसेमंद लेखन शैली के लिए जाना जाता है.बनारस के महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ से मास कम्युनिकेशन में पोस्ट-ग्रेजुएशन करने वाले हर्ष अपनी पूरी ऊर्जा और समझ के साथ धर्म-कर्म और ऐस्ट्रो की दुनिया के खबरों को सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचा रहे हैं.अगर आप हर्ष सिंह से संपर्क करना चाहते हैं या उनसे जुड़ा कोई सुझाव साझा करना चाहते हैं, तो उन्हें इस ईमेल आईडी पर लिख सकते हैं: Harsh.singh@India.com
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