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बच्चे के नामकरण में किन-किन बातों का रखें ध्यान? मशहूर ज्योतिषाचार्य अजय भाम्बी ने बताए जरूरी नियम

बच्‍चे का नामकरण संस्‍कार हिंदू धर्म में बताए गए 16 संस्‍कारों में से एक है. बच्‍चे का नाम चुनने और नामकरण की पूजा करने में कुछ बातों का ध्‍यान जरूरी है, जानिए.

Written ByShraddha Jain
Published: Sep 22, 2026, 11:54 AM IST|Updated: Sep 22, 2026, 11:57 AM IST
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बच्चे के नामकरण में किन-किन बातों का रखें ध्यान? मशहूर ज्योतिषाचार्य अजय भाम्बी ने बताए जरूरी नियम
Image Credit: नामकरण संस्‍कार का महत्‍व, तरीका और जरूरी बातें. (Photo:AI)

About the Author

Shraddha Jain

Shraddha Jain

पत्रकारिता में 15 वर्षों का व्यापक अनुभव रखने वाली श्रद्धा जैन वर्तमान में Zee News की नेशनल डिजिटल टीम में बतौर असिस्‍टेंट न्‍यूज एडिटर सक्रिय हैं. जहाँ वे धर्म, ज्योतिष, ग्रह गोचर, अंक शास्‍त्र और वास्तु शास्त्र जैसे विषयों पर अपनी विशेषज्ञता के लिए जानी जाती हैं। उन्होंने मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन और सिम्बॉयसिस इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी से क्रिएटिव राइटिंग की पढ़ाई की है. बतौर फोटो जर्नलिस्ट करियर शुरू करने वाली श्रद्धा ने दूरदर्शन, दैनिक भास्कर और चौथी दुनिया जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दी हैं.12 वर्षों की फील्ड रिपोर्टिंग के दौरान राजनीति और सामाजिक मुद्दों पर गहरी पकड़ बनाने के बाद, उन्होंने डिजिटल मीडिया की ओर रुख किया और देश 24*7 जैसे पोर्टल्स में नेतृत्व की भूमिका निभाई. वर्तमान में धर्म, ज्योतिष, वास्तु और हस्तरेखा जैसे विषयों पर गहन अध्ययन और लेखन करते हुए जटिल विषयों को सरल और रोचक भाषा में पाठकों के सामने पेश कर रही हैं.
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मां-पिता बनना, फिर अपने बच्‍चे का सुंदर और अर्थपूण नाम चुनना पैरेंट्स के लिए बहुत खास होता है. इस‍के लिए भारतीय परंपरा में विधिवत नामकरण संस्‍कार होता है. जिसमें भगवान की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है ताकि बच्‍चे को भगवान का आशीर्वाद मिले. फिर ज्‍योतिषीय तरीके से अपनी पसंद के अनुसार बच्‍चे का नाम रखा जाता है. हालांकि नामकरण संस्‍कार की रस्‍में अलग-अलग जगहों और परिवारों में भिन्‍न होती हैं. फिर भी कुछ बातें कॉमन हैं. आज हम देश-विदेश के जाने-माने ज्‍योतिषाचार्य पंडित अजय भाम्‍बी से जानते हैं नामकरण संस्‍कार की सही विधि और जरूरी बातें.

नामकरण संस्‍कार का मकसद

नामकरण संस्कार षोडश संस्कारों में एक अत्यंत महत्वपूर्ण संस्कार है. इस संस्कार का मूल भाव है नवजात शिशु का परिवार और समाज में विधिवत स्वागत करना और उसके उज्ज्वल, स्वस्थ और संस्कार पूर्ण जीवन के लिए मंगल संकल्प करना. अलग-अलग परंपराओं में नामकरण के समय को लेकर कुछ भिन्न मत मिलते हैं.

बच्‍चे का नामकरण कब किया जाता है?  

आमतौर पर जन्म के 10वें, 11वें या 12वें दिन नामकरण की परंपरा रही है. कुछ परंपराओं में शिशु और माता की स्थिति, परिवार की परंपरा तथा शुद्धि-अवधि को देखते हुए बाद में भी नामकरण किया जाता है.

नाम निर्धारित करने की ज्योतिषीय परंपरा

ज्‍योतिषाचार्य अजय भाम्‍बी के अनुसार, भारतीय परंपरा में नामकरण बच्‍चे के जन्म नक्षत्र और उसके चरण पर आधारित है. इसके साथ-साथ बच्‍चे के नाम का अर्थ, उच्चारण, पारिवारिक परंपरा आदि का भी जरूर ध्यान रखना चाहिए. जानिए नामकरण की विधि.

- नामकरण के दिन सबसे पहले घर और पूजा-स्थान को स्वच्छ और शुद्ध करें. पूजा में शिशु को स्‍नान करवाकर, उसे साफ कपड़े पहनाकर माता-पिता की गोद में बैठाएं.

- आचार्य या पुरोहित मंत्रोच्चार के साथ शिशु के मंगलमय जीवन की कामना करें और पूजा करें. फिर निर्धारित नाम को परिवार के सामने प्रकट किया जाता है.

- इसके बाद परिजन, रिश्‍तेदार, करीबी लोग बच्चे को आशीर्वाद देते हैं और उसके दीर्घायु, आरोग्य, यश, बुद्धि और सुखी जीवन की कामना करते हैं.

बेबी का नाम चुनने में रखें सावधानी  

- बच्‍चे का नाम अर्थपूर्ण हो क्‍योंकि नाम का व्‍यक्ति की पर्सनालिटी पर प्रभाव पड़ता है. नाम का शाब्दिक और सांस्‍कृतिक अर्थ समझ लें.

- बच्‍चे के लिए नाम चुनते समय उसका उच्‍चारण भी देखें. ऐसा न हो कि लोग कठिन उच्‍चारण न कर पाएं और गलत नाम पुकारें.

- नाम ऐसा हो जो सकारात्‍मक हो.

- परिवार में यदि देवी-देवता के नाम पर नाम रखने की परंपरा है तो उसका ध्‍यान रखें.  

- सिर्फ ट्रेंड को देखकर नाम न रखें. वरना कुछ साल बाद वह नाम असहज या अर्थहीन लगने लगे.

(Disclaimer: नामकरण और ज्योतिष से जुड़े नियम अलग-अलग परंपराओं और मान्यताओं में भिन्न हो सकते हैं. यहां दी गई जानकारी धार्मिक एवं ज्योतिषीय मान्यताओं पर आधारित है. इसे व्यक्तिगत जीवन के लिए निश्चित भविष्यवाणी या वैज्ञानिक तथ्य न मानें.)

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