गर्म चिताएं.. बढ़ता शिवलिंग , यहां शिव जी कान में फूंकते हैं तारक मंत्र, ये हैं अविनाशी काशी के 5 अद्भुत रहस्य
Mysteries of Kashi: काशी के 5 अद्भुत रहस्य जो किसी को भी चौंका सकते हैं, ऐसे रहस्य जो काशी को दुनिया के अन्य सभी शहरों से अलग बनाते हैं, इन्हीं के बारे में हम इस लेख में विस्तार से जानेंगे.
Varanasi Ke Rahasya In Hindi: काशी केवल एक शहर नहीं है बल्कि यहां रहस्यों का छाल फैला हुआ है. अध्यात्म और अद्भुत रहस्यों को अपने भीतर समाए हुए काशी जैसा दुनिया में दूसरा कोई शहर नहीं. यहां चिताएं कभी ठंडी नहीं पड़ती हैं, गंगा तट पर बसा यह पावन शिव धाम अविनाशी है. इतना ही नहीं यहां का ज्योतिर्लिंग अपने जैसे एक मात्र है. मुक्ति की राह दिखाने वाली इस नगरी से जुड़े वो कौन से अद्भुत रहस्य और मान्यताएं हैं जो इसे अद्वितीय बनाती हैं, जिनके बारे में जानकर कोई भी हैरान हो सकता है. आइए इस बारे में विस्तार से जानें.
कभी ठंडी नहीं पड़ने वाली मणिकर्णिका का रहस्य
हिंदू पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, काशी के मणिकर्णिका घाट पर जो अखंड चिता की अग्नि सदियों से जल रही है वो अति पवित्र और कभी न बुझने वाली मानी जाती है. धार्मिक मान्यता है कि श्मशानवासी शिव जी यहां पर मृत्यु का शोक नहीं करते हैं बल्कि मोक्ष का उत्सव मनाते हैं. मान्यताओं के अनुसार मणिकर्णिका घाट पर जिसका भी अंतिम संस्कार किया जाता है उसे सीधे मोक्ष की प्राप्ति होती है. 24 घंटे लगातार इस घाट पर शवों का दाह संस्कार होता ही रहता है. जिसके कारण यहां चिता की आग कभी बुझती ही नहीं. आश्चर्य की बात ये है ऐसा सदियों से चला आ रहा है.
मोक्ष देने वाले तारक मंत्र का रहस्य
तारक मंत्र को लेकर कई धार्मिक परंपराओं में अलग मान्यताएं और व्याख्याएं मिलती हैं. काशी की लोक और धार्मिक मान्यताओं में तारक मंत्र को अक्सर 'राम नाम' से जोड़ा जाता है. 'तारक' यानी संसार रूपी भवसागर से तारने वाला या पार लगाने वाला. कुछ धार्मिक परंपराओं में तारक मंत्र अलग-अलग भी हो सकते हैं. जहां तक काशी की बात है तो लोग यहां पर अपने जीवन की अंतिम यात्रा और दाह संस्कार करवाने के लिए इस इच्छा से आते हैं क्योंकि काशी में प्राण त्यागने वाले को जीवनचक्र से मुक्ति मिलती है. धार्मिक मान्यता है कि काशी में जीव की मृत्यु के समय उसके कान में भगवान शिव स्वयं तारक मंत्र फूंकते हैं और मोक्ष दिलाते हैं.
तिलभांडेश्वर महादेव का रहस्य
काशी की गलियों में तिलभांडेश्वर महादेव का एक ऐसा रहस्यमयी मंदिर है जो किसी को भी हैरान कर देता है. इस मंदिर में स्वयंभू शिवलिंग है जो हर साल मकर संक्रांति पर तिल के बराबर बढ़ता जा रहा है. शिवलिंग कितने हजार साल पुराना है इसकी जानकारी किसी को नहीं है. हालांकि, धार्मिक मान्यता है कि जिस दिन यह शिवलिंग पूरे आकार में आएगा, उसी दिन कलियुग का अंत हो जाएगा.
त्रिशूल पर टिकी अविनाशी काशी और प्रलय का रहस्य
धार्मिक मान्यताओं और शिव पुराण की मानें तो भगवान शिव के त्रिशूल की नोक पर यह पूरी अविनाशी काशी टिकी है और प्रलय के समय भी इसे कोई हानि नहीं होती है. काशी को 'अविमुक्त' कहते हैं यानी भगवान शिव काशी को कभी नहीं छोड़ते हैं. ध्यान दें, कई आक्रमणकारियों और शासकों ने काशी को चोट पहुंचाई, काशी विश्वनाथ मंदिर को तोड़ने का प्रयास किया लेकिन यह नगरी हर बार एक नई ऊर्जा और अस्मिता के साथ उठ खड़ी हुई. त्रिशूल पर टिकी काशी और प्रलय के बीच का यह रहस्यी अनुबंध हर किसी को हैरान करता है.
काशी विश्वनाथ मंदिर के ज्योतिर्लिंग का रहस्य क्या हैं?
शिव और शक्ति का अद्वितीय संयोजन काशी विश्वनाथ मंदिर में देखने को मिलता है. काशी विश्वनाथ ज्योतिर्लिंग का स्वरूप दो भागों में बंटा है. दाहिनी ओर मां शक्ति हैं और बाईं ओर शिव जी का वास है. यह संयोजन शिव और शक्ति की एकात्मकता का प्रतीक है जो काशी विश्वनाथ के ज्योतिर्लिंग को संसार के किसी और ज्योतिर्लिंग से अगल करता है. यहां शिव और शक्ति के मिलन से आत्मा शांत होकर मोक्ष की ओर बढ़ती है. यह ज्योतिर्लिंग स्वयंभू है जिसे लेकर धार्मिक मान्यताएं हैं कि यह प्रकाश का एक अनंत स्तंभ हुआ करता है. यह दुर्लभ संयोग हैं.
Disclaimer: यह लेख धार्मिक मान्यताओं, लोक कथाओं और जनश्रुतियों पर आधारित है, वैज्ञानिक प्रमाण की पुष्टि नहीं करता।