माता चंडिका का रहस्य: जब शुंभ-निशुंभ के अंत के लिए देवी ने धारण किया ये उग्र रूप, जानिए प्रसिद्ध मंदिरों का इतिहास
हिंदू धर्म में मां चंडिका को शक्ति का रूप माना जाता है. इस खबर में चंड-मुंड वध की पौराणिक कथा, हरिद्वार स्थित चंडी देवी मंदिर के इतिहास के बारे में डिटेल से बताएंगे.
अगर आपसे पुछा जाए कि देवी दुर्गा का सबसे उग्र रूप कौन-सा है तो सबके मन में एक ही नाम आएगा, और वो चंडिका देवी हैं.
चंडिका देवी को दुष्टों का नाश करने के लिए जाना जाता है. लेकिन अपने भक्तों के लिए उनके मन में हमेशा अथाह प्रेम रहता है.
अपने भक्तों को वो हमेशा आशीर्वाद देती हैं. अब सवाल आता है कि उनका ये नाम क्यों पड़ा तो, देवी चंडी ने चंड और मुंड नामक दो शक्तिशाली राक्षसों का वध किया था.
जिसके वजह से उन्हें चंडी या चंडिका कहकर बुलाया जाने लगा.
माता चंडिका और असुरों के वध की पौराणिक कथा
शुंभ और निशुंभ नाम के दो राक्षस थे. उन्हें अपनी ताकत पर बहुत घमंड हो गया था. अपने घमंड में चूर होकर उन्होंने भगवान इंद्र से उनका स्वर्ग छीन लिया.
जिसके बाद भगवान इंद्र सहायता के लिए मां पार्वती के पास गए. फिर क्या था, देवी पार्वती ने चंडिका देवी का रूप धारण किया.
उनमें से एक राक्षस शुंभ देवी की अद्भुत खूबसूरती पर मोहित हो गया. जिसके बाद उसने देवी से शादी करने का प्रस्ताव रखा.
लेकिन देवी ने उसके प्रस्ताव तुरंत ठुकरा दिया. इसके बाद राक्षस शुंभ ने अपने दो खास सेनापतियों चंड और मुंड को युद्ध के लिए भेजा.
देवी चंडिका ने उन दोनों को मार दिया, जिसके बाद शुंभ और निशुंभ भी देवी के हाथों मारे गए.
हरिद्वार के नील पर्वत पर स्थित है प्रसिद्ध चंडी देवी मंदिर
उत्तराखंड के हरिद्वार में मां चंडी का बेहद प्रसिद्ध मंदिर स्थित है, जो नील पर्वत के शिखर पर बसा हुआ है. ये स्थान देश के शक्तिपीठों में शामिल माना जाता है.
ऐसा माना जाता है कि इस मंदिर की मूर्ति को महान संत आदि शंकराचार्य ने आठवीं शताब्दी में स्थापित किया था.
देवी चंडी को यहां चंडिका के नाम से पूजा जाता है, जो इस पूरे क्षेत्र और मंदिर की इष्टदेवी भी हैं. इस दरबार में आने वाले हर भक्त की मनोकामनाएं पूरी होती हैं.
मां चंडिका की पूजा से शत्रुओं पर मिलती है विजय
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां चंडिका की सच्चे मन से पूजा-अर्चना करने से शत्रुओं पर आसानी से जीत हासिल की जा सकती है.
इसके अलावा, अगर किसी व्यक्ति को जीवन में किसी बात का अनजाना डर सता रहा है, तो मां का नाम याद भर कर लेने से सारी समस्याएं दूर हो जाती हैं.
देश के अलग-अलग राज्यों में बने हैं चंडी माता के मंदिर
भारत में मां चंडी के कई प्राचीन मंदिर मौजूद हैं, जिनकी अपनी अलग-अलग मान्यताएं और इतिहास हैं.
हरिद्वार के अलावा हरियाणा के पंचकूला, उत्तर प्रदेश के हापुड़, छत्तीसगढ़, ओडिशा के कटक और जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ा में भी मां चंडिका का दिव्य मंदिर बना हुआ है.
इन सभी स्थानों पर दूर-दूर से भक्त दर्शन के लिए पहुंचते हैं. नवरात्रि के पावन अवसरों पर इन मंदिरों में भक्तों की भारी भीड़ देखने को मिलती है.
(Disclaimer): इस लेख में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं, पौराणिक कथाओं और सामान्य जानकारियों पर आधारित है.ये भी पढ़ें: घट स्थापना में कलश पर मौली बांधना क्यों है जरूरी? जानिए इसका रहस्य