भाषा चुनें
  • Hindi
  • English
  • Marathi
  • Bengali
  • Tamil
  • Malayalam
  • Gujarati
  • Telugu
  • Kannada
  • Odisha
  • Z Bharat
  • ZEE PHH
  • ZEE Business
  • WION
राज्य चुनें
  • उत्तर प्रदेश
  • उत्तराखण्ड
  • मध्य प्रदेश
  • छत्‍तीसगढ़
  • हरियाणा
  • दिल्ली
  • बिहार
  • झारखण्ड
  • राजस्‍थान
  • हिमाचल प्रदेश
  • हिन्दीEnglishमराठीবাংলাதமிழ்മലയാളംગુજરાતીతెలుగుಕನ್ನಡଓଡ଼ିଶାZ BharatPHHBusinessWION
  • facebookyoutubetwitterlinkedinwhatsapp
Zee News Hindi
App
Zee News Hindi
  • News
  • वीडियो
  • फोटोज़
  • रील्स
  • लाइव ब्लॉग
  • राज्य चुनें

Add Zee Business As A Preferred Source
App
  • लेटेस्ट न्यूज़
  • देश
  • खेल
  • दुनिया
  • मनोरंजन
  • बिजनेस
  • ओरिजनल
  • टेक
  • धर्म
  • ऑटो
  • एजुकेशन
  • एस्ट्रोलॉजी
  • राशिफल
  • LIVE टीवी
  • लेटेस्ट न्यूज़
  • देश
  • खेल
  • दुनिया
  • मनोरंजन
  • बिजनेस
  • ओरिजनल
  • टेक
  • धर्म
  • ऑटो
  • एजुकेशन
  • एस्ट्रोलॉजी
  • राशिफल
  • ज़ी न्यूज़ हिंदी
  • /धर्म
  • /माता चंडिका का रहस्य: जब शुंभ-निशुंभ के अंत के लिए देवी ने धारण किया ये उग्र रूप, जानिए प्रसिद्ध मंदिरों का इतिहास

माता चंडिका का रहस्य: जब शुंभ-निशुंभ के अंत के लिए देवी ने धारण किया ये उग्र रूप, जानिए प्रसिद्ध मंदिरों का इतिहास

हिंदू धर्म में मां चंडिका को शक्ति का रूप माना जाता है. इस खबर में चंड-मुंड वध की पौराणिक कथा, हरिद्वार स्थित चंडी देवी मंदिर के इतिहास के बारे में डिटेल से बताएंगे.

Written ByHarsh Singh
Published: Oct 15, 2026, 06:35 PM IST|Updated: Oct 15, 2026, 06:42 PM IST
joinshare
माता चंडिका का रहस्य: जब शुंभ-निशुंभ के अंत के लिए देवी ने धारण किया ये उग्र रूप, जानिए प्रसिद्ध मंदिरों का इतिहास

About the Author

    Harsh Singh

    Harsh Singh

    हर्ष सिंह जी न्यूज डिजिटल में एक अनुभवी और धारदार शैली के पत्रकार हैं. उन्होंने मार्च 2024 में जी न्यूज जॉइन किया था. वर्तमान में हर्ष धर्म और ज्योतिष से जुड़ी खबरों की खास कवरेज कर रहे हैं. वे देश-दुनिया के धार्मिक आयोजनों, अध्यात्म और ज्योतिषीय गणनाओं से जुड़े जरूरी अपडेट्स दर्शकों तक पूरी सटीकता के साथ पहुंचाते हैं. हर्ष को उनकी फैक्ट-आधारित और भरोसेमंद लेखन शैली के लिए जाना जाता है.बनारस के महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ से मास कम्युनिकेशन में पोस्ट-ग्रेजुएशन करने वाले हर्ष अपनी पूरी ऊर्जा और समझ के साथ धर्म-कर्म और ऐस्ट्रो की दुनिया के खबरों को सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचा रहे हैं.अगर आप हर्ष सिंह से संपर्क करना चाहते हैं या उनसे जुड़ा कोई सुझाव साझा करना चाहते हैं, तो उन्हें इस ईमेल आईडी पर लिख सकते हैं: Harsh.singh@India.com
    Read More

    ट्रेंडिंग

    • न्यूज़
    • फोटो
    • वीडियो
    चक्रवाती तूफान 'अर्नब' का बिहार पर दिखेगा असर, 28 अक्टूबर से बारिश के आसार, 29 को पूरे राज्य में 'ऑरेंज अलर्ट'

    चक्रवाती तूफान 'अर्नब' का बिहार पर दिखेगा असर, 28 अक्टूबर से बारिश के आसार, 29 को पूरे राज्य में 'ऑरेंज अलर्ट'

    2

    PM मोदी के पिता पर टिप्पणी से गरमाई सियासत: गजेंद्र सिंह शेखावत और अतुल भंसाली ने कांग्रेस को घेरा

    3

    SBI-PNB-HDFC में 16 दिन नहीं होगा काम! चेक करें नवंबर में कब-कब बंद रहेंगे बैंक?

    4

    एटम बम का घमंड धड़ाम: भारत की परमाणु पावर से 'जिन्नालैंड' में हड़कंप; बिलबिला उठे सियासतदान

    5

    BJP vs Congress: 1 नवंबर को कांग्रेस की रैली के जवाब में बीजेपी करेगी पदयात्रा

    logo
    • contact us
    • privacy policy
    • legal
    • investor info
    • advertise with us
    © 1998-2026 Indiadotcom Digital Private Limited, All Rights Reserved.

    अगर आपसे पुछा जाए कि देवी दुर्गा का सबसे उग्र रूप कौन-सा है तो सबके मन में एक ही नाम आएगा, और वो चंडिका देवी हैं.

    चंडिका देवी को दुष्टों का नाश करने के लिए जाना जाता है. लेकिन अपने भक्तों के लिए उनके मन में हमेशा अथाह प्रेम रहता है.

    अपने भक्तों को वो हमेशा आशीर्वाद देती हैं. अब सवाल आता है कि उनका ये नाम क्यों पड़ा तो, देवी चंडी ने चंड और मुंड नामक दो शक्तिशाली राक्षसों का वध किया था.

    जिसके वजह से उन्हें चंडी या चंडिका कहकर बुलाया जाने लगा.

    माता चंडिका और असुरों के वध की पौराणिक कथा

    शुंभ और निशुंभ नाम के दो राक्षस थे. उन्हें अपनी ताकत पर बहुत घमंड हो गया था. अपने घमंड में चूर होकर उन्होंने भगवान इंद्र से उनका स्वर्ग छीन लिया.

    जिसके बाद भगवान इंद्र सहायता के लिए मां पार्वती के पास गए. फिर क्या था, देवी पार्वती ने चंडिका देवी का रूप धारण किया.

    उनमें से एक राक्षस शुंभ देवी की अद्भुत खूबसूरती पर मोहित हो गया. जिसके बाद उसने देवी से शादी करने का प्रस्ताव रखा.

    लेकिन देवी ने उसके प्रस्ताव तुरंत ठुकरा दिया. इसके बाद राक्षस शुंभ ने अपने दो खास सेनापतियों चंड और मुंड को युद्ध के लिए भेजा.

    देवी चंडिका ने उन दोनों को मार दिया, जिसके बाद शुंभ और निशुंभ भी देवी के हाथों मारे गए.

    हरिद्वार के नील पर्वत पर स्थित है प्रसिद्ध चंडी देवी मंदिर

    उत्तराखंड के हरिद्वार में मां चंडी का बेहद प्रसिद्ध मंदिर स्थित है, जो नील पर्वत के शिखर पर बसा हुआ है. ये स्थान देश के शक्तिपीठों में शामिल माना जाता है.

    ऐसा माना जाता है कि इस मंदिर की मूर्ति को महान संत आदि शंकराचार्य ने आठवीं शताब्दी में स्थापित किया था.

    देवी चंडी को यहां चंडिका के नाम से पूजा जाता है, जो इस पूरे क्षेत्र और मंदिर की इष्टदेवी भी हैं. इस दरबार में आने वाले हर भक्त की मनोकामनाएं पूरी होती हैं.

    मां चंडिका की पूजा से शत्रुओं पर मिलती है विजय

    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां चंडिका की सच्चे मन से पूजा-अर्चना करने से शत्रुओं पर आसानी से जीत हासिल की जा सकती है.

    इसके अलावा, अगर किसी व्यक्ति को जीवन में किसी बात का अनजाना डर सता रहा है, तो मां का नाम याद भर कर लेने से सारी समस्याएं दूर हो जाती हैं.

    देश के अलग-अलग राज्यों में बने हैं चंडी माता के मंदिर

    भारत में मां चंडी के कई प्राचीन मंदिर मौजूद हैं, जिनकी अपनी अलग-अलग मान्यताएं और इतिहास हैं.

    हरिद्वार के अलावा हरियाणा के पंचकूला, उत्तर प्रदेश के हापुड़, छत्तीसगढ़, ओडिशा के कटक और जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ा में भी मां चंडिका का दिव्य मंदिर बना हुआ है.

    इन सभी स्थानों पर दूर-दूर से भक्त दर्शन के लिए पहुंचते हैं. नवरात्रि के पावन अवसरों पर इन मंदिरों में भक्तों की भारी भीड़ देखने को मिलती है.

    (Disclaimer): इस लेख में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं, पौराणिक कथाओं और सामान्य जानकारियों पर आधारित है.ये भी पढ़ें: घट स्थापना में कलश पर मौली बांधना क्यों है जरूरी? जानिए इसका रहस्य
     

    Add Zee News as a Preferred Source
    TAGS:
    Temple