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काशी का गुप्त खजाना: जानिए विश्वनाथ कॉरिडोर के कुंभ महादेव मंदिर का इतिहास, किसने छुपाया था ये शिवधाम?

काशी विश्वनाथ कॉरिडोर को बनाने के दौरान निकला कुंभ महादेव मंदिर अपने कमाल के नक्काशी और इतिहास के लिए जाना जाता है. इस खबर में इस मंदिर के इतिहास और धार्मिक मान्यताओं का बारे में जानेंगे.

काशी का गुप्त खजाना: जानिए विश्वनाथ कॉरिडोर के कुंभ महादेव मंदिर का इतिहास, किसने छुपाया था ये शिवधाम?

हम सभी जानते हैं कि बनारस यानी बाबा विश्वनाथ की नगरी प्राचीन मंदिरों के लिए जानी जाती है. वहां के लोगों का कहना है कि घाट के आस-पास बने सभी घरों में पहले मंदिर हुआ करता था. जहां लोग घर बना कर रहते थे.

कुछ साल पहले जब काशी विश्वनाथ कॉरिडोर का काम शुरू हुआ था. उस समय वहां के घर और आस-पास की चीजें तोड़ी जा रही थी.

अतिक्रमण के दौरान कई ऐसे प्राचीन मंदिर सामने आए जो सालों से दीवारों और घरों के पीछे छिपे हुए थे.

उसी समय वहां एक दीवार तोड़ने पर उसके पीछे एक प्राचीन मंदिर दिखाई दिया. जिसकी नक्काशी देखकर सब दंग रह  गए. दरअसल उस नाम कुंभ महादेव मंदिर है.

ये मंदिर बस अपने नक्काशी ही नहीं, बल्कि धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व के लिए भी जानी जाती है. आज हम इस मंदिर की सारी जानकारी आपको डिटेल से बताएंगे.

क्यों पड़ा इसका नाम कुंभ महादेव?

इस मंदिर का नाम कैसे पड़ा, ये सवाल सभी दर्शन करने वालों के मन में आता है. सब ये जानना चाहते हैं कि आखिर भगवान शिव के इस रूप को कुंभ महादेव क्यों कहा जाता है.

दरअसल इस मंदिर के बाहर और अंदर वाले दिवारों और खंभें पर कलश यानी कुंभ की आकृतियां बनाई गई हैं. जो देखने में बहुत खूबसूरत लगती हैं.

पत्थरों पर उकेरी गई कलश की नक्काशी के कारण ही इस मंदिर का नाम कुंभ महादेव पड़ा था. यही नहीं इस मंदिर को एक और नाम से पुकारा जाता है.

इसका दूसरा नाम समुद्र मंथन मंदिर है. इसके पीछे भी एक कारण है, दरअसल इसकी पश्चिमी दीवार पर समुद्र मंथन के अलौकिक दृश्य को बेहद बारीकी से उकेरा गया है. जिसके वजह से इस मंदिर को इस नाम से भी बुलाया जाता है.

कितना पुराना है ये धाम?

अब सबके मन में सवाल ये आता है कि ये मंदिर कितना पुराना है. तो मंदिर के बाहर लगे सरकारी सूचना बोर्ड की माने तो ये 500  साल से भी पुराना है.

इतिहासकार और पुरातत्वविद इसकी सुंदर और भव्य बनावट को देखकर अलग-अलग समय से इसे जोड़कर देखते हैं.

इसके चारों ओर दिवार होने का भी कारण था. दरअसल जब मुगल काल में जब विदेशी आक्रांताओं द्वारा काशी के मंदिरों को तोड़ा जा रहा था, तब वहां के लोग और संतों ने इस पवित्र शिवधाम को बचाने के लिए इसके चारों ओर पक्की दीवारें चुन दी थीं.

इसी वजह से ये मंदिर सदियों तक घनी आबादी वाले मकानों के बीच छिपा रहा और पूरी तरह सुरक्षित बचा रहा.  

पत्थरों पर उकेरी गई शिव बारात

कुंभ महादेव मंदिर की सबसे बड़ी खासियत इसकी अद्भुत और मनमोहक नक्काशी है. मंदिर की बाहरी दीवारों पर भगवान शिव की भव्य बारात का पूरा झांकी दृश्य पत्थरों पर कमाल का दिखता है.

इसके अलावा दीवारों पर श्रीकृष्ण की रासलीला, गोवध निवारण, ब्रह्मा जी का विष्णु जी की नाभि से प्रकट होना और कुबेर देव का ऐरावत पर विराजमान होना दर्शाया गया है.

मंदिर के मंडप की छतों और खंभों पर योगिनियों, गरुड़, हनुमान जी और कार्तिकेय की ऐसी आकृतियां हैं जिन्हें देखकर हर कोई हैरान रह जाता है.  

गर्भगृह में विराजते हैं बाबा

मंदिर के गर्भगृह के केंद्र में एक बहुत ही दिव्य और सुंदर शिवलिंग स्थापित है, जिसके ठीक सामने नंदी महाराज विराजमान हैं.

गर्भगृह की दीवारों पर केवल शिव ही नहीं, बल्कि सनातन धर्म के प्रमुख देवी-देवताओं का वास है. बाईं तरफ भगवान गणेश और दाईं तरफ माता दुर्गा की मूर्ती बनी हैं.

वहीं दक्षिणी दीवार पर माता लक्ष्मी और शिव-पार्वती की मूर्तियां हैं. पूर्वी दीवार पर भगवान सूर्य अपने रथ पर सवार दिखते हैं और साथ में लक्ष्मी-नारायण का पावन रूप उकेरा गया है.  

धार्मिक महत्व और मान्यताएं  

काशी में कुंभ महादेव मंदिर के दर्शन का बहुत महत्व माना जाता है. श्रद्धालुओं का मानना है कि यहां शिव के साथ-साथ त्रिदेव और सभी 33 कोटि देवी-देवताओं का आशीर्वाद एक साथ प्राप्त हो जाता है.

ऐसा माना जाता है कि जो भी भक्त सच्चे मन से मणिकर्णिका की ओर मुख किए इस पावन धाम में शिवलिंग पर जल चढ़ाता है, उसके जीवन से सभी भय, ग्रह दोष और बीमारियां हमेशा के लिए समाप्त हो जाती हैं.

अब काशी विश्वनाथ कॉरिडोर का हिस्सा बनने के बाद भक्त से इस प्राचीन मंदिर के दर्शन कर पा रहे हैं.

(Disclaimer): यह लेख काशी विश्वनाथ कॉरिडोर के पुरातात्विक सर्वेक्षणों, ऐतिहासिक शोध, आधिकारिक सूचना बोर्ड और प्रचलित धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है.

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Harsh Singh

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हर्ष सिंह जी न्यूज डिजिटल में एक अनुभवी और धारदार शैली के पत्रकार हैं. उन्होंने मार्च 2024 में जी न्यूज जॉइन किया था. वर्तमान में हर्ष धर्म और ज्योतिष से जुड़ी खबरों की खास कवरेज कर रहे हैं. वे देश-दुनिया के धार्मिक आयोजनों, अध्यात्म और ज्योतिषीय गणनाओं से जुड़े जरूरी अपडेट्स दर्शकों तक पूरी सटीकता के साथ पहुंचाते हैं. हर्ष को उनकी फैक्ट-आधारित और भरोसेमंद लेखन शैली के लिए जाना जाता है.बनारस के महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ से मास कम्युनिकेशन में पोस्ट-ग्रेजुएशन करने वाले हर्ष अपनी पूरी ऊर्जा और समझ के साथ धर्म-कर्म और ऐस्ट्रो की दुनिया के खबरों को सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचा रहे हैं.अगर आप हर्ष सिंह से संपर्क करना चाहते हैं या उनसे जुड़ा कोई सुझाव साझा करना चाहते हैं, तो उन्हें इस ईमेल आईडी पर लिख सकते हैं: Harsh.singh@India.com
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