कर्नाटक का दुर्गा परमेश्वरी मंदिर: नदी के बीचों बीच स्थित है माता का ये पवित्र धाम, जानें इसकी पौराणिक कथा
कर्नाटक के मंगलुरु में नंदिनी नदी के बीच स्थित कतील दुर्गा परमेश्वरी मंदिर अपनी अनूठी पौराणिक कथाओं और सुंदरता के लिए प्रसिद्ध है. इस खबर में इस मंदिर का इतिहास और यात्रा की जानकारी देंगे.
हमारे देश भर में हजारों मंदिर हैं. जो अपने-अपने कहानियों और चमत्कारों के लिए जाने जाते हैं. ऐसा ही एक मंदिर कर्नाटक में भी है.
दरअसल ये मंदिर एक नदी के बीच में स्थित है. जो इस जगह के भव्यता को बढ़ाने का काम करती है.
मंदिर का नाम कटील दुर्गा परमेश्वरी मंदिर है. ये नंदनी नदी के एक छोटे से द्वीप पर बसा हुआ है. इस मंदिर के बनने के पीछे भी एक कहानी है.
कहां स्थित है ये पवित्र मंदिर और इसका खूबसूरत नजारा
ये मंदिर मंगलुरू में स्थित है. जिस द्विप पर ये मंदिर बसा है वो दूर से देखने में बहुत खूबसूरत लगता है.
मंदिर के चारों ओर सुंदर हरियाली फैली हुई है. यहां जाने वाले यात्रियों के मन को बहुत शांति मिलती है.
यहां हर साल नवरात्र में बहुत भीड़ लगती है. अगर आप वहां जानें का प्लान बना रहे हैं तो ये समय सबसे बेस्ट है.
राक्षस अरुणासुर और देवी दुर्गा की कहानी
इस पुराने कटील मंदिर का संबंध राक्षस अरुणासुर से जुड़ा हुआ है. कथा के मुताबिक ये राक्षस बहुत ताकतवर था.
उसके अंदर बहुत अहंकार था. उसने देवताओं और इंसानों को बहुत परेशान कर दिया था. सभी देवताओं ने मां दुर्गा से मदद मांगी.
तब माता ने एक सुंदर स्त्री का रूप लिया और पृथ्वी पर अवतार लिया. जिसके बाद दोनों का युद्ध हुआ जिसमें अरुणासुर की मौत हो गई.
अब आप सोचेंगे कि मंदिर का इससे क्या कनेक्शन है तो, जहां पर उस राक्षस को मारा गया था, वहीं मंदिर को बनवाया गया था.
ऋषि जाबाली का यज्ञ और नंदिनी नदी के श्राप की कथा
यहां से जुड़ी हुई एक और कहानी है. बहुत समय पहले पृथ्वी पर सुखा पड़ गया था. न तो नदी में पानी था न तो कुएं में.
अब इस समस्या को दूर करने के लिए ऋषि जाबाली ने एक यज्ञ करने का फैसला लिया. अब उन्हें यज्ञ को पूरा करने के लिए कामधेनु गाय की जरूरत थी.
वो स्वर्ग गए और देवराज इंद्र से कामधेनु गाय की मांग की. लेकिन उन्होंने मना कर दिया.
तो फिर उन्होंने कामधेनु के बेटी नंदनी को धरती पर भेजने को कहा. लेकिन नंदनी ने भी मना कर दिया.
गुस्से में आकर ऋषि ने उन्हें श्राप दे दिया. कहा की वो अब सदैव नदी के रूप में बहेंगी. अब इस श्राप से बचने के लिए नंदनी ने तपस्या की.
मां दुर्गा उनके तपस्या से खुश होकर उन्हें आशीर्वाद दिया कि वो धारा के बीच में जरूर एक बार प्रकट होंगी.
नवरात्रि के पावन दिनों में लगता है भव्य मेला
नवरात्र के समय में वहां हर साल बहुत भीड़ लगता है. वहां का नजारा देखने लायक होता है.
वहां सिर्फ कर्नाटक के लोग ही नहीं आते, बल्कि वहां आस-पास के कई प्रदेश के लोग त्योहार मनाने आते हैं.
आप अगर घूमने का प्लान बना रहे हैं तो आप यहां अभी जानें का प्लान बना सकते हैं.
कैसे आसानी से पहुंच सकते हैं कटील मंदिर?
सबसे पहले आपको मंगलुरु जाना होगा. रेलवे स्टेशन से ये मंदिर लगभग 20 किलोमीटर दूर होगा. वहां आप किसी कार या टेक्सी से आसानी से पहुंच सकते हैं.
सड़क अच्छा बना हुआ है. तो आपको कई समस्या नहीं होगी. नदी के बीच इस मंदिर में आप नाव के जरिए जा सकते हैं.
(Disclaimer): इस लेख में दी गई जानकारी धार्मिक ग्रंथों, पौराणिक कथाओं और यात्रा रिपोर्ट्स पर आधारित है.
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