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कर्नाटक का दुर्गा परमेश्वरी मंदिर: नदी के बीचों बीच स्थित है माता का ये पवित्र धाम, जानें इसकी पौराणिक कथा

कर्नाटक के मंगलुरु में नंदिनी नदी के बीच स्थित कतील दुर्गा परमेश्वरी मंदिर अपनी अनूठी पौराणिक कथाओं और सुंदरता के लिए प्रसिद्ध है. इस खबर में इस मंदिर का इतिहास और यात्रा की जानकारी देंगे.

Written By Harsh Singh
Published: Oct 19, 2026, 07:27 PM IST | Updated: Oct 19, 2026, 07:41 PM IST
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हमारे देश भर में हजारों मंदिर हैं. जो अपने-अपने कहानियों और चमत्कारों के लिए जाने जाते हैं. ऐसा ही एक मंदिर कर्नाटक में भी है.

दरअसल ये मंदिर एक नदी के बीच में स्थित है. जो इस जगह के भव्यता को बढ़ाने का काम करती है.

मंदिर का नाम कटील दुर्गा परमेश्वरी मंदिर है. ये नंदनी नदी के एक छोटे से द्वीप पर बसा हुआ है. इस मंदिर के बनने के पीछे भी एक कहानी है.

कहां स्थित है ये पवित्र मंदिर और इसका खूबसूरत नजारा

ये मंदिर मंगलुरू में स्थित है. जिस द्विप पर ये मंदिर बसा है वो दूर से देखने में बहुत खूबसूरत लगता है.

मंदिर के चारों ओर सुंदर हरियाली फैली हुई है. यहां जाने वाले यात्रियों के मन को बहुत शांति मिलती है.

यहां हर साल नवरात्र में बहुत भीड़ लगती है. अगर आप वहां जानें का प्लान बना रहे हैं तो ये समय सबसे बेस्ट है.

राक्षस अरुणासुर और देवी दुर्गा की कहानी

इस पुराने कटील मंदिर का संबंध राक्षस अरुणासुर से जुड़ा हुआ है. कथा के मुताबिक ये राक्षस बहुत ताकतवर था.

उसके अंदर बहुत अहंकार था. उसने देवताओं और इंसानों को बहुत परेशान कर दिया था. सभी देवताओं ने मां दुर्गा से मदद मांगी.

तब माता ने एक सुंदर स्त्री का रूप लिया और पृथ्वी पर अवतार लिया. जिसके बाद दोनों का युद्ध हुआ जिसमें अरुणासुर की मौत हो गई.

अब आप सोचेंगे कि मंदिर का इससे क्या कनेक्शन है तो, जहां पर उस राक्षस को मारा गया था, वहीं मंदिर को बनवाया गया था.

ऋषि जाबाली का यज्ञ और नंदिनी नदी के श्राप की कथा

यहां से जुड़ी हुई एक और कहानी है. बहुत समय पहले पृथ्वी पर सुखा पड़ गया था. न तो नदी में पानी था न तो कुएं में.

अब इस समस्या को दूर करने के लिए ऋषि जाबाली ने एक यज्ञ करने का फैसला लिया. अब उन्हें यज्ञ को पूरा करने के लिए कामधेनु गाय की जरूरत थी.

वो स्वर्ग गए और देवराज इंद्र से कामधेनु गाय की मांग की. लेकिन उन्होंने मना कर दिया.

तो फिर उन्होंने कामधेनु के बेटी नंदनी को धरती पर भेजने को कहा. लेकिन नंदनी ने भी मना कर दिया.

गुस्से में आकर ऋषि ने उन्हें श्राप दे दिया. कहा की वो अब सदैव नदी के रूप में बहेंगी. अब इस श्राप से बचने के लिए नंदनी ने तपस्या की.

मां दुर्गा उनके तपस्या से खुश होकर उन्हें आशीर्वाद दिया कि वो धारा के बीच में जरूर एक बार प्रकट होंगी.

नवरात्रि के पावन दिनों में लगता है भव्य मेला

नवरात्र के समय में वहां हर साल बहुत भीड़ लगता है. वहां का नजारा देखने लायक होता है.

वहां सिर्फ कर्नाटक के लोग ही नहीं आते, बल्कि वहां आस-पास के कई प्रदेश के लोग त्योहार मनाने आते हैं.

आप अगर घूमने का प्लान बना रहे हैं तो आप यहां अभी जानें का प्लान बना  सकते हैं.

कैसे आसानी से पहुंच सकते हैं कटील मंदिर?

सबसे पहले आपको मंगलुरु जाना होगा. रेलवे स्टेशन से ये मंदिर लगभग 20 किलोमीटर दूर होगा. वहां आप किसी कार या टेक्सी से आसानी से पहुंच सकते हैं.

सड़क अच्छा बना हुआ है. तो आपको कई समस्या नहीं होगी. नदी के बीच इस मंदिर में आप नाव के जरिए जा सकते हैं. 

(Disclaimer): इस लेख में दी गई जानकारी धार्मिक ग्रंथों, पौराणिक कथाओं और यात्रा रिपोर्ट्स पर आधारित है.

ये भी पढ़ें: घट स्थापना में कलश पर मौली बांधना क्यों है जरूरी? जानिए इसका रहस्य
 

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About the Author

हर्ष सिंह जी न्यूज डिजिटल में एक अनुभवी और धारदार शैली के पत्रकार हैं. उन्होंने मार्च 2024 में जी न्यूज जॉइन किया था. वर्तमान में हर्ष धर्म और ज्योतिष से जुड़ी खबरों की खास कवरेज कर रहे हैं. वे देश-दुनिया के धार्मिक आयोजनों, अध्यात्म और ज्योतिषीय गणनाओं से जुड़े जरूरी अपडेट्स दर्शकों तक पूरी सटीकता के साथ पहुंचाते हैं. हर्ष को उनकी फैक्ट-आधारित और भरोसेमंद लेखन शैली के लिए जाना जाता है.बनारस के महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ से मास कम्युनिकेशन में पोस्ट-ग्रेजुएशन करने वाले हर्ष अपनी पूरी ऊर्जा और समझ के साथ धर्म-कर्म और ऐस्ट्रो की दुनिया के खबरों को सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचा रहे हैं.अगर आप हर्ष सिंह से संपर्क करना चाहते हैं या उनसे जुड़ा कोई सुझाव साझा करना चाहते हैं, तो उन्हें इस ईमेल आईडी पर लिख सकते हैं: Harsh.singh@India.com
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