नवरात्रि में काशी के इन चमत्कारी मंदिरों में उमड़ती है भारी भीड़, बंदी देवी से लेकर कौड़ी देवी तक; जानिए पूरी डिटेल
आज हम इस खबर में काशी के फेमस मंदिरों के बारे में आपको बताएंगे जो नवरात्र में दर्शन के लिए सबसे बेस्ट और वहां जानें से मनोकामनाएं पूरी होती हैं.
नवरात्रि का समय चल रहा है, जिसमें लोग अलग-अलग मंदिर दर्शन करने जाते हैं. जैसा कि हम जानते हैं कि काशी में कई ऐसे प्राचीन देवी मंदिर हैं जहां हम जाकर दर्शन करें तो हमारी मनोकामनाएं पूरी हो जाएंगी.
आज हम ऐसे कुछ मंदिरों के बारे में बातएंगे जो अपने चमत्कारों के लिए जाने जाते हैं. ये मंदिर सोकड़ों साल पुराने हैं.
इनका जिक्र काशी के मंदिरों पर आधारित प्रामाणिक ग्रंथ काशी खंडोक्त में भी मिलता है. इन मंदिरों का दर्शन करने लोग दूर-दूर से चले आते हैं.
त्रेतायुग से जुड़ा है दशाश्वमेध घाट की बंदी देवी का इतिहास
बनारस के दशाश्वमेध घाट के बारे में आप सभी ने सुना ही होगा. यहां रोज लाखों लोग गंगा आरती देखने आते हैं.
वहीं पर पास में एक मंदिर स्थित है जहां मां बुंदी देवी को पूजा जाता है. इनको कारागार की देवी भी कहा जाता है.
वहां के लोगों का मानना है कि बंदी देवी पाताल लोक की देवी हैं. पौराणिक कथाओं में ये जानकारी मिलती है कि जब त्रेतायुग में जब अहिरावण ने भगवान राम को बंधक बना लिया था.
तब प्रभु श्रीराम ने इसी देवी का ध्यान करके बंधन से मुक्ति के लिए मदद मांगी थी. भगवान की प्राथना सुनकर देवी ने खुश होकर उन्हें कैद से मुक्त होने का आशीर्वाद दिया था.
माना जाता है कि वहां जो भी 41 दिनों तक लगातार दर्शन करने जाता है, उसे किसी भी तरह के बंधनों और झूठे मुकदमों से मुक्ति मिल जाती है.
ताला-चाबी चढ़ाने से दूर होते हैं सभी बंधन और परेशानियां
इस मंदिर में एक और बहुत बड़ी मान्यता है. यहां आने वाले भक्त पूरी श्रद्धा के साथ देवी के दरबार में माला-फूल के साथ-साथ ताला और चाबी भी चढ़ाते हैं.
ऐसी अटूट मान्यता है कि जो भक्त यहां ताला-चाबी चढ़ाता है, बंदी देवी उसके जीवन के सभी संकटों और बंधनों को दूर कर देती हैं.
यहां तक कि जेल की सलाखों के पीछे बंद लोगों के परिजनों द्वारा भी यहां मन्नतें मांगने की परंपरा है.
यही वजह है कि नवरात्र के दिनों में इस मंदिर में भक्तों की भारी भीड़ देखने को मिलती है और हर कोई माता के दरबार में अपनी अर्जी लगाने पहुंचता है.
नवाबगंज इलाके में स्थित है कौड़ी देवी का पावन धाम
काशी में स्थित कौड़ी देवी का प्राचीन मंदिर भी भक्तों के बीच गहरी आस्था का केंद्र है. ये मंदिर शहर के नवाबगंज इलाके में बेहद श्रद्धा के साथ स्थित है.
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, कौड़ी देवी को स्वयं बाबा विश्वनाथ की बहन माना जाता है.
दक्षिण भारत के श्रद्धालुओं में कौड़ी देवी के प्रति खासी श्रद्धा देखने को मिलती है, और बड़ी संख्या में लोग दक्षिण से यहां दर्शन के लिए आते हैं.
भक्त माता को श्रृंगार का सामान और पांच कौड़ियां अर्पित करते हैं. इनमें से चार कौड़ियां देवी को चढ़ा दी जाती हैं, जबकि पांचवीं कौड़ी प्रसाद के रूप में भक्त को वापस मिलती है, जिसे लोग अपनी तिजोरी में रखते हैं.
51 शक्तिपीठों में शामिल है मीरघाट की विशालाक्षी देवी मंदिर
काशी के मीरघाट पर स्थित विशालाक्षी देवी का यह मंदिर देश के 51 शक्तिपीठों में से एक अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान रखता है.
बाबा विश्वनाथ के धाम के बेहद करीब स्थित इस मंदिर के बारे में मान्यता है कि यहां माता सती का कान का कुंडल गिरा था.
(Disclaimer): यह लेख धार्मिक मान्यताओं, पौराणिक कथाओं और काशी के मंदिरों से जुड़ी पारंपरिक जानकारियों पर आधारित है. इसका उद्देश्य पाठकों तक जानकारी पहुंचाना है.
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