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12 साल में खिलने वाला नीलकुरिंजी फूल से जुड़ा है भगवान कार्तिकेय और वल्ली की प्रेम कहानी, पूर्वजन्म की तपस्या से है इसका संबंध

Neelakurinji Flower Murugan Valli Katha: नीलकुरिंजी फूल 12 साल में एक बार ही खिलता है जिसे दुर्लभ फूलों की श्रेणी में रखा गया है. दक्षिण भारत में इसे प्रेम का प्रतीक माना जाता है. आइए जानें भगवान कार्तिकेय और वल्ली की प्रेम कहानी से इसका क्या संबंध है.

Written By Padma Shree Shubham
Published: Nov 01, 2026, 10:53 AM IST | Updated: Nov 01, 2026, 10:57 AM IST
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केरल की पहाड़ियों पर 12 साल बाद खिलने वाले दुर्लभ और अति सुंदर फूल नीलकुरिंजी केवल एक प्राकृतिक चमत्कार नहीं है बल्कि यह भगवान कार्तिकेय और देवी वल्ली की अमर प्रेम कहानी का एक सुंदर प्रतीक है. नीले-बैंगनी रंग के इस फूल का दक्षिण भारत की वादियों में खिलना सुख-समृद्धि का संकेत माना जाता है. तमिल लोककथा के अनुसार, पूर्वजन्म में वल्ली ने कार्तिकेय को पति रूप में पाने के लिए कठिन तपस्या की. आइए विस्तार से जानें कि भगवान कार्तिकेय और वल्ली की प्रेम कथा से नीलकुरिंजी फूलों का क्या संबंध है और क्यों इस फूल को प्रेम का प्रतीक माना जाता है.

12 साल में क्यों खिलता है नीलकुरिंजी?

केरल, तमिलनाडु और कर्नाटक के कुछ भाग में नीलकुरिंजी के फूल देखे जा सकते हैं. केरल के इडुक्की जिले में स्थित मुन्नार नीलकुरिंजी के फूलों के खिलने का नजारा अद्भुत होता है जिसको देखने के लिए लोग दूर-दूर से आते हैं. प्राकृतिक जीवनचक्र के कारण नीलकुरिंजी फूल के 12 साल में एक बार खिलता है जिसे 'प्लीटीएसियल' या सामूहिक पुष्पन चक्र के रूप में जाना जाता है. ये पौधे कई-कई सालों तक केवल बढ़ते ही रहते हैं. अपने जीवन के 12 वें साल में इसके एक साथ बहुत सारे फूल खिलते हैं. फूल जब खिलते हैं तो इसका पौधा मुरझा जाता है और बीज छोड़ जाते हैं. मिट्टी में बीज तब तक सुप्त स्थिति में होते है जब तक इसका अगला चक्र न शुरू हो जाए. आइए जानें 12 साल में एक बार खिलने वाले इस फूल का भगवान कार्तिकेय और देवी वल्ली की प्रेम कथा से क्या संबंध है.

भगवान कार्तिकेय और वल्ली की प्रेम कहानी

भगवान शिव और माता पार्वती के पुत्र और देवताओं के सेनापति कुमार कार्तिकेय की दो पत्नियां हैं, इंद्र की पुत्री देवसेना और देवी वल्ली. तमिल लोक परंपरा में आदिवासी राजा नंबिराजन की पुत्री देवी वल्ली हैं जिन्हें लेकर धार्मिक मान्यता है कि पूर्वजन्म में देवी वल्ली ने भगवान कार्तिकेय को पति के रूप में प्राप्त करने के लिए कठिन तपस्या की. एक समय ऐसा आया कि भगवान कार्तिकेय ने देवी वल्ली के प्रेम की परीक्षा लेने के सोची और इसके लिए वे धरती पर आए और यहां अलग-अलग रूप धारण कर उनके सामने विवाह का प्रस्ताव रखने लगे.

नीलकुरिंजी फूलों की माला

पहली बार भगवान कार्तिकेय ने शिकारी के रूप में देवी के सामने विवाह का प्रस्ताव रखा.  लेकिन शिकारी का रूप देखकर देव वल्ली डर गई और विवाह करने से मना कर दिया. इसके बाद देवी वल्ली के सामने भगवान कार्तिकेय ने वृद्ध रूप में आकर उनके सामने विवाह का प्रस्ताव रखा जिसे वल्ली ने ठुकरा दिया. जब बात नहीं बनी तो कुमार कार्तिकेय ने अपने भाई गणेशजी से सहायता मांगी. इस बार गणेशजी ने एक जंगली हाथी का रूप धारण किया और देवी वल्ली के सामने आ गए और देखते ही देखते देवी को दूर तक दौड़ा दिया. फिर क्या क्या हाथी से बचकर भागते-भागते देवी वल्ली एक वृद्ध साधु के पास जा पहुंची और अपनी रक्षा के बदले उनसे विवाह करने के प्रस्ताव को मान लिया. वृद्ध साधु कोई और नहीं बल्कि भगवान कार्तिकेय ही थे जो अपने असली स्वरूप में वल्ली को दर्शन दिया. लोक कथा है कि वल्ली को नीलकुरिंजी फूलों का हार पहनाकर ही भगवान कार्तिकेय ने उन्हें अपने विवाह के बंधन में बांधा था. ऐसे में इस फूल को शुभता और सुख का प्रतीक माना जाता है.

12 साल में खिलने वाला हिमालयी ब्रह्म कमल भी अति दुर्लभ

ब्रह्म कमल भी उन अद्भुत और दुर्लभ फूलों में शामिल है जो 12 साल में केवल एक बार ही खिलते हैं. जुलाई-अगस्त के आसपास का समय इनके खिलने का होता है. विशेष बात तो यह है कि यह फूल केवल एक रात के लिए ही पूरी तरह से खिला पाता है. जिसके कारण हिमालयी ब्रह्म कमल का महत्व बढ़ जाता है और इसे देख पाना एक दुर्लभ बात है. इसके कई औषधीय गुण प्रसिद्ध हैं. इस फूल को आध्यात्मिक से भी जोड़ा जाता है. इस फूल को उत्तराखंड का राज्य पुष्प भी कहा गया है. धार्मिक मान्यता के अनुसार ब्रह्मांड के रचयिता भगवान ब्रह्मा इसी ब्रह्म कमल फूल पर विराजमान होते हैं. ध्यान दें दक्षिण भारत में भगवान कार्तिकेय की पूजा भगवान मुरुगन के रूप में की जाती है.

(Disclaimer: यह लेख धार्मिक मान्यताओं, लोककथाओं और इंटरनेट पर उपलब्ध जानकारी पर आधारित है. इसका उद्देश्य केवल जानकारी साझा करना है. किसी भी मान्यता को अंधविश्वास के रूप में न लें, अपने विवेक का प्रयोग करें.)

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About the Author

पद्मा श्री शुभम् को पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 साल का अनुभव. मॉस कम्‍युनिकेशन ग्रेजुएट और हिंदी लिटरेचर से पोस्‍ट ग्रेजुएट. मीडिया में डिजिटल प्लेटफॉर्म से करियर शुरू करने के बाद कई संस्थाओं में काम किया. Nedrick News, TFI Post जैसी संस्थाओं में कार्यरत रहीं. इसके बाद Zee News जॉइन किया. समाचार और वर्तमान घटनाओं पर लिखने पढ़ने में रुचि. धर्म और ज्योतिष में अधिक रुचि. वर्तमान में धर्म और ज्योतिष संबंधी लेख लिखने में कार्यरत. पद्मा से आप padma.shubham@India.com मेल के जरिए सीधे संपर्क कर सकते हैं.
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