Jitiya 2026: जितिया व्रत में माताएं धारण करती हैं जिउतिया धागा, पारण के बाद क्या है इसे उतारने और विसर्जन से जुड़े नियम?
Jitiya Vrat 2026 Jiitiya Dhaga Niyam: जितिया व्रत 2026 के बाद पवित्र जिउतिया धागे को कब उतारना सही होता है और इसे विसर्जित करने के विशेष नियम क्या हैं? आइए इस बारे में विस्तार से जानें.
Jitiya 2026: आश्विन कृष्ण अष्टमी तिथि पर कठिन निर्जला व्रत जितिया का संकल्प लिया जाता है. इस साल यह व्रत 3 अक्टूबर, शनिवार के दिन रखा जाएगा. यह व्रत माताएं अपनी संतान की लंबी उम्र, उनके अच्छे स्वास्थ्य और सुख-समृद्धि की कामना पूर्ति के लिए रखती हैं. भगवान नारायण, जीमूतवाहन और सूर्यदेव की इस दिन विधि-विधान से पूजा कर लाल या पीले रंग का विशेष धागा माताएं गले में धारण करती हैं. इसे जिउतिया धागा कहा जाता है जिसका बड़ा महत्व है. इस धागे को मुख्य रूप से गले में धारण किया जाता है. इसे माता और संतान के बीच के प्रेम के बंधन के रूप में देखा जाता है. धार्मिक मान्यता है कि इस धागे के धारण करने से संतान सुरक्षित रहती है. हालांकि अक्सर इस बात को लेकर मन में प्रश्न रहता है कि व्रत का पारण करने के बाद इस पवित्र जितिया धागे का क्या करें? आइए इस लेख में जानें कि धार्मिक मान्यताओं और लोक-परंपराओं के अनुसार, जितिया धागे से जुड़े नियम क्या हैं.
जितिया धागा कब उतारें?
इस बात का ध्यान रखें कि जितिया का पारण होने के तुरंत बाद धागे को न उतारें. 24 घंटे या कुछ तय दिनों तक इसे जरूर पहनें. आपके परिवार में जो भी परंपरा चली आ रही हो उसके अनुसार ही इसे उतारें.
जितिया धागा उतारने के बाद क्या करें?
विसर्जन कहां करें
जिउतिया धागा उतारने के बाद उसे सम्मान से अपने पास रखें, इस धागे को विसर्जित करने की भी कई जगहों पर परंपरा है. परंपरा अनुसार इसे बहते जल में प्रवाहित करें. अगर आसपास कोई नदी हो या तालाब हो तो धागे को पवित्रा और सम्मान विसर्जित करें.
पवित्र पौधों के पास रखें
अगर पास में पवित्र नदी न हो तो तुलसी के पौधे या पीपल के पेड़ के पास साफ जगह पर इस धागे को रख दें. ऐसा करना भी अति शुभ होगा.
पूजा घर में सुरक्षित रखें
कई घरों में परंपरा होती है कि जिउतिया धागे विसर्जित नहीं करते या त्यागते नहीं है. तो ऐसी स्थिति में इस धागे घर के मंदिर या पूजा स्थल पर पूरे वर्ष के लिए अच्छे से रख दें. इससे घर में सकारात्मक ऊर्जा फैलेगी और संतान की सुरक्षा भी बनी रहेगी.
जितिया धागे से जुड़ीं जरूरी बातें
कूड़ेदान में न फेंकें
जितिया धागे को धार्मिक रूप से पवित्र माना गया है. ऐसे में कभी भी कूड़ेदान या किसी अपवित्र जगह पर इस धागे को न रखें या फेंकें. इसे सम्मानपूर्वक विसर्जित करें या साफ जगह पर ही रखें.
टूटे या गंदे धागे को न पहनें
यदि धागा पहनते-पहनते टूट जाए या गंदा हो जाए तो ऐसी स्थिति में उसे सम्मानपूर्वक उतारें और फिर विसर्जित करें. पुराना या गंदा होने ते बाद भी इस धागे के प्रति सम्मान रखें.
(डिस्क्लेमर- यह सामग्री धार्मिक मान्यताओं, प्रचलित परंपराओं एवं उपलब्ध धार्मिक स्रोतों पर आधारित है. विभिन्न क्षेत्रों, समुदायों और परंपराओं के अनुसार व्रत-त्योहारों की तिथि, पूजा-विधि एवं मान्यताओं में अंतर संभव है. पाठक इसे सामान्य धार्मिक जानकारी के रूप में देखें.)