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अजूबा है जयपुर का ये मंदिर! बप्पा के चरणों में पड़ती है सूर्य की पहली किरण, जानिए 'श्वेत सिद्धिविनायक' का रहस्य

इस खबर में जयपुर के सूरजपोल स्थित श्रीश्वेत सिद्धिविनायक मंदिर के इतिहास के बारे में डिटेल से समझेंगे. साथ ही समझिए कैसे यहां सूर्य की पहली किरण बप्पा के चरण स्पर्श करती है और सिंदूर के बजाय दूध से अभिषेक करने की परंपरा निभाई जाती है.

Written By Harsh Singh
Published: Sep 12, 2026, 01:22 PM IST | Updated: Sep 12, 2026, 01:41 PM IST
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जयपुर को सिर्फ पुरानी इमारतों के लिए ही नहीं, बल्कि यहां के मंदिरों के लिए भी जाना जाता है. इतने सारे मंदिर हैं यहां कि इसे छोटी काशी भी कहा जाता है. गणेश चतुर्थी आते ही यहां हर गणेश मंदिर में उत्सव जैसा माहौल बन जाता है.

जयपुर के सूरजपोल मंडी इलाके में एक मंदिर है जिसका नाम श्रीश्वेत सिद्धिविनायक मंदिर है, ये मंदिर अपनी अलग मान्यताओं की वजह से काफी मशहूर है. करीब ढाई सौ साल पुराना ये मंदिर आज भी लोगों की गहरी आस्था का केंद्र बना हुआ है.

सूरज की पहली किरण से चमक उठता है ये मंदिर

ये मंदिर सफेद संगमरमर से बना है, इसी वजह से इसे श्रीश्वेत सिद्धिविनायक मंदिर कहा जाता है. यहां की सबसे खास बात है गणेश जी की मूर्ति.

सुबह जब सूरज निकलता है, तो पहली किरण सीधे गणपति बाप्पा के पैरों पर पड़ती है. लोग इसे भगवान गणेश का खास आशीर्वाद और चमत्कार मानते हैं. ये नजारा देखने के लिए सुबह-सुबह ही मंदिर में लोगों की लंबी लाइन लग जाती है.

सिंदूर नहीं, दूध और दूब से होती है पूजा

आम तौर पर हर गणेश मंदिर में सिंदूर चढ़ाने का रिवाज होता है. पर इस मंदिर की परंपरा एकदम अलग है. यहां गणेश जी का अभिषेक सिंदूर से नहीं, बल्कि शुद्ध दूध से किया जाता है.

दूध के साथ-साथ बप्पा को दूब घास चढ़ाना भी बहुत मायने रखता है. गणेश चतुर्थी के दिन तो हजारों लीटर दूध से बप्पा का अभिषेक किया जाता है. इस नजारे को देखने के लिए दूर-दूर से लोग यहां आते हैं.

जयपुर के राजघराने से जुड़ा है इतिहास

इस पुराने मंदिर का इतिहास जयपुर के पुराने राजघराने से भी जुड़ा हुआ है. कहा जाता है कि जयपुर के महाराजा सवाई रामसिंह गणेश जी के बहुत बड़े भक्त थे.

वे जब भी कोई नया या बड़ा काम शुरू करते थे, तो सबसे पहले यहां आकर गणेश जी का दूध से अभिषेक करते थे. यही वजह है कि लोगों के मन में इस मंदिर को लेकर श्रद्धा और भी गहरी हो गई.

सात बुधवार दर्शन करने से पूरी होती हैं मुरादें

यहां के लोगों में एक और मजबूत मान्यता है. कहा जाता है कि अगर कोई लगातार सात बुधवार यहां सच्चे मन से दर्शन करे, तो उसकी हर इच्छा पूरी हो जाती है.

यही वजह है कि आम दिनों में भी हर बुधवार यहां भारी भीड़ देखने को मिलती है. गणेश चतुर्थी पर तो मंदिर की सजावट और रौनक और भी बढ़ जाती है.

जयपुर की पहचान का बना हिस्सा

मंदिर की पुरानी बनावट, सफेद संगमरमर की नक्काशी, सूरज की किरणों का बाप्पा के चरणों को छूना और दूध से अभिषेक की यह अनोखी परंपरा, इन सब चीजों ने इसे बाकी मंदिरों से अलग बना दिया है.

ये सिर्फ पूजा-पाठ की जगह नहीं है, बल्कि जयपुर की पुरानी संस्कृति का एक अहम हिस्सा भी है. सालों बीत जाने के बाद भी लोगों की आस्था में कोई कमी नहीं आई है. गणेश चतुर्थी पर यहां का भक्तिभाव भरा माहौल हर किसी को अपनी तरफ खींच लेता है.

डिस्क्लेमर (Disclaimer): यह लेख जयपुर स्थित श्रीश्वेत सिद्धिविनायक मंदिर के इतिहास, स्थानीय लोक मान्यताओं और धार्मिक परंपराओं पर आधारित एक विवरणात्मक रिपोर्ट है. इसका उद्देश्य पाठकों तक भारतीय संस्कृति और प्राचीन मंदिरों से जुड़ी प्रामाणिक जानकारी पहुंचाना है.

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About the Author

हर्ष सिंह जी न्यूज डिजिटल में एक अनुभवी और धारदार शैली के पत्रकार हैं. उन्होंने मार्च 2024 में जी न्यूज जॉइन किया था. वर्तमान में हर्ष धर्म और ज्योतिष से जुड़ी खबरों की खास कवरेज कर रहे हैं. वे देश-दुनिया के धार्मिक आयोजनों, अध्यात्म और ज्योतिषीय गणनाओं से जुड़े जरूरी अपडेट्स दर्शकों तक पूरी सटीकता के साथ पहुंचाते हैं. हर्ष को उनकी फैक्ट-आधारित और भरोसेमंद लेखन शैली के लिए जाना जाता है.बनारस के महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ से मास कम्युनिकेशन में पोस्ट-ग्रेजुएशन करने वाले हर्ष अपनी पूरी ऊर्जा और समझ के साथ धर्म-कर्म और ऐस्ट्रो की दुनिया के खबरों को सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचा रहे हैं.अगर आप हर्ष सिंह से संपर्क करना चाहते हैं या उनसे जुड़ा कोई सुझाव साझा करना चाहते हैं, तो उन्हें इस ईमेल आईडी पर लिख सकते हैं: Harsh.singh@India.com
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