Guru Pradosh and Masik Shivratri 2026: अक्टूबर 2026 में भगवान शिव की उपासना के लिए दोहरा मौका मिल रहा है. ध्यान दें 8 अक्टूबर 2026 गुरुवार को आश्विन कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि पर गुरु प्रदोष व्रत रखा जाएगा व रात को चतुर्थी तिथि लगते ही मासिक शिवरात्रि की पूजा की जाएगी. इस तरह प्रदोष काल में शिव पूजा और रात के समय शिवरात्रि की पूजा का भक्तों को मौका मिलेगा. आइए इस बारे में जानें.
प्रदोष व्रत हर माह में दो बार रखा जाता है. शुक्ल और कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि पर भगवान शिव को समर्पित प्रदोष व्रत रखा जाता है. 8 अक्टूबर 2026 गुरुवार को आश्विन कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि में गुरु प्रदोष व्रत रखा जाएगा. इस व्रत के लिए प्रदोष काल में पूजा का समय शाम 5:59 बजे से लेकर रात 8:27 बजे तक है. वहीं, पंचांग के अनुसार 8 अक्टूबर को चतुर्दशी तिथि की शुरुआत रात 10:15 बजे से लेकर अगले दिन रात के 9:35 बजे तक रहेगी. शिवरात्रि की विशेष पूजा के लिए निशित काल का समय रात 11:44 बजे से लेकर 12:33 बजे तक होगा.
8 अक्टूबर 2026, गुरुवार को प्रदोष व्रत और आश्विन मासिक शिवरात्रि
गुरु प्रदोष पूजा: शाम 5:59 बजे से लेकर रात 8:27 बजे तक
त्रयोदशी समाप्त: रात के 10:15 बजे
मासिक शिवरात्रि निशीथ पूजा: रात 11:44 बजे से लेकर 12:33 बजे तक
चतुर्दशी: 8 अक्टूबर रात 10:15 बजे से लेकर 9 अक्टूबर रात 9:35 बजे तक
सुबह जल्दी उठें और स्नान आदि कर साफ कपड़े पहन लें.
घर के मंदिर को साफ करके दीप जलाएं.
व्रत और महादेव के व्रत का संकल्प करें.
अब प्रदोष व्रत के लिए प्रदोष काल में और मासिक शिवरात्रि के लिए निशिता काल में पूजा करें.
दोनों व्रत का संकल्प किया है तो प्रदोष काल में ही पूजा कर लें.
भोलेनाथ के साथ मां पार्वती की उपासना करें.
भगवान भोलेनाथ को गंगाजल चढ़ाएं.
भगवान भोलेनाथ को सफेद पुष्प चढ़ाएं.
भगवान शिव को फल मीठाई व खीर का भोग अर्पित करें.
अब भगवान शिव की आरती कर पूजा को संपन्न करें.
गुरुवार के दिन प्रदोष व्रत होने के कारण इसे गुरु प्रदोष कहा जाएगा. मान्यता है कि इस दिन व्रत व शिव पूजन का संकल्प करने भक्त को ज्ञान, सद्बुद्धि, सुख-शांति के साथ ही जीवन की बाधाओं से मुक्ति मिलती है. गुरु प्रदोष का महत्व इतना अधिक है कि इस व्रत को रखने से पुरानी इच्छाओं की पूर्ति होती है और व्यक्ति को संयम रखने की भी शक्ति मिलती है.
प्रदोष व्रत के ही दिन मासिक शिवरात्रि व्रत का संयोग हो रहा है. निशित काल में मासिक शिवरात्रि की पूजा की जाएगी. हिन्दू धर्म में मासिक शिवरात्रि व्रत निशिता काल के अनुसार हर महीने कृष्ण‑पक्ष की चतुर्दशी तिथि पर रखा जाता है.
(डिस्क्लेमर- यह सामग्री धार्मिक मान्यताओं, प्रचलित परंपराओं एवं उपलब्ध धार्मिक स्रोतों पर आधारित है. विभिन्न क्षेत्रों, समुदायों और परंपराओं के अनुसार व्रत-त्योहारों की तिथि, पूजा-विधि एवं मान्यताओं में अंतर संभव है. पाठक इसे सामान्य धार्मिक जानकारी के रूप में देखें.)