App

इस साल कब है गोपाष्टमी, क्यों मनाते हैं यह पर्व और क्या हैं इस दिन के शुभ मुहूर्त और पूजा विधि?

Gopashtami 2026 Kab Hai: गोपाष्टमी पर्व इस साल कब मनाया जाएगा और यह पर्व क्यों मनाया जाता है, इन दिन कौन से शुभ मुहूर्त बन रहे हैं. आइएइ इस बारे में विस्तार से जानें.

इस साल कब है गोपाष्टमी, क्यों मनाते हैं यह पर्व और क्या हैं इस दिन के शुभ मुहूर्त और पूजा विधि?

गोपाष्टमी पर्व का सनातन धर्म में बड़ा महत्व है. यह पर्व भगवान श्रीकृष्ण और गाय माता को समर्पित है. इस दिन श्रीकृष्ण और गाय माता की शुभ मुहूर्त में विधि-विधान से पूजा की जाती है. यह पर्व कार्तिक शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि पर मनाने का विधान है. इस दिन गायों और बछड़ों को सजाया जाता है और उनका आशीर्वाद लिया जाता है. इस दिन पूजा करने व व्रत रखने से घर और जीवन में सुख-समृद्धि आती है. इसके साथ ही पापों से मुक्ति भी मिलती है. आइए जानें गोपाष्टमी कब मनाया जाता है, इस पर्व को क्यों मनाया जाता है.

गोपाष्टमी कब है 2026

अष्टमी तिथि का आरंभ- 17 नवंबर 2026 को सुबह 04:19 बजे.
अष्टमी तिथि का समापन- 18 नवंबर 2026 को सुबह 06:04 बजे.
गोपाष्टमी पर्व इस साल 17 नवंबर को मनाया जाएगा.

गोपाष्टमी क्यों मनाई जाती है?

श्रीकृष्ण ने पहली बार चरायी थी गाय
मान्यता है कि जब भगवान श्रीकृष्ण ने 7 साल की आयु में पहली बार गायों को चराया था, तब से ही गोपाष्टमी का पर्व मनाया जाता है. दरअसल, पहले श्रीकृष्ण केवल बछड़ों को चराया करते थे लेकिन कार्तिक शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि पर उन्होंने गौ माता को पहली बार चराया था. इस दिन श्रीकृष्ण ने गौ-पालन का संकल्प लिया.

इंद्र देव का टूटा था घमंड
एक पौराणिक मान्यता ये भी है कि कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा से शुक्ल सप्तमी तिथि तक जब भगवान श्रीकृष्ण ने गोवर्धन पर्वत को छोटी उंगली पर उठाया था, तब इसके आठवें दिन यानी कार्तिक शुक्ल अष्टमी तिथि पर देवराज इंद्र का घमंड टूटा था. इंद्र देव ने श्रीकृष्ण की शरण इसी तिथि पर ली थी और तब से ही गोपाष्टमी पर्व मनाने की परंपरा है.

गोपाष्टमी शुभ मुहूर्त

अभिजित मुहूर्त- सुबह 11:44 बजे से लेकर दोपहर 12:27 बजे तक.
अमृत काल- शाम 5:11 बजे से शाम 6:56    बजे तक.
ब्रह्म मुहूर्त- सुबह 4:58 बजे से सुबह 5:51 बजे तक.

गोपाष्टमी की पूजा विधि

गोपाष्टमी पर्व पर गायों व बछड़ों को साफ पानी से स्नान करवाएं.
गायों व बछड़ों को साफ कपड़ो से पोंछें.
उन्हें फूल माला, हल्दी, कुमकुम आदि अर्पित करें.
माथे पर रोली या चंदन भी लगाएं.
अब पूजा स्थल पर भगवान श्रीकृष्ण और गौ माता की मूर्ति स्थापित करें.
विधि-विधान से उनकी पूजा करें.
धूप-दीप जलाएं और माखन मिश्री का भोग चढ़ाएं.
आरती कर पूजा को संपन्न करें.
गाय को चारा डालें और एक बार घूम कर प्रणाम करें.

(डिस्क्लेमर- यह लेख ज्योतिषीय मान्यताओं और सामान्य जानकारी पर आधारित है. मुहूर्त व तिथि में स्थानीय पंचांग अनुसार अंतर संभव है. किसी भी पूजा, व्रत या उपाय को करने से पहले अपने स्थानीय विद्वान पंडित या ज्योतिषाचार्य से परामर्श अवश्य करें.)

Add Zee News as a Preferred Source

About the Author

Padma Shree Shubham

Padma Shree Shubham

पद्मा श्री शुभम् को पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 साल का अनुभव. मॉस कम्‍युनिकेशन ग्रेजुएट और हिंदी लिटरेचर से पोस्‍ट ग्रेजुएट. मीडिया में डिजिटल प्लेटफॉर्म से करियर शुरू करने के बाद कई संस्थाओं में काम किया. Nedrick News, TFI Post जैसी संस्थाओं में कार्यरत रहीं. इसके बाद Zee News जॉइन किया. समाचार और वर्तमान घटनाओं पर लिखने पढ़ने में रुचि. धर्म और ज्योतिष में अधिक रुचि. वर्तमान में धर्म और ज्योतिष संबंधी लेख लिखने में कार्यरत. पद्मा से आप padma.shubham@India.com मेल के जरिए सीधे संपर्क कर सकते हैं.
Read More