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Ganesh Chaturthi 2026: मछुआरों की एक मनौती से शुरू हुआ मुंबई का सबसे प्रसिद्ध गणेशोत्सव, रोचक है लालबागचा राजा की कहानी

Lalbaugcha Raja Story: आज बड़े ही धूमधाम से गणेश चतुर्थी पर्व मनाया जा रहा है . आइए इस लेख में जानें मछुआरों और दुकानदारों की मन्नत से जुड़ी मुंबई के लालबागचा राजा की कहानी क्या है. मुंबई के सबसे प्रसिद्ध गणेशोत्सव की देखरेख कौन करता है और दर्शन का समय क्या है.

Ganesh Chaturthi 2026: मछुआरों की एक मनौती से शुरू हुआ मुंबई का सबसे प्रसिद्ध गणेशोत्सव, रोचक है लालबागचा राजा की कहानी

Lalbaugcha Raja Ki Kahani Hindi Me: गणेश चतुर्थी पर्व 14 सितंबर को यानी आज बड़े ही धूमधाम से मनाया जा रहा है. इस पर्व पर भक्त गणेश जी की प्रतिमा स्थापित कर उनका सच्चे मन से उपासना करते हैं. भगवान गणेश विघ्नहर्ता हैं जो भक्तों के जीवन से एक-एक परेशानियां दूर कर देते हैं. बात जब गणेश चतु्र्थी की आती है तो मुंबई के लालबागचा राजा का जिक्र जरूर होता है. मुंबई के सबसे प्रसिद्ध और लोकप्रिय पंडाल में लालबागचा राजा के दर्शन के लिए लाखों भक्त पहुंचते हैं. इस बार भी भक्तों लालबागचा राजा के दर्शन के लिए बड़ी संख्या में पहुंच रहे हैं.

लालबागचा राजा का मुंबई के लोगों के आस्था, संस्कृति और कला का प्रतीक है. जिसके दर्शन के लिए लोग देश-विदेश से आते हैं. आइए इस लेख में विस्तार से जानें कि गणेश चतुर्थी से अनंत चतुर्दशी यानी विसर्जन तक लालबागचा राजा की देखरेख कौन करता हैं, दर्शन का समय क्या है और लालबागचा राजा की कहानी क्या है.

लालबागचा राजा की कहानी

बात 20वीं सदी की शुरुआती समय का है जब लालबाग, परेल और आसपास के क्षेत्र मुंबई के गिरणगांव का भाग हुआ करता था. इन जगहों पर बहुत सारे कपड़ा मिलों के मजदूर रहते थे, मछुआरे से लेकर छोटे व्यापारी और दुकानदार भी यहीं रहा करते थे. इनके लिए बाजार और चॉल बहुत महत्व रखती थी. जहां तक लालबागचा राजा की कहानी की बात करें तो यह पेरू चॉल के बाजार से शुरू होती है. इन्हीं सालों की बात है, पेरू चॉल की एक बाजार बंद हो गयी तो यहां के लोगों को खाने तक का संकट हो गया. यहां के मछुआरों और दुकानदारों के सामने सबसे बड़ी परेशानी तो यही थी कि वे आखिर अपना सामान कहां बेचें. जब यहां के लोगों की रोजीरोटी पर विघ्न-बाधा आई तो उन्होंने भगवान गणेश से प्रार्थना की. उन्होंने एक स्थायी बाजार मिलने की मनौती मांगी. इसके बाद स्थानीय लोगों के साथ मिलकर समाजसेवियों ने कोशिशें कीं और ये कोशिशें आखिरकार रंग लाईं. जमीन की मालकिन राजाबाई तैयबअली ने बाजार बनाने के लिए एक जमीन का टुकड़ा उपलब्ध कराने पर अपनी सहमति दी. वहीं जब वहां के लोगों की मनौती पूर्ण हुई तो अपनी प्रसन्नता को जाहिर करने के लिए उन्होंने भव्य गणेशोत्सव का आयोजन किया. इसी गणेशोत्सव ने आगे चलकर लालबागचा राजा के रूप में देश-विदेश में अपनी पहचान बनाई और खूब प्रसिद्ध पाई. वहीं, लालबागचा राजा सार्वजनिक गणेशोत्सव मंडल की स्थापना साल 1934 में हुई. मान्यता है कि लालबागचा राजा के दर्शन पाकर ही सभी मनोकामनाएं पूर्ण हो जाती हैं.

लालबागचा राजा की कौन करता है देखभाल

लालबागचा राजा की देखरेख कांबली परिवार कर रहा है. इस परिवार के पास यह जिम्मेदारी दशकों से है. यह परिवार पीढ़ी-दर-पीढ़ी मंडल से जुड़ी पुरानी परंपरा को निभाता आ रहा है.

लालबागचा राजा के दर्शन कब कर सकते हैं?

पूरे गणेशोत्सव में परेल के लालबाग मार्केट के लालबागचा राजा के दर्शन लगभग 24 घंटे ही किए जा सकते हैं. हालांकि पिछले कुछ सालों के शेड्यूल के अनुसार आम श्रद्धालुओं के लिए जनरल दर्शन सुबह 5 बजे ही शुरू हो जाते हैं. मुख दर्शन और चरण स्पर्श के लिए सुबह 6 बजे से ही लाइन लगने लगती है और देर रात तक दर्शन का कार्यक्रम चलता रहता है.

(डिस्क्लेमर- यह सामग्री धार्मिक मान्यताओं, प्रचलित परंपराओं एवं उपलब्ध धार्मिक स्रोतों पर आधारित है. विभिन्न क्षेत्रों, समुदायों और परंपराओं के अनुसार व्रत-त्योहारों की तिथि, पूजा-विधि एवं मान्यताओं में अंतर संभव है. पाठक इसे सामान्य धार्मिक जानकारी के रूप में देखें.)

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About the Author

Padma Shree Shubham

Padma Shree Shubham

पद्मा श्री शुभम् को पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 साल का अनुभव. मॉस कम्‍युनिकेशन ग्रेजुएट और हिंदी लिटरेचर से पोस्‍ट ग्रेजुएट. मीडिया में डिजिटल प्लेटफॉर्म से करियर शुरू करने के बाद कई संस्थाओं में काम किया. Nedrick News, TFI Post जैसी संस्थाओं में कार्यरत रहीं. इसके बाद Zee News जॉइन किया. समाचार और वर्तमान घटनाओं पर लिखने पढ़ने में रुचि. धर्म और ज्योतिष में अधिक रुचि. वर्तमान में धर्म और ज्योतिष संबंधी लेख लिखने में कार्यरत. पद्मा से आप padma.shubham@India.com मेल के जरिए सीधे संपर्क कर सकते हैं.
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