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Lalbaugcha Raja Ki Kahani Hindi Me: गणेश चतुर्थी पर्व 14 सितंबर को यानी आज बड़े ही धूमधाम से मनाया जा रहा है. इस पर्व पर भक्त गणेश जी की प्रतिमा स्थापित कर उनका सच्चे मन से उपासना करते हैं. भगवान गणेश विघ्नहर्ता हैं जो भक्तों के जीवन से एक-एक परेशानियां दूर कर देते हैं. बात जब गणेश चतु्र्थी की आती है तो मुंबई के लालबागचा राजा का जिक्र जरूर होता है. मुंबई के सबसे प्रसिद्ध और लोकप्रिय पंडाल में लालबागचा राजा के दर्शन के लिए लाखों भक्त पहुंचते हैं. इस बार भी भक्तों लालबागचा राजा के दर्शन के लिए बड़ी संख्या में पहुंच रहे हैं.
लालबागचा राजा का मुंबई के लोगों के आस्था, संस्कृति और कला का प्रतीक है. जिसके दर्शन के लिए लोग देश-विदेश से आते हैं. आइए इस लेख में विस्तार से जानें कि गणेश चतुर्थी से अनंत चतुर्दशी यानी विसर्जन तक लालबागचा राजा की देखरेख कौन करता हैं, दर्शन का समय क्या है और लालबागचा राजा की कहानी क्या है.
बात 20वीं सदी की शुरुआती समय का है जब लालबाग, परेल और आसपास के क्षेत्र मुंबई के गिरणगांव का भाग हुआ करता था. इन जगहों पर बहुत सारे कपड़ा मिलों के मजदूर रहते थे, मछुआरे से लेकर छोटे व्यापारी और दुकानदार भी यहीं रहा करते थे. इनके लिए बाजार और चॉल बहुत महत्व रखती थी. जहां तक लालबागचा राजा की कहानी की बात करें तो यह पेरू चॉल के बाजार से शुरू होती है. इन्हीं सालों की बात है, पेरू चॉल की एक बाजार बंद हो गयी तो यहां के लोगों को खाने तक का संकट हो गया. यहां के मछुआरों और दुकानदारों के सामने सबसे बड़ी परेशानी तो यही थी कि वे आखिर अपना सामान कहां बेचें. जब यहां के लोगों की रोजीरोटी पर विघ्न-बाधा आई तो उन्होंने भगवान गणेश से प्रार्थना की. उन्होंने एक स्थायी बाजार मिलने की मनौती मांगी. इसके बाद स्थानीय लोगों के साथ मिलकर समाजसेवियों ने कोशिशें कीं और ये कोशिशें आखिरकार रंग लाईं. जमीन की मालकिन राजाबाई तैयबअली ने बाजार बनाने के लिए एक जमीन का टुकड़ा उपलब्ध कराने पर अपनी सहमति दी. वहीं जब वहां के लोगों की मनौती पूर्ण हुई तो अपनी प्रसन्नता को जाहिर करने के लिए उन्होंने भव्य गणेशोत्सव का आयोजन किया. इसी गणेशोत्सव ने आगे चलकर लालबागचा राजा के रूप में देश-विदेश में अपनी पहचान बनाई और खूब प्रसिद्ध पाई. वहीं, लालबागचा राजा सार्वजनिक गणेशोत्सव मंडल की स्थापना साल 1934 में हुई. मान्यता है कि लालबागचा राजा के दर्शन पाकर ही सभी मनोकामनाएं पूर्ण हो जाती हैं.
लालबागचा राजा की देखरेख कांबली परिवार कर रहा है. इस परिवार के पास यह जिम्मेदारी दशकों से है. यह परिवार पीढ़ी-दर-पीढ़ी मंडल से जुड़ी पुरानी परंपरा को निभाता आ रहा है.
पूरे गणेशोत्सव में परेल के लालबाग मार्केट के लालबागचा राजा के दर्शन लगभग 24 घंटे ही किए जा सकते हैं. हालांकि पिछले कुछ सालों के शेड्यूल के अनुसार आम श्रद्धालुओं के लिए जनरल दर्शन सुबह 5 बजे ही शुरू हो जाते हैं. मुख दर्शन और चरण स्पर्श के लिए सुबह 6 बजे से ही लाइन लगने लगती है और देर रात तक दर्शन का कार्यक्रम चलता रहता है.
(डिस्क्लेमर- यह सामग्री धार्मिक मान्यताओं, प्रचलित परंपराओं एवं उपलब्ध धार्मिक स्रोतों पर आधारित है. विभिन्न क्षेत्रों, समुदायों और परंपराओं के अनुसार व्रत-त्योहारों की तिथि, पूजा-विधि एवं मान्यताओं में अंतर संभव है. पाठक इसे सामान्य धार्मिक जानकारी के रूप में देखें.)