भगवान विष्णु को समर्पित एकादशी व्रत हिंदू धर्म में बहुत अहम माने गए हैं, जिसमें से कुछ एकादशी को विशेष दर्जा दिया गया है. अक्टूबर महीने में रखे जा रहे 2 एकादशी व्रत में इंदिरा एकादशी व्रत पितृ पक्ष के दौरान आता है और इसे पितरों की मुक्ति के लिए विशेष माना गया है. मान्यता है कि इंदिरा एकादशी का विधिवत व्रत रखने, विष्णु जी की पूजा करने और इस दिन पितरों का श्राद्ध-तर्पण करने से उनके लिए बैकुंठ धाम और मोक्ष के द्वार खुलते हैं. साथ ही साधक को पितृ दोष से मुक्ति मिलती है. उसके पाप नष्ट होते हैं. देखें अक्टूबर महीने के दोनों एकादशी व्रत की तारीख, पूजा मुहूर्त और पारण समय.
अश्विन महीने के कृष्ण पक्ष की एकादशी को इंदिरा एकादशी व्रत रखा जाता है. इसी दौरान पितृ पक्ष चलते हैं. द्रिक पंचांग के अनुसार, इस साल अश्विन कृष्ण एकादशी तिथि 5 व 6 अक्टूबर की मध्य रात्रि 02:07 बजे प्रारंभ होगी और 6 व 7 अक्टूबर की रात 12:34 बजे तक रहेगी. उदयातिथि के अनुसार, 6 अक्टूबर को इंदिरा एकादशी व्रत रखा जाएगा.
इंदिरा एकादशी व्रत तारीख : 6 अक्टूबर 2026, मंगलवार
एकादशी व्रत पारण का समय: 7 अक्टूबर 2026 को सुबह 06:14 बजे से 08:05 बजे तक
महत्व : पितरों की आत्मा को बैकुंठ में स्थान मिलता है. साधक का पितृ दोष दूर होता है और पाप नष्ट होते हैं.
आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को पापांकुशा एकादशी कहते हैं. द्रिक पंचांग के अनुसार, इस साल आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि 21 अक्टूबर की दोपहर 02:11 बजे से प्रारंभ होगी और 22 अक्टूबर की दोपहर 02:47 बजे समाप्त होगी. उदया तिथि के आधार पर 22 अक्टूबर को पापांकुशा एकादशी व्रत रखा जाएगा.
पापांकुशा एकादशी व्रत तिथि: 22 अक्टूबर 2026, गुरुवार
व्रत पारण का समय: 23 अक्टूबर 2026 को सुबह 05:51 बजे से 09:39 बजे तक
महत्व: पापांकुशा एकादशी शारदीय नवरात्रि के बाद दशहरे के अगले दिन पड़ती है. धार्मिक मान्यता है कि यह व्रत रखने से और श्रीहरि की पूजा करने से व्यक्ति को जाने-अनजाने पापों से मुक्ति मिलती है. साथ ही जीवन में सुख-समृद्धि बढ़ती है.
एकादशी की सुबह स्नान करके साफ कपड़े पहनें. फिर भगवान विष्णु का ध्यान करके व्रत और पूजा का संकल्प लें. भगवान विष्णु को अक्षत, हल्दी, पीले फूल, तुलसी दल, फल, भोग आदि अर्पित करके पूजा करें. घी का दीपक जलाएं. 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' मंत्र का जाप करें. एकादशी व्रत की कथा पढ़ें या सुनें. आखिर में आरती करें और अगले दिन द्वादशी तिथि को सात्विक भोजन के साथ व्रत का पारण करें.
(Disclaimer: यह सामग्री धार्मिक मान्यताओं, प्रचलित परंपराओं एवं उपलब्ध धार्मिक स्रोतों पर आधारित है. विभिन्न क्षेत्रों, समुदायों और परंपराओं के अनुसार व्रत-त्योहारों की तिथि, पूजा-विधि एवं मान्यताओं में अंतर संभव है. पाठक इसे सामान्य धार्मिक जानकारी के रूप में देखें.)