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दशहरा बीतते ही देवउठनी एकादशी का इंतजार शुरू हो गया है, क्योंकि इस दिन से ही शादी-विवाह जैसे मांगलिक कार्य प्रारंभ होते हैं. इस साल 20 नवंबर 2026 को देवउठनी एकादशी है. इससे पहले आज 22 अक्टूबर को पापांकुशा एकादशी और 5 नवंबर को रमा एकादशी व्रत रखा जाएगा. पापांकुशा एकादशी का व्रत पापों से मुक्ति पाने के लिए किया जाता है. साथ ही इस दिन कुछ काम करने से बचें, वरना एकादशी व्रत पूजा का पूरा फल नहीं मिलेगा.
पापांकुशा एकादशी पर आज गुरुवार का संयोग बन रहा है. एकादशी व्रत और गुरुवार व्रत दोनों ही भगवान विष्णु को समर्पित हैं. आज इस डबल फायदा देने वाले दिन पर कुछ गलतियां करने से बचें.
- जिस तरह गुरुवार के दिन बाल नहीं धोने की धार्मिक मान्यता है, वैसे ही एकादशी के दिन भी बाल न धोएं.
- एकादशी के दिन घर में सिर्फ झाड़ू लगाएं, अतिरिक्त झाड़-पोंछ और पोछा लगाने से बचें.
- एकादशी व्रत में चावल न खाएं, फिर वे चाहे समा के चावल ही क्यों न हों, जो आमतौर पर व्रत में खाए जाते हैं.
- एकादशी व्रत के दिन कपड़े धोने से बचें, यह काम अगले दिन या एक दिन पहले करें.
- किसी भी तरह की तामसिक चीजों से दूरी बनाए रखें.
धर्मराज युधिष्ठिर ने भगवान श्रीकृष्ण से अश्विन शुक्ल एकादशी के व्रत विधान और महत्व के बारे में पूछा. तब भगवान श्रीकृष्ण ने युधिष्ठिर से कहा कि इस व्रत को पापांकुशा एकादशी कहते हैं. जो भी व्यक्ति इस व्रत को रखता है, उसके सभी पाप और दोष कट जाते हैं. मनोकामनाएं पूरी होती हैं और अंत स्वर्ग की प्राप्ति होती है. इस व्रत को करने से 10 पीढ़ियों का उद्धार होता है. पापांकुशा एकादशी की व्रत कथा सुनों.
एक बार की बात है विंध्य पर्वत पर क्रोधन नाम का एक बहेलिया रहता था. वह बड़ा ही पापी और अधर्मी था. वो जीवों पर हिंसा करता था, उसके अंदर दया भाव नहीं था. उसने अपने पूरे जीवनकाल में कई जीवों हत्या की थी. समय के साथ उसकी भी उम्र ढलने लगी. उसके जीवन का अंतिम समय चल रहा था.
एक दिन उसके सपने में यमराज के दूत आए और उसे बताया कि कल उसके जीवन का अंतिम क्षण है. उसकी मृत्यु हो जाएगी और आत्मा यमदूत लेकर अपने साथ यमलोक जाएंगे. यमदूतों की बातें सुनकर क्रोधन डर गया और अपनी मृत्यु की बात से दुखी हो गया. उसे पता था कि अधर्मी लोगों की आत्मा को नरक के कष्ट और यातनाएं भोगनी पड़ती हैं.
इन यातनाओं से बचने का उपाय खोजने के लिए वह अंगिरा ऋषि के आश्रम में गया. उसने अंगिरा ऋषि को प्रणाम करके कहा कि उसने पूरे जीवन हिंसा, पाप, अधर्म, जीव हत्या की है. अब जीवन के अंतिम समय में इन सबसे मुक्त होना चाहता है. इसके लिए कुछ उपाय बताएं, ताकि वह पाप मुक्त हो जाए और मोक्ष प्राप्त कर सके.
अंगिरा ऋषि ने उससे कहा कि पाप से मुक्ति के लिए पापांकुशा एकादशी का व्रत विधि विधान से करना होगा. यह व्रत पापों का नष्ट करने वाला है. जब व्रत रखकर पूजा करोगे तो भगवान विष्णु की कृपा से पाप मिटेंगे और मोक्ष प्राप्त कर पाओगे. यह सुनकर बहेलिया क्रोधन खुश हो गया. उसे मुक्ति का उपाय मिल गया तो वह अंगिरा ऋषि को प्रणाम करके घर चला गया.
जिस दिन अश्विन शुक्ल एकादशी आई, उसने पापांकुशा एकादशी का व्रत रखा और विधिपूर्वक पूजा की. रात के समय में जागरण किया. फिर अगले दिन पारण कर व्रत पूर्ण किया. व्रत-पूजा करने से भगवान विष्णु का आशीर्वाद मिला जिससे क्रोधन के पाप और दोष मिट गए. मृत्यु के बाद से उसे मोक्ष की प्राप्ति हुई. जो लोग पापांकुशा एकादशी को व्रत रखकर पूजा करते हैं, अन्न, जल, छाता, तिल आदि का दान करते हैं, उनको भी मोक्ष मिलता है.
एकादशी के दिन गरीबों-जरूरतमंदों को कुछ चीजों का दान करना बेहद शुभ बताया गया है.
- अनाज जैसे - गेहूं, जौ चना, दालें आदि.
- तिल का दान करें.
- कपड़े दान करें.
- किसी मंदिर, स्कूल, वृद्धाश्रम आदि के निर्माण के लिए जमीन का दान.
- गाय का दान.
- जरूरतमंदों के लिए पीने के साफ पानी की व्यवस्था करना.
(Disclaimer: एकादशी से जुड़े पूजा-पाठ, खानपान और दैनिक कार्यों के नियम अलग-अलग धार्मिक परंपराओं और परिवारों में भिन्न हो सकते हैं. बाल धोने या घर में पोछा लगाने को लेकर प्रचलित मान्यताओं को सार्वभौमिक नियम न समझें. व्रत अपनी शारीरिक क्षमता और स्वास्थ्य को ध्यान में रखकर करें.)