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6 नवंबर को धनतेरस से दीपोत्सव पर्व शुरू हुआ को 11 नवंबर को भाई दूज के साथ समाप्त होगा. दीपोत्सव पर्व के 5 दिन में क्रमश: धनतेरस, नरक चौदस, दिवाली, गोवर्धन पूजा और भाई दूज पर्व मनाते हैं. लेकिन इस साल यह पर्व 6 दिन तक चलेगा. इसके पीछे वजह है दिवाली और गोवर्धन पूजा के बीच आ रहा 1 दिन का गैप. क्योंकि दिवाली 8 नवंबर 2026, रविवार को मनाई जाएगी. वहीं गोवर्धन पूजा 10 नवंबर 2026, मंगलवार को की जाएगी.
इस तरह 8 नवंबर को दिवाली और 10 नवंबर को गोवर्धन पूजा है. इस बीच 9 नवंबर का दिन खाली है. ऐसा क्यों हो रहा है, इसके पीछे वजह है तिथियों की शुरुआत और समापन का समय.
द्रिक पंचांग के अनुसार, कार्तिक अमावस्या तिथि 8 नवंबर 2026 की सुबह 11:28 बजे शुरू होगी और 9 नवंबर की दोपहर 12:31 बजे समाप्त होगी. चूंकि दिवाली की पूजा अमावस्या की शाम को प्रदोष काल और रात को निशिता काल में करने का महत्व है इसलिए दिवाली 8 नवंबर को मनाई जाएगी.
वहीं कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा तिथि 9 नवंबर की दोपहर 12:31 बजे से प्रारंभ होकर 10 नवंबर की दोपहर 2 बजे तक रहेगी. चूंकि गोवर्धन पूजा सुबह करने का विधान है और कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा तिथि 10 नवंबर की सुबह रहेगी, इसलिए गोवर्धन पूजा 10 नवंबर को करना उचित होगा. इस कारण 9 नवंबर का दिन खाली रहेगा.
मशहूर ज्योतिषाचार्य पंडित अजय भाम्बी के अनुसार, लक्ष्मी पूजन स्थिर लग्न वृष में करना सबसे शुभ माना जाता है. इस साल दिवाली पूजा के लिए शाम और रात को कुल 3 शुभ मुहूर्त हैं.
वृष काल (स्थिर लग्न): शाम 5:54 बजे से रात 7:50 बजे तक (इसी दौरान पूजा करना अत्यंत शुभ माना जाता है)
निशीथ काल मुहूर्त : रात्रि 8:11 से 10:52 तक रहेगा.
महा निशीथ काल मुहूर्त: रात 11:44 बजे से रात 12:36 बजे तक है.
गोवर्धन पूजा के दिन भगवान कृष्ण द्वारा उंगली पर गोवर्धन पर्वत उठाए हुए चित्र बनाया जाता है. उसकी पूजा करते हैं और भगवान कृष्ण को विभिन्न पकवानों का भोग लगाया जाता है, जिसे अन्नकूट कहते हैं.
ज्योतिषाचार्य पंडित अजय भाम्बी के अनुसार, इस साल गोवर्धन पूजा का शुभ मुहूर्त 10 नवंबर की सुबह 6:40 बजे से 8:50 बजे तक है.
बाकी प्रतिपदा तिथि 10 नवंबर की दोपहर लगभग 2 बजे समाप्त होगी. तब तक भी पूजा की जा सकती है.
(Disclaimer- यहां दी गई तिथि-मुहूर्त, पंचांग, ज्योतिषाचार्य द्वारा दी गई जानकारी व ज्योतिषीय गणना पर आधारित हैं. स्थानीय परंपरा और पंचांग में अंतर संभव है, इसलिए पूजा से पहले अपने पुरोहित से पुष्टि अवश्य करें.)