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दिवाली का वो दिन आखिरकार आज आ ही गया. जिसका लोगों बहुत दिनों से इंतजार था. आज के दिन चारों तरफ रोशनी और खुशियों का माहौल रहता है.
लेकिन सबके मन में ये सवाल रहता है कि आज के दिन कहां-कहां और कितने दिए जलाने चाहिए.
अगर आप भी ये जानना चाहते हैं तो इस खबर में हम इस बारे में पूरी जानकारी आपको डिटेल से देंगे.
दिवाली के दिन आपको सबसे पहला दीया हमेशा घर के मेन गेट पर जलानी चाहिए. इसे देहरी का दीया भी कहा जाता है.
माना जाता है कि मेन गेट द्वार पर दीया जलाने से घर में मां लक्ष्मी का स्वागत होता है.
आप इस दीये को चौखट के दोनों ओर रख सकते हैं जिससे घर में हमेशा पॉजिटिव एनर्जी बनी रहे और नेगेटिविटी बाहर ही रहे.
घर के मंदिर में पूजा के समय सबसे खास दीया जलाया जाता है. मंदिर में हमेशा गाय के शुद्ध घी का दीया जलाना सबसे अच्छा माना जाता है.
आप मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की मूर्ति के सामने एक बड़ा दीया या अखंड दीप जरूर रखें.
कोशिश करें कि ये दीया पूजा के समय तक लगातार जलता रहे, जिससे घर में पवित्रता बनी रहती है.
हमारे यहां तुलसी के पौधे को बहुत पवित्र माना गया है. दीवाली की रात तुलसी के गमले के पास भी एक दीया जरूर जलाना चाहिए.
ऐसा करने से घर में सुख और शांति हमेशा बनी रहती है. तुलसी के पास रखा गया ये दीया जीवन में खुशहाली और मां लक्ष्मी की कृपा लेकर आता है.
दीवाली का मतलब ही अंधेरे को दूर भगाना होता है. इसलिए घर का कोई भी कोना अंधेरे में नहीं छूटना चाहिए.
आप अपने रसोई घर, पीने के पानी की जगह, छत और बालकनी में छोटे-छोटे दीये जरूर रखें.
इन जगहों पर दीया जलाने से घर के सभी वास्तु दोष दूर हो जाते हैं और घर का कोना-कोना जगमग हो उठता है.
दीपावली पर दीयों की संख्या को लेकर कोई सख्त या कड़ा नियम नहीं है. आप अपनी श्रद्धा और सुविधा के अनुसार 11, 21, 51 या 108 दीये जला सकते हैं.
कुछ लोग अपनी क्षमता के मुताबिक पूरे घर में सैकड़ों दीये भी जलाते हैं.
सबसे जरूरी बात ये है कि आपके मन में सच्ची श्रद्धा होनी चाहिए, क्योंकि संख्या से ज्यादा आपकी भावना का महत्व होता है.
(Disclaimer): इस लेख में दी गई जानकारियां पारंपरिक मान्यताओं और लोक-परंपराओं पर आधारित हैं. इसका उद्देश्य किसी भी तरह के अंधविश्वास को बढ़ावा देना नहीं है. दीये जलाते समय आग और सुरक्षा का पूरा ध्यान रखें.