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दिवाली पर्व का हिंदू धर्म में बड़ा महत्व है. यह पूरे साल पड़ने वाले बड़े त्योहारों में से एक है. दिवाली पर्व पर मां लक्ष्मी की विशेष कृपा पाने के लिए घर में श्रीयंत्र लाना अति शुभ माना जाता है. धार्मिक मान्यता है कि जिस घर में श्रीयंत्र को स्थापित किया जाता है वहां पर साक्षात मां लक्ष्मी विराजती हैं. अगर इस दिवाली आप भी अपने घर में श्रीयंत्र लाने की मंशा रखते हैं तो आपको इस यंत्र के बारे में विस्तार से जान लेना चाहिए.
श्रीयंत्र अगर तांबे, सोने या चांदी का हो तो इसे शुभ माना जाता है. इन धातुओं के मिश्रण से जो श्रीयंत्र बनाया जाता है उसको सबसे उत्तम फलदायी माना जाता है. रत्न में स्फटिक का श्रीयंत्र बनाकर घर लाना शुभ फलदायी होता है. इस तरह के श्रीयंत्र को घर लाने से मां लक्ष्मी की कृपा पूरे घर पर बनी रहती है.
शास्त्रों में श्रीयंत्र स्थापित करने का सही समय गुरु पुष्य योग व रवि पुष्य योग को माना गया है. इसके अलावा नवरात्र, दिवाली और अक्षय तृतीया पर्व पर इसे घर लाना और स्थापित करना शुभ माना गया है.
वास्तु शास्त्र के अनुसार श्रीयंत्र को घर की उत्तर या उत्तर-पूर्व दिशा यानी ईशान कोना में लगाना शुभ होता है.
वास्तु शास्त्र के अनुसार दुकान या दफ्तर में, कुर्सी के पीछे या कैश काउंटर के पास श्रीयंत्र लगाएं.
वास्तु शास्त्र के अनुसार श्रीयंत्र को नंगी जमीन पर न रखें. चौकी, शेल्फ या मंदिर के भीतर साफ कपड़े पर रखें.
श्रीयंत्र को कभी भी बाथरूम के पास, सीढ़ियों के नीचे या स्टोर रूम में न रखें.
श्रीयंत्र को हर दिन साफ करें और उसकी पूजा करें. धूल वाली जगह पर इसे न रखें.
श्रीयंत्र का धातु के यंत्र का रंग गहरा हो जाए तो इसे समय-समय पर चमकाते रहें.
सुबह उठकर स्नान करें और साफ वस्त्र पहन लें.
अब पूजा स्थान को साफ कर एक चौकी पर लाल कपड़ा बिछा लें.
इस चौकी पर श्रीयंत्र को स्थापित करें.
धातु का यंत्र है तो पानी या पंचामृत से अभिषेक कर लें.
या फिर एक साफ बर्तन में कच्चा दूध और गंगाजल मिला लें.
अब इसी में श्रीयंत्र को स्नान करवाएं.
इसे स्वच्छ कपड़े से साफ करें. उसके बाद चौकी पर स्थापित करें.
लकड़ी और पत्थर के यंत्रों को सूखे कपड़े से साफ कर लें.
अब एक दीया और अगरबत्ती श्रीयंत्र के सामने जलाएं
कुमकुम, हल्दी, अक्षत और फूल चढ़ाएं.
सबसे पहले चारों द्वारों को और फिर केंद्र को श्रद्धा भाव से स्पर्श करें.
अब इसके मंत्र का कम से कम 108 बार जाप करें.
श्री सूक्त का पाठ करें तो शुभ फल प्राप्त होगा.
आरती करके पूजा को संपन्न करें. अब इसे एक साफ स्थाई जगह पर रख दें
हर दिन देवी-देवता के साथ इसकी भी पूजा करें.
असली श्रीयंत्र में परस्पर जुड़े हुए नौ त्रिकोण दिख जाएंगे जिनकी रेखाएं और कोने अच्छी तरह दिख रहे होंगे और गणितीय आधार पर सही होंगे. असली वाले श्रीयंत्र में सभी त्रिकोणों के शीर्ष और आधार एक रूप में एक-दूसरे के साथ जुड़े होंगे. अगर रेखाएं टेढ़ी-मेढ़ी हों या यंत्र पर त्रिकोण कटे-फटे दिखते हों तो यह नकली और दोषपूर्ण यंत्र माना जाएगा.
दिवाली पर श्रीयंत्र लाना इसलिए शुभ होता है क्योंकि यह दिन धन की देवी लक्ष्मी की पूजा का होता है और इस दिन मां लक्ष्मी जिस भी घर में जाती हैं वहां स्थायी वास करती है. वहीं जहां तक श्रीयंत्र की बात है तो इसे मां लक्ष्मी का ही एक रूप माना जाता है. ऐसे में जब दिवाली पर श्रीयंत्र घर लाते हैं और इसकी प्राण-प्रतिष्ठा करते हैं तो घर में धन, वैभव स्थायी रूप से रहता है.
(डिस्क्लेमर: यह लेख धार्मिक मान्यताओं, शास्त्रों और वास्तु परंपराओं पर आधारित है. श्रीयंत्र से जुड़े लाभ आस्था का विषय हैं, इनका कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है. किसी भी यंत्र की खरीदारी से पहले विशेषज्ञ या विद्वान से सलाह लें.)