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करीब दो दशक पहले अंतरिक्ष में भेजा गया नासा का मशहूर स्पेस टेलीस्कोप अब अपना सफर पूरा कर पृथ्वी पर वापस लौट रहा है. मजे की बात ये है कि उस टेलीस्कोप को महज 2 साल की सेवा के लिए अंतरिक्ष में भेजा गया था. लेकिन वह वहां पर 22 साल तक काम करता रहा. अब नासा का यह टेलीस्कोप 4 नवंबर को तड़के पृथ्वी की कक्षा में प्रवेश करेगा. वायुमंडल में प्रवेश करते ही करीब 1500 किलो वजन वाला टेलीस्कोप हवा में ही नष्ट हो जाएगा. हालांकि, करीब 100 किलो का मलबा धरती पर गिरकर तबाही मचा सकता है. जिन जगहों पर इस टेलीस्कोप के टकराने की आशंका जताई गई है, उनमें मुंबई और हैदराबाद भी शामिल हैं.
एनडीटीवी की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने 20 नवंबर 2004 को 'नील गेहरल्स स्विफ्ट ऑब्जर्वेटरी' नाम की टेलीस्कोप अंतरिक्ष में स्थापित की थी. शुरुआती योजना के अनुसार, में इसे बस दो साल के लिए ही काम करना था, लेकिन इसने उम्मीदों से कहीं ज्यादा लंबे समय तक काम किया. करीब 2 दशक से ज्यादा के इस सफर में टेलीस्कोप ने दो हजार से ज्यादा गामा-रे विस्फोटों और 14 सौ सुपरनोवा का बेहद करीब से अध्ययन किया.
अब डेढ़ टन वजन वाला इस टेलीस्कोप का सफर खत्म हो चुका है और यह धरती की तरफ वापस आ रहा है. नासा के वैज्ञानिकों के मुताबिक, यह टेलीस्कोप भारतीय समयानुसार 4 अक्टूबर को तड़के वायुमंडल में प्रवेश कर जाएगा. हालांकि इसके री-एंट्री के समय को लेकर अभी थोड़ी अनिश्चितता बनी हुई है. फिर भी, अनुमानित समय यही माना जा रहा है.
नासा का अनुमान है कि यह टेलीस्कोप पृथ्वी के 20.6 डिग्री दक्षिण और 20.6 डिग्री उत्तर अक्षांश के बीच में कहीं गिर सकता है. अगर नक्शे पर देखें तो यह पृथ्वी के बीचों-बीच एक चौड़ी पट्टी जैसा नजर आता है. भारत की बात करें तो दमन से लेकर ओडिशा के कटक तक के इलाके इस पट्टी में आ रहे हैं. यानी कि मुंबई, हैदराबाद, बेंगलुरु और चेन्नई जैसे बड़े किसी शहर में भी टेलीस्कोप का हिस्सा गिर सकता है. जबकि, दिल्ली और कोलकाता इससे दूर माने जा रहे हैं.
खगोलविदों का कहना है कि भले ही ये शहर इस अक्षांश में आ रहे हों, लेकिन इसका मतलब ये नहीं है कि मलबा सीधा इन्हीं शहरों पर ही गिरेगा. अधिकतर संभावना यही है कि टेलीस्कोप का बचा हुआ हिस्सा किसी सुनसान इलाके या समुद्र में ही समा जाएगा. इस थ्योरी की बड़ी वजह ये है कि पृथ्वी का 70 प्रतिशत हिस्सा समुद्रों से घिरा हुआ है. ऐसे में किसी भी बाहरी चीज के गहरे समुद्र में गिरने के चांस ही ज्यादा होते हैं. इसके बावजूद अगर कुछ बचे टुकड़े जमीन पर गिर भी जाते हैं तो किसी बड़े नुकसान या इंसानी खतरे की आशंका ना के बराबर है.