चैतुरगढ़ में महिषासुर मर्दिनी के दर्शन के साथ क्यों प्रसिद्ध है यह रहस्यमयी गुफा?
छत्तीसगढ़ के कोरबा में स्थित चैतुरगढ़ मंदिर नवरात्रि पर भक्तों के लिए खास आस्था का केंद्र है. इस खबर में हम आपको यहां के प्राचीन इतिहास, महिषासुर मर्दिनी मंदिर और रहस्यमयी गुफाओं के बारे में बताएंगे.
क्या आपने कभी चैतुरगढ़ का प्राचीन किला बारे में सुना है? अगर नहीं सुना है तो, जान लीजिए ये जगह छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले स्थित है.
चारों ओर घने जंगल है जो इस जगह को काफी खूबसूरत बनाती है. ये जगह नवरात्रि के दिनों में आस्था और भक्ति का सबसे बड़ा केंद्र बन जाता है.
इस जगह को लाफागढ़ के नाम से जाना जाता है. नवरात्रि के समय में यहां लोग दूर-दूर से दर्शन करने के लिए आते हैं.
किसने बनवया था ये किला?
इस किले को राजा पृथ्वीदेव प्रथम ने बनवाया था. किले के सुरक्षा के लिए राजा ने इसके चारों ओर बड़ी दीवारें बनवाई थी.
वहां के संस्कृति विभाग ने इसे ऐतिहासिक धरोहर समझते हुए, 17 दिसंबर 1920 को इसे संरक्षित स्मारक घोषित कर दिया था.
बारह भुजाओं वाली मां महिषासुर मर्दिनी का प्राचीन मंदिर
इसी जगह एक बहुत पुरानी प्राचीन मंदिर स्थित है. मंदिर के गर्भगृह में माता की बारह भुजाओं वाली मूर्ति रखी गई है.
धार्मिक मान्यताओं की मानें तो, महिषासुर राक्षस का वध मां दुर्गा ने किया था और लोगों को उसके अत्याचारों से बचाया था.
माता के इस जीत के कारण महिषासुर मर्दिनी कहा जाता है. चैतुरगढ़ में स्थापित ये प्राचीन मंदिर और माता की मूर्ति इस स्थान की धार्मिक महत्व को और अधिक बढ़ा देती है.
किले के तीन मेन गेट
चैतुरगढ़ का ये प्राचीन किला अपनी अनोखी बनावट के कारण जाना जाता है. इतिहास के पन्नों के अनुसार इस किले में प्रवेश के लिए तीन मेन गेट बनाए गए थे.
इनके नाम मेनका द्वार, हुंकारा द्वार और सिंहद्वार हैं. स्थानीय मान्यताओं और संस्कृति विभाग के विवरणों में इन द्वारों के कुछ अन्य नाम भी मिलते हैं.
किले की पूरी बनावट को देखकर यह साफ पता चलता है कि पुराने समय में राजा-महाराजा सुरक्षा के लिए प्रकृति का किस तरह शानदार इस्तेमाल करते थे.
पहाड़ी की चोटी पर बने पांच तालाब और रहस्यमयी शंकर गुफा
पहाड़ी के ऊपरी हिस्से में कई समतल मैदान और कुल पांच सुंदर तालाब बने हुए हैं. खास बात ये है कि इनमें से तीन तालाबों में पूरे साल पानी भरा रहता है.
इसके अलावा मंदिर से करीब तीन किलोमीटर की दूरी पर एक बेहद खूबसूरत शंकर गुफा भी मौजूद है.
इस गुफा में करीब 35 फीट तक घुटनों के बल अंदर जाने पर भगवान शंकर के दर्शन होते हैं. यहां कुल चार गेट हैं, जिनमें एक गुप्त गेट भी शामिल है.
राजा को सपने में दिए थे दर्शन
वहां के लोगों के मुताबिक, उन्हें माता की सेवा करते हुए 17 साल हो चुके हैं. लोक मान्यताओं के अनुसार महिषासुर का वध करने के बाद माता ने यहां राजा को सपने में आकर मंदिर बनवाने का आदेश दिया था.
इसके बाद राजा ने यहां भव्य मंदिर का निर्माण कराया और आसपास तालाब व सुरक्षा दीवारें बनवाईं.
नवरात्रि के इन दिनों में चैतुरगढ़ के इस दरबार में माता के दर्शन के लिए भक्तों का तांता लगा रहता है. लोग अपनी मन्नतें मांगने और माता का आशीर्वाद लेने के लिए बड़ी संख्या में यहां आते हैं.
(Disclaimer): इस लेख में दी गई जानकारी ऐतिहासिक दस्तावेजों, स्थानीय मान्यताओं और मंदिर के पुजारियों द्वारा बताए गए तथ्यों पर आधारित है.
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