SOCIAL MEDIA

Newsletter

PARTNER SITES
Select language

बरगद को क्यों कहते हैं 'संन्यासी वृक्ष' और क्या है इसका महादेव से नाता, क्यों इस विशाल पेड़ को श्मशान घाट के पास लगाते हैं?

बरगद के पेड़ से जुड़ी वैसे तो कई धार्मिक मान्यताएं हैं लेकिन क्या आप जानते हैं कि बरगद को क्यों 'संन्यासी वृक्ष' कहते हैं, इस पेड़ का अध्यात्म से क्या संबंध है और इसका शिव जी से क्या संबंध है. आइए इस बारे में विस्तार से जानें.

Written By Padma Shree Shubham
Published: Oct 31, 2026, 10:25 PM IST | Updated: Oct 31, 2026, 10:30 PM IST
Join

बरगद का वृक्ष हमेशा से पूजनीय रहा है. इसकी विशाल शाखाएं, जड़ें और लंबी आयु इसे अन्य पेड़ों से अलग बनाती है. बरगद का पेड़ स्थिरता, चेतना और अमरत्व को दर्शाता है. यह कोई सामान्य सा पेड़ नहीं है बल्कि हिंदू समाज में हमेशा से इसकी धार्मिक और आध्यात्मिक महत्ता रही है. आइए इस लेख में विस्तार से जानें कि आखिर बरगद के पेड़ को क्यों 'संन्यासी वृक्ष' कहते हैं, क्या है इसका महादेव से नाता और क्यों इस पेड़ को श्मशान घाट के पास लगाने की परंपरा चली आ रही है.

बरगद को 'व्रट वृक्ष' और 'संन्यासी वृक्ष' क्यों कहते हैं?

बरगद के पेड़ को 'व्रट वृक्ष' कहा जाता है साथ ही इसे 'संन्यासी वृक्ष' कहकर भी संबोधित किया जाता है. इन दोनों नामों के पीछे पुरानी परंपराओं का गहरा संबंध है. दरअसल, बरगद अमरता का प्रतीक है. इस पेड़ की पूजा वट सावित्री व्रत में की जाती है और पति के दीर्घायु के लिए पेड़ से प्रार्थना की जाती है. अन्य व्रत त्योहारों पर भी बरगद के पेड़ की पूजा करने का विधान है. वहीं बरगद को संन्यासी वृक्ष कहने के पीछे का कारण ये है कि पुराने समय से ही संन्यासी और तपस्वी बरगद के पेड़ के नीचे बैठकर तपस्या किया करते थे. तभी से इसे संन्यासी वृक्ष नाम दिया गया.

बरगद के पेड़ का शिव जी से संबंध

बरगद के पेड़ का शिव जी से गहरा संबंध है. दरअसल, कुछ मान्यताएं हैं कि इस पेड़ में ब्रह्मा विष्णु और महेश का वास है, तो वहीं कुछ मान्यताओं में बरगद के पेड़ को भगवान शिव का प्रतीक माना गया है. जिस तरह शिव जी अनादि और अनंत हैं वैसे ही बरगद का पेड़ एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी के लिए अमर रहता है. जहां पहली पीढ़ी को इस पेड़ के अंत का पता नहीं होता, तो वहीं आगे की पीढ़ियों को यह नहीं पता होता है कि यह पेड़ कितना पुराना हो सकता है. भगवान शिव संहारक को हैं लेकिन परिवर्तन और पुनर्जन्म के भी देवता माने गए हैं जो सृष्टि के हर अंत से एक नई शुरुआत के होने का संकेत देते हैं. इसी तरह बरगद की शाखाओं से जो नई जड़ें निकल रही होती हैं वो भी नई शुरुआत को दर्शाती हैं. फिर एक दिन विशाल पेड़ बन जाती हैं. बरगद हमेशा से स्थिरता, नई शुरुआत, अमरत्व और आध्यात्मिक चेतना का प्रतीक रहा है और इस विशेषता के कारण आज भी हम देख पाते हैं कि कई प्राचीन मंदिरों और तपोस्थलों में इस पेड़ को लगाया गया है और उसके नीचे शिवलिंग की स्थापना की गई है. ऐसा होना बताता है कि बरगद और महादेव के बीच का संबंध कितना गहरा है.

पौराणिक कथा में शिव जी और बरगद का पेड़

शिव जी का बरगद के पेड़ से गहरा नाता है. ऐसी पौराणिक कथा है कि देवी सती ने अपने पिता दक्ष के यज्ञ में स्वयं को समाहित कर जब आत्मदाह कर लिया तो शिव जी ने वैराग्य धारण कर लिया. उन्होंने बरगद के नीचे बैठकर ध्यान धारण कर लिया था. तब से ही बरगद के पेड़ के नीचे बैठकर ऋषियों के द्वारा तपस्या करने की परंपरा चल पड़ी. ऋषि और संन्यासी बरगद के पेड़ के नीचे शिवलिंग को स्थापित कर ध्यान और पूजा करने लगे. शिव जी तपस्वी हैं, आदि योगी हैं और सभी भूतों और आत्माओं के स्वामी हैं.

श्मशान घाट के पास बरगद

बरगद के पेड़ की छाया में तपस्वियों ने तप करना शुरू किया ही इसके साथ ही इसी पेड़ के नीचे अपने देह का त्याग भी करने लगे. पौराणिक मान्यताएं हैं कि इसी कारण बरगद के पेड़ को पूर्वजों की आत्माओं का पेड़ कहकर भी संबोधित किया जाने लगा. यही कारण है कि कई श्मशान घाट के पास या इसके ठीक बाहर बरगद के पेड़ लगाए जाने लगे. जिससे कि आत्माओं को एक स्थान प्राप्त हो सके और शिव जी के आशीर्वाद से ये आत्माएं शांति पा सकें. मृत्यु और शव के स्थान पर होने के कारण इस पेड़ को यम का भी प्रतीक माना गया है.

डिस्क्लेमर: यह लेख पंचांग, धार्मिक मान्यताओं और जनश्रुतियों पर आधारित है. इसकी वैज्ञानिक पुष्टि नहीं है. किसी भी मान्यता को अपनाने से पहले विद्वान से परामर्श अवश्य लें.)

और पढ़ें- क्या आप भी दान और दक्षिणा को एक ही समझते हैं? अंतर जान लें वरना पुण्य फल हो जाएगा शून्य

Add Zee News as a Preferred Source
TAGS:

About the Author

पद्मा श्री शुभम् को पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 साल का अनुभव. मॉस कम्‍युनिकेशन ग्रेजुएट और हिंदी लिटरेचर से पोस्‍ट ग्रेजुएट. मीडिया में डिजिटल प्लेटफॉर्म से करियर शुरू करने के बाद कई संस्थाओं में काम किया. Nedrick News, TFI Post जैसी संस्थाओं में कार्यरत रहीं. इसके बाद Zee News जॉइन किया. समाचार और वर्तमान घटनाओं पर लिखने पढ़ने में रुचि. धर्म और ज्योतिष में अधिक रुचि. वर्तमान में धर्म और ज्योतिष संबंधी लेख लिखने में कार्यरत. पद्मा से आप padma.shubham@India.com मेल के जरिए सीधे संपर्क कर सकते हैं.
Read More

ZEENEWS TRENDING STORIES